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राजस्थान: गिरफ्तारी के बावजूद ACB भ्रष्टाचारियों को नहीं दिला पा रही सजा

एसीबी भ्रष्टाचारियों को गिरफ्तार करने के बाद बाद भी कोर्ट से सजा दिलाने में ACB फेल ही रही है. एसीबी के कोर्ट में वर्तमान में करीब 2500 मामलों में ट्रायल चल रहा है. 

राजस्थान: गिरफ्तारी के बावजूद ACB भ्रष्टाचारियों को नहीं दिला पा रही सजा
एसीबी की ओर से दर्ज किए गए बड़े केस अभी अंडर ट्रायल चल रहे हैं.

जयपुर: राजस्थान में जितनी तत्परता रिश्वत के आरोपी अफसरों और कर्मचारियों को पकड़ने में नजर आई, उन्हें सजा दिलाने में उतनी ही ढिलाई नजर आती है. यही कारण है कि एसीबी द्वारा रंगे हाथों पकड़े गए ज्यादातर अफसर सजा की जद से बाहर आ गए हैं. रिश्वत लेते पकड़े जाने पर जिन लोगों को सजा हुई उनमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, तहसीलदार, पटवारी, एलडीसी, यूडीसी, पुलिस महकमे के कांस्टेबल और एसआई स्तर के पुलिसकर्मी शामिल हैं. आईएएस, आईपीएस, आरपीएस और आरएएस स्तर के अफसरों को सजा नहीं मिल पाई. एसीबी की ओर से दर्ज किए गए बड़े केस अभी अंडर ट्रायल चल रहे हैं. ऐसे में एसीबी के साथ सरकार की ओर से पैरवी करने वाले वकीलों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है.

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के अफसर भले ही एक के बाद एक करके भ्रष्ट अफसरो को रंगे हाथ रिश्वत लेते गिरफ्तार कर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का प्रयास करें लेकिन लेकिन उसकी तैयारियां और सबूत जुटाने से लेकर कोर्ट में आरोप साबित करने तक एसीबी के अधिकारी बेहद कमजोर नजर आते हैं. तभी, एसीबी भ्रष्टाचारियों को गिरफ्तार करने के बाद बाद भी कोर्ट से सजा दिलाने में ACB फेल ही रही है. एसीबी के कोर्ट में वर्तमान में करीब 2500 मामलों में ट्रायल चल रहा है. इनमें आईएएस व आईपीएस स्तर समेत वरिष्ठ अधिकारियों के प्रकरण भी शामिल है। 

एसपी पर एक लाख लेने का आरोप, बरी
2012 में एसीबी में एसपी अजय सिंह को एएसआई के मार्फत एक लाख रु. की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था. जेल से बाहर आने के बाद अजय सिंह के खिलाफ लगे आरोप कोर्ट ने खारिज कर दिए थे और बरी कर दिया था. अजय सिंह पर धौलपुर में हाल ही पोस्टिंग के दौरान एक डिप्टी एसपी ने फिर वसूली के आरोप लगाए थे. इसकी जांच चल रही है. अजय सिंह फिलहाल आरएसी में तैनात है.

अजमेर मंथली प्रकरण
जनवरी-2013 में दलाल के मार्फत थानों से मंथली लेने के आरोप में एसपी राजेश मीणा, एडिशनल एसपी लोकेश सोनवाल समेत 8 इंस्पेक्टरों को गिरफ्तार किया था. एसीबी ने सभी के खिलाफ चालान पेश कर दिया था जो कोर्ट में पेंडिंग है. खास बात यह है कि जेल से बाहर आने के बाद राजेश मीणा पदोन्नत होकर डीआईजी सिक्योरिटी के पद पर लगे हुए है, जबकि लोकेश सोनवाल आरएसी में तैनात हैं.

लिपिक भर्ती में धांधली
अजमेर में न्यायिक लिपिक भर्ती में धांधली करने के आरोप में एसीबी ने 2014 में जिला सत्र न्यायाधीश अजय शारदा को गिरफ्तार कर हड़कंप मचा दिया था. एसीबी ने जज के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी थी. लेकिन तब से मामला कोर्ट में पेंडिंग है. अजय शारदा रिटायर्ड हो चुके हैं. इस मामले में कई लोगों को एसीबी ने पकड़ा था. इनमें से एक भी आरोपी को अभी तक सजा नहीं हुई.

महिला दलाल के मार्फत रिश्वत ली
मई 2014 में एसीबी ने कोटा के तत्कालीन एसपी सत्यवीर सिंह को महिला दलाल के मार्फत रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था. एसीबी ने आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश कर दिया था, लेकिन अभी तक मामला कोर्ट में पेंडिंग है. खास बात यह है कि जेल से बाहर आने के बाद सत्यवीर डीआईजी पद पर पदोन्नत हो गए और वर्तमान में डीआईजी आरएसी के पद पर लगे हुए हैं.

नकली घी में बड़ा रैकेट पकड़ा था
एसीबी ने 2013 में नकली घी प्रकरण का खुलासा किया। दलाल दिनेश सिंघल, फूड इंस्पेक्टरों और पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कियां एसीबी कोर्ट में प्रकरण को धारा 173 (8) में पेंडिंग रखते हुए चालान पेश कर चुकी है. डीजी जसवंत संपतराम का नाम भी जुड़ा था। वे रिटायर हो गए थे, अभी तक एसीबी की जांच पेंडिंग है. गिरफ्तार हो चुके आरोपियों को अभी तक सजा नहीं हुई और जेल से बाहर आने के बाद बहाल होकर पोस्टिंग ले ली.

जयपुर नगर निगम में घूसखोरी पकड़ी
10 अगस्त 2014 को एसीबी ने एक्सईएन पुरुषोत्तम जेसवानी को 15 लाख रु. की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया. सितंबर में तत्कालीन निगम आयुक्त एलसी असवाल को भी गिरफ्तार किया था. एसीबी ने उसी माह और फिर 2015 में दो बार चार्जशीट की, लेकिन मामले में अन्य अफसरों की भूमिका की जांच अटकी हुई है. खास बात यह है कि असवाल जेल से बाहर आने के बाद रिटायर हो चुके है और कोर्ट में ट्रायल चल रही है.

खान विभाग घूसकांड भी पेंडिंग ही है
16 सितंबर 2015 को खान विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव आईएएस अशोक सिंघवी, एडिशन डायरेक्टर, माइनिंग इंजीनियर समेत छह को 2.55 करोड़ रु. की रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार किया। नवंबर 2015 को चालान पेश कर दिया था। सिंघवी के खिलाफ मामला कोर्ट में पेंडिंग है. जेल से बाहर आने के बाद सिंघवी को पदोन्नति मिली है. वह इंद्रा गांधी पंचायतीराज में डायरेक्टर जनरल के पद पर कार्यरत है, सजा किसी को नहीं.

एनआरएचएम घूसकांड भी कोर्ट में है
मई 2016 में एनआरएचएम (आईईसी) शाखा में घूसकांड उजागर. आईएएस नीरज क. पवन और दलाल अजीत सोनी समेत 6 लोग गिरफ्तार. सरकार ने केस चलाने के लिए अनिल अग्रवाल के खिलाफ पीएस नहीं दी. अन्य सभी के खिलाफ एसीबी ने अन्य की भूमिका जांचने के लिए धारा 173 (8) में पेंडिंग रखते हुए चालान पेश कर दिया था. नीरज के. पवन जेल से बाहर आने के बाद को-ऑपरेटिव विभाग में रजिस्ट्रार हैं.

जलदाय घूसकांड में जेल से छूटे सभी
19 जुलाई 2016 को एसपीएमएल कंपनी से रिश्वत लेने के आरोप में चीफ इंजीनियर आरके मीणा एडिशन चीफ इंजीनियर सुबोध जैन समेत 5 लोग गिरफ्तार हुए 19 सितंबर को कोर्ट में चालान पेश कर जांच की मोहलत मांगी. एसीबी के अधिकारी चीफ इंजीनियर तक कार्रवाई कर जांच के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं. खास बात यह है कि सभी आरोपी जेल से बाहर आ गए, लेकिन गिरफ्तार हुए आरोपियों में से एक भी आरोपी को सजा नहीं हुई है.

एकल पट्टा प्रकरण
सितंबर 2015 में यूडीएच के अधिकारियों से मिलीभगत कर एकल पट्टा जारी करने का खुलासा. सोसायटी के शैलेन्द्र गर्ग, आईएएस जीएस संधू, दो आरएएस अफसर अवैध पट्टा जारी करने के आरोप में गिरफ्तार. एसीबी चार्जशीट पेश कर चुकी है. अभी तक किसी को भी सजा नहीं हुई है। यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल का नाम भी सामने आया और आईएएस एनएल मीणा को नामजद किया था. लेकिन हाल ही में एसीबी ने दोनों को क्लीनचिट दे दी है, जबकि संधू रिटायर्ड हो चुके हैं.