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राजस्थान: पुरातत्व विभाग खर्च करती है करोड़ों, फिर भी बदहाल भटनेर का किला

सैंकड़ों साल पहले स्थापित ये किला सबसे पुराना किला तो है ही, साथ ही यह देश के सबसे मजबूत किलों में भी शामिल रहा है. 

राजस्थान: पुरातत्व विभाग खर्च करती है करोड़ों, फिर भी बदहाल भटनेर का किला
पुरातत्व विभाग भी इस किले के रखरखाव में करोड़ों का बजट खर्च करता है.

मनीष शर्मा/हनुमानगढ़: राजस्थान के हनुमानगढ़ का भटनेर किला देश के सबसे पुराने किलों में शामिल है. कहते है कि इस किले का निर्माण भगवान श्रीराम के भाई भरत ने करवाया था. जिसे भटनेर किले का इतिहास नहीं पता. उसके लिए राजस्थान का इतिहास अधूरा है. लेकिन फिर भी सबसे मजबूत किलों में गिना जाने वाला भटनेर आज अपनी दुर्दशा के आंसू बहा रहा है.

विलुप्त हो चुकी सरस्वती और वर्तमान की घग्घर नदी के मुहाने पर सैंकड़ों साल पहले स्थापित ये किला सबसे पुराना किला तो है ही, साथ ही यह देश के सबसे मजबूत किलों में भी शामिल रहा है. 52 बीघा क्षेत्र में फैले 52 बुर्जों वाले इस किले का इतिहास जितना शानदार है, आज उसकी हालत उतनी ही जर्जर है. किले के आसपास आबादी बस चुकी है, लेकिन इस किले के बुर्ज कभी भी गिर सकते है. पुरातत्व विभाग भी इस किले के रखरखाव में करोड़ों का बजट खर्च करता है. लेकिन इसमें हुए घोटालों की जांच आज भी अधूरी है.

कितना महत्वपूर्ण है यह किला
विदेश आक्रांताओं के दिल्ली जाने के लिए यही किला हिंदुस्तान का प्रवेश द्वार था. इस किले ने सभी विदेशी आक्रांताओं के हमले झेले है. महाराजा भूपतसिंह ने इस किले के साथ साथ पंजाब के भटिंडा और हरियाणा के सिरसा के किलों की स्थापना की थी. भूपतसिंह के नाम पर ही भटिंडा और भटनेर नाम पड़े. इस किले से पंजाब के भटिण्डा और हरियाणा के सिरसा तक एक बहुत बड़ी भूमिगत सुरंग थी.

विदेशी आक्रमणकारी जब भारत में प्रवेश करते तो उनका पहला सामना भटनेर से ही होता था. अगर किसी स्थिति में भटनेर के राजा हार जाते तो वे नीचे सुरंगों से ही आगे भटिण्डा और सिरसा पहुंच जाते और उनको हमले की सूचना दे देते. जिससे उनको पहले आक्रमण करने का मौका मिल जाता था.

इसके अलावा यहां पर एक 1600 साल पुराना जैन मंदिर भी है. इससे ये भी पता चलता है कि यहां के राजाओं में जैन समाज के प्रति भी रूझान था. किले के इतिहास को पढ़कर अगर कोई विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंच जाए तो इसकी दुर्दशा देखकर वो भी खाली हाथ ही लौटेगा. विडंबना ये है कि देश के सबसे जमबूत किलों में से एक किला आज भी पर्यटन के नक्शे पर नहीं उभर पाया है.