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राजस्थान: कालवी के बाद सिरोही के राजघराने ने किया राम का वंशज होने का दावा, कहा...

पूर्व महाराज देवड़ा ने बताया मालव वंश की बात करें तो सिकंदर के समय तक मूलस्थान राजधानी तक वे रहे. 323 ईसा पूर्व में मालव और सिकंदर के बीच युद्ध हुआ. 

राजस्थान: कालवी के बाद सिरोही के राजघराने ने किया राम का वंशज होने का दावा, कहा...
रघुवीर सिंह देवड़ा का दावा है कि लक्ष्मण के पड़ पौत्र मालव हुआ करते थे

साकेत गोयलसिरोही: सुप्रीम कोर्ट की ओर से राम के वंशज होने या नहीं होने के सवाल के बाद जहां जयपुर और उदयपुर राजघरानों की ओर से उनके वंशज होने का दावा किया गया था. वहीं अब सिरोही का तीसरा राजघराना राम के वंशज होने का दावा कर रहा है. यहां तक कि सिरोही के पूर्व महाराजा रघुवीरसिंह का कहना है कि उनके पास 100 वंशजों की पूरी सूची है और यदि सुप्रीम कोर्ट उन्हें बुलाती है तो वो सबूतों के साथ पेश होंगे. 

उनकी ओर से यह भी दावा किया गया है कि राजस्थान राम के वंशजों की कर्मभूमि है. दरअसल, 5 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर को लेकर नियमित सुनवाई शुरू हुई थी. 9 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की ओर से भगवान राम के वकील से यह पूछा गया कि अयोध्या या फिर दुनिया में कहीं भगवान राम का वंशज है या नहीं? इस पर वकील की ओर से यह जवाब दिया गया कि हमें इसकी जानकारी नहीं है लेकिन जयपुर और उदयपुर राजपरिवार के बाद सिरोही राजघराने की ओर से उनके वंशज होने का दावा किया जा रहा है. 

पूर्व महाराजा और इतिहासकार के जानकार रघुवीर सिंह देवड़ा का दावा है कि लक्ष्मण के पड़ पौत्र मालव हुआ करते थे, जिनका मूलस्थान यानी आज मुल्तान है उसे राजधानी बनाया और हम लोग उन्हीं के वंशज हैं. मालव और सिकंदर के बीच युद्ध के बाद की गणना की जाए तो हम 100वीं पीढ़ी या वंशज हैं. पहले मालव हुए और बाद में चौहान और अब देवड़ा. उनका यह भी दावा है कि इन 100 पीढियों और वंशजों की सूची उनके पास है. यदि सुप्रीम कोर्ट उन्हें बुलाती है तो वो सबूतों के साथ पेश होंगे और यह बताएंगे कि वे राम के वंशज हैं.

पूर्व महाराजा रघुवीरसिंह ने दिए ये तीन सबूत

1. मालव वंशज: यह सत्य है कि मालव लक्ष्मण के पड़ पौत्र थे. मालव के बाद विक्रमादित्य और चंद्रगुप्त मौर्य का शासन आया, जो इन्हीं के वंशज थे.

2. जब गुप्त साम्राज्य भी समाप्त हो गया तो आबूरोड स्थित वशिष्ठ आश्रम में कुछ लोग यहां पहुंचे. जहां चव्हार, परिहार, परमार व सोलंकी चारों को अलग-अलग राज्य सौंपे गए.

3. पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु के बाद 1200 में सिरोही स्टेट की स्थापना हुई. उत्पति मालव वंश से हुई, जो बाद में 1228 में चौहान हुए और अब देवड़ा.

सिरोही स्टेट की स्थापना के बाद 75वां राजा बना
पूर्व महाराज देवड़ा ने बताया मालव वंश की बात करें तो सिकंदर के समय तक मूलस्थान राजधानी तक वे रहे. 323 ईसा पूर्व में मालव और सिकंदर के बीच युद्ध हुआ. 1206 में सिरोही स्टेट की स्थापना हुई थी. सबसे पहले माणिंगराय हुए थे और वहां से हमारी 38वीं पीढ़ी हूं. मेरे पड़ दादा महाराजा केसर सिंह की 35वीं पीढ़ी थी. 1206 से मालव वंश की 75वीं और 323 ईसा पूर्व से गणना करें तो लक्ष्मण के पड़पौत्र की 100वीं पीढ़ी थी. पूर्व महाराज रघुवीर सिंह ने जयपुर और उदयपुर राजघराने के भी राम के वंशज होने की पुष्टि करते हुए बताया कि जयपुर कुश और उदयपुर के पूर्व महाराज महेंद्रसिंह लव के वंशज हैं. इसके प्रमाण भी हैं.