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राजस्थान के इस मंदिर में एक महीने तक मनाई जाती है दीपावली

हजारों साल पुराना ये मंदिर जोधपुर में लूणी के धुंधाड़ा में है जहां कई दिनों तक दीपमालाओं से माता का श्रंगार होता है.

राजस्थान के इस मंदिर में एक महीने तक मनाई जाती है दीपावली
धनतेरस से लेकर कार्तिक सुदी पूर्णिमा तक माता के दरबार में दीपो की माला सजाई जाती हैं.

अरूण हर्ष, जोधपुर: देवी देवताओं को फूलों की माला चढ़ाने के बारे में तो हम सभी जानते हैं लेकिन यह एक ऐसा मंदिर है जहां कार्तिक मास में धनतेरस से लेकर बड़ी दिवाली यानी की कार्तिक सुदी पूर्णिमा तक लगातार मंदिर को दीपमालाओं से सजाया जाता है. हजारों साल पुराना ये मंदिर जोधपुर में लूणी के धुंधाड़ा में है जहां कई दिनों तक दीपमालाओं से माता का श्रंगार होता है.

राजस्थान एक ऐसा प्रदेश है जिसमें कई मंदिर है और मंदिर की अपनी महीमा है. तनोट माता मंदिर से लेकर बाबा रामदेव मंदिर और खाटूश्यामजी जैसे विश्व प्रसिद्ध मंदिर भी हैं लेकिन आज हम JODHPUR के पास धूंधाड़ा के जिस मंदिर की बात कर रहे है यह मंदिर श्रीमाली समाज का है लेकिन दीप मालिका के पर्व पर धूंधाड़ा के साथ साथ पूरे इलाके का यह आस्था का स्थल बन जाता है, जहां मां के दरबार में दियों की माला के दर्शन करने और मां के महा आरती में भाग लेने के लिए सैकड़ों लोगों का तांता लगा रहता है. धनतेरस से लेकर कार्तिक सुदी पूर्णिमा तक माता के दरबार में दीपो की माला सजाई जाती हैं. यहां श्रद्धालु अपने घरों से दीपक लेकर आते हैं और उनसे मां के दरबार में माला बनाई जाती है. यहां हर शाम मां की महाआरती होती है जिसमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं. 

मंदिर के पुजारी रामचंद्र महाराज के मुताबिक ये परंपरा सैकड़ों सालों से चली आ रही है और रामचंद्र महाराज का परिवार तीन पीढ़ियों से इसी महालक्ष्मी मंदिर में पूजा कर रहे हैं. हर साल यहां के सैकड़ों लोगों को कार्तिक महीने का इंतजार रहता है. दीपमाला के जश्न के आखिर में अन्नकूट होता है. उस दिन मां का विधि विधान से वैदिक मंत्रों से पूजा-अर्चना के साथ महाआरती होती है और लोगों में महाप्रसादी का वितरण होता है.