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राजस्थान: छात्रसंघ चुनाव में मतदान फीसदी बढ़ाने के लिए प्रशासन ने चलाए कार्यक्रम

विवि प्रशासन द्वारा तमाम प्रयास करने के बाद भी पिछले साल कैम्पस में महज 50.76 फीसदी ही मतदान हो पाया था. वहीं पिछले सात सालों में वर्ष 2016 में ये आंकड़ा 58 फीसदी पर पहुंचा था. 

राजस्थान: छात्रसंघ चुनाव में मतदान फीसदी बढ़ाने के लिए प्रशासन ने चलाए कार्यक्रम
साल 2016 में सबसे ज्यादा 58 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था.

ललित कुमार/जयपुर: चाहे लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव, लोकतंत्र के इस यज्ञ में युवा बढ़-चढ़कर आहूती देते हैं लेकिन जब बात आती है छात्रसंघ चुनावों की तो ये युवा मतदाता अपने पैर पीछे खींच लेते हैं. इसी का नतीजा है कि पिछले 7 सालों में राजस्थान विश्वविद्यालय में मतदान फीसदी 60 फीसदी से ज्यादा नहीं हो पाया है. विवि प्रशासन द्वारा तमाम प्रयास करने के बाद भी पिछले साल कैम्पस में महज 50.76 फीसदी ही मतदान हो पाया था. वहीं पिछले सात सालों में वर्ष 2016 में ये आंकड़ा 58 फीसदी पर पहुंचा था, लेकिन उसके बाद से ही मतदाताओं में मतदान करने का रुझान कम हुआ है.

जब बात मुख्य राजनीति की आती है तो युवा अपने मताधिकार का प्रयोग करने में सबसे आगे होते हैं. जब बात आती है छात्रसंघ चुनाव कि तो यह युवा अपने पैर पीछे खींच लेते हैं. ऐसा इसलिए छात्र राजनीति में बढ़ते धनबल और बाहुबल की वजह से राजस्थान विश्वविद्यालय में अगर पिछले 7 सालों की बात की जाए तो आज तक कभी 60 फीसदी से ज्यादा मतदान नहीं हो पाया है. यूनिवर्सिटी प्रशासन और छात्र संगठन के तमाम प्रयासों के बाद भी युवा मतदाता छात्र राजनीति के इस महाकुंभ में हिस्सा लेने से बचते हुए नजर आते हैं.

पिछले सात सालों में जहां वर्ष 2013 में सबसे कम 41 फीसदी मतदान हुआ तो वहीं वर्ष 2016 में सबसे ज्यादा 58 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. मतदान फीसदी बढ़ाने के लिए राविवि की ओर से कई कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं. इस साल भी मतदान फीसदी बढ़ाने के लिए योजना तैयार कर ली गई है. राविवि कुलपति आरके कोठारी का कहना है कि राविवि सहित चारों संघटक कॉलेजों में छात्र मतदाताओं को मतदान के लिए अपील की जा रही है. इसके लिए डीएसडब्ल्यू के साथ मिलकर नुक्कड़ नाटक और अन्य कार्यक्रम की चलाए जाएंगे.

छात्रसंघ चुनाव में राविवि प्रशासन और पुलिस प्रशासन की सख्ती भी कहीं ना कहीं मतदान फीसदी कम रहने का एक बड़ा कारण माना जाता रहा है. जिसके जवाब में कुलपति आरके कोठारी का कहना है कि चाहे मतदान कम हो लेकिन वो स्वच्छ होना चाहिए. राविवि सहित चारों संघटक कॉलेजों में समय समय पर बड़ी संख्या में फर्जी आईडी कार्ड पकड़े जाते रहे हैं. ये फर्जी आईडी कार्ड से अगर कोई बाहरी छात्र मतदान करता है तो ये चुनावों का मजाक होगा. ऐसे में बार कोड स्कैनिंग मशीन की मदद से ही प्रवेश दिया जाता है. मतदान के दिन भी कई फर्जी आईडी कार्ड पकड़ में आते हैं.

राविवि प्रशासन मतदान फीसदी को बढ़ाने के लिए अपने अपने स्तर पर तमाम प्रयास करता रहा है. लेकिन छात्र संगठन भी इसमें पीछे नहीं है. दोनों ही प्रमुख छात्र संगठन एबीवीपी और एनएसयूआई अभी से मतदान फीसदी बढ़ाने को लेकर तैयार नजर आ रहे हैं. एबीवीपी की ओर से जहां रैली और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मतदान करने की अपील की जाएगी तो वहीं दूसरी ओर एनएसयूआई की ओर से हर कॉलेज,विभाग में जाकर छात्र मतदाताओं से मतदान करने की अपील की जाएगी.

बहरहाल, राविवि प्रशासन मतदान फीसदी बढ़ाने को लेकर अपनी कमर कस चुका है. वहीं छात्र नेता भी मतदान करने की अपील करते हुए नजर आ रहे हैं. लेकिन इतिहास गवाह है कि जब जब ज्यादा मतदान हुआ है तो इसका नुकसान भी दोनों ही संगठन को हुआ है और जीत निर्दलीय के पाले में गई है.