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राजस्थान विधानसभा चुनाव: टिकट के लिए कांग्रेस के नेताओं को देनी पड़ रही है गारंटी

 स्क्रीनिंग कमेटी ने सभी दिग्गज नेताओं को साफ कर दिया है कि अगर वह अपने समर्थक के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं तो उन्हें लिखित में गारंटी देनी होगी.

राजस्थान विधानसभा चुनाव: टिकट के लिए कांग्रेस के नेताओं को देनी पड़ रही है गारंटी
जयपुर की 200 विधानसभा सीटों में करीब 70 नाम तय किए जा चुके हैं.

सुशांत पारीक/जयपुर: राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस में टिकट को लेकर मंथन का दौर जारी है. जयपुर से लेकर दिल्ली तक टिकट के दावेदारों की भारी भीड़ नजर आ रही है. स्क्रीनिंग कमेटी से लेकर राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी सह प्रभारी पीसीसी चीफ से लेकर संगठन महासचिव अशोक गहलोत तक सभी की राय शुमारी की जा रही है. लेकिन इन सब के अलावा प्रदेश इलेक्शन कमेटी के 44 सदस्यों की राय भी बेहद अहम समझी जा रही है. 

खास बात यह है कि इस बार स्क्रीनिंग कमेटी ने सभी दिग्गज नेताओं को साफ कर दिया है कि अगर वह अपने समर्थक के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं तो उन्हें लिखित में गारंटी देनी होगी. यही कारण है कि इस बार कुमारी शैलजा के साथ वन टू वन कार्यक्रम में अधिकांश नेताओं ने अपने समर्थकों के नाम बंद लिफाफे में सौंपे हैं. अब सवाल ये कि जब लिफाफे खुलेंगे तो इन नामों को लेकर पार्टी आलाकमान ने क्या निर्णय लेता है.

खबरों की मानें तो कांग्रेस में जयपुर से लेकर दिल्ली तक रायशुमारी का एक पहला दौर पूरा हो चुका है. जानकारी मिली है कि पहले दौर में जयपुर की 200 विधानसभा सीटों में करीब 70 नाम तय किए जा चुके हैं. इन नेताओं में अधिकांश सीटों के नाम पर कोई पैनल नहीं केवल सिंगल नाम है इनमें केवल दिग्गज नेताओं के अलावा वर्तमान विधायकों के नाम शामिल है 6 सीटों के लिए स्क्रीनिंग कमेटी चेयर पर्सन ने प्रदेश इलेक्शन कमेटी के सदस्यों से जो फीडबैक लिया है.

बड़ी बात यह रही है कि इस बार राजस्थान कांग्रेस के पहली पंक्ति के दिग्गज नेताओं ने अपने समर्थकों के नाम बंद लिफाफे में कुमारी शैलजा को सौपे हैं और साथ ही इन उम्मीदवारों की जीत का दावा भी लिखित में किया है यानी राजस्थान कांग्रेस के बड़े नेताओं ने जीत की गारंटी दी है. 

दरअसल राजस्थान के रण में उतरने को तैयार कांग्रेस के नेताओं के सामने इस बार एक बड़ी चुनौती पेश आ रही है. कांग्रेस की तरफ से टिकट वितरण के लिए केवल जिताऊ उम्मीदवार का फार्मूला तय होने से कई सारे बैरिकेडिंग दूर हो गए हैं. जिनमें दो बार की हार और 70 साल की उम्र का पैरामीटर भी शामिल था लेकिन इस बार बड़े और दिग्गज नेताओं के सामने एक अलग ही परेशानी पेश आ रही है खासतौर पर अपने उन समर्थक और नेताओं को टिकट दिलाने में जो पिछले साढे 4 साल से उनके लिए काम कर रहे थे.

स्क्रीनिंग कमेटी चेयर पर्सन कुमारी शैलजा ने इस बार सभी बड़े दिग्गज नेताओं को दो टूक लहजे में कह दिया कि अगर उन्हें अपने समर्थकों की टिकट के लिए पैरवी करनी है तो उन्हें जीत की जमानत देनी होगी. यही कारण है विजयपुर में प्रदेश इलेक्शन कमेटी के सदस्यों से मुलाकात के दौरान अधिकांश नेता बंद लिफाफा में अपने समर्थकों के नाम लेकर आए और उन्हें कुमारी शैलजा को सौंपा. अपने समर्थकों के लिए टिकट की पैरवी करने वाले इन बड़े नेताओं में कांग्रेस के सीपी जोशी, अश्क अली टाक महेंद्रजीत सिंह मालवीया शांति धारीवाल मास्टर भंवरलाल मेघवाल जैसे बड़े नाम शामिल है. जिन्होंने अपने समर्थकों के लिए टिकट की पैरवी की है.

कांग्रेस इस बार की विधानसभा चुनाव में किसी तरह की कोई रिस्क नहीं लेना चाहती. लिहाजा बड़े नेताओं को दो टूक लहजे में साफ कर दिया गया है कि अगर आपको लगता है कि कोई नेता वाकई जीत का हकदार है या जिताऊ उम्मीदवार है तभी उसके लिए पैरवी की जाए अन्यथा पार्टी को नुकसान पहुंच सकता है. यही कारण है कि इस बार विधानसभा चुनाव से पहले सभी बड़े नेताओं से लिखित में जमानत ली गई है ताकि विधानसभा चुनाव के बाद विश्लेषण किया जा सके किस नेता के कहने पर कितने उम्मीदवारों को टिकट मिला और उनमें से कितने जीत कर आए हैं. निश्चित तौर पर अगर नेताओं की गारंटी गलत साबित होती है तो पार्टी के बड़े नेताओं को विधानसभा चुनाव के बाद नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है.