राजस्थान: नई सरकार का बड़ा फैसला, संबल गांवों में विकास के लिए देगी 10-10 लाख रूपये

अनुजा निगम की योजनाओं के क्रियान्यन के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार किया जाएगा. निगम द्वारा जिन लोगों का ऋण माफ किया जाएगा उनको शीघ्र ऋण मुक्ति प्रमाण पत्र भी दिए जाएंगे.

राजस्थान: नई सरकार का बड़ा फैसला, संबल गांवों में विकास के लिए देगी 10-10 लाख रूपये
इससे पहले सचिन पायलट भी मनरेगा के जरिए रोजगार देने के निर्देश दे चुके हैं.

जयपुर/ आशीष चौहान: राजस्थान में 4,900 से ज्यादा संबल गांवों में 10-10 लाख रूपए की लागत से गहलोत सरकार मूलभूत सुविधाओं के लिए विकास कार्य करवाएगी. इन कार्यों पर 55 करोड़ रूपये खर्च किए जाएंगे. विकास कार्यों के प्रस्ताव जिलों की जिला परिषद के माध्यम से एक माह में तैयार कराए जाएंगे. वहीं जिला स्तर पर योजनाओं के पात्र लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे और जिलों में जाकर प्रभावी मॉनिटरिंग की जाएगी. 

अनुजा निगम की योजनाओं के क्रियान्यन के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार किया जाएगा. निगम द्वारा जिन लोगों का ऋण माफ किया जाएगा उनको शीघ्र ऋण मुक्ति प्रमाण पत्र भी दिए जाएंगे. इसके अलावा विभाग के अधिकारियों को 60 दिन की कार्ययोजना तैयार कर योजनाओं के क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ साथ अनुजा निगम द्वारा एससी, एसटी वर्ग और दिव्यागों, सफाई कर्मचारियों के लिए स्वरोजगार के लिए अनेक योजनाऐं संचालित हैं. 

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मास्टर भवंरलाल मेघवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि "जल्द से जल्द संबंल गांवों में विकास के काम शुरू किए जांए, जिससे गांवों का विकास हो उसे और प्रदेश उन्नति की ओर आगे बढ़ा सकें. 

अनुजा निगम के प्रबन्धक निदेशक विरेन्द्र बांकावत ने अनुजा निगम द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि "निगम द्वारा एससी/एसटी योजना के अन्तर्गत 10-10 हजार रूपये का अनुदान देकर स्वरोजगार के लिए बैंक से ऋण दिया जाता है. इसी प्रकार 4 प्रतिशत ब्याज दर पर और बीपीएल परिवारों को स्वरोजगार के लिए ऋण अनुजा निगम द्वारा मुहैया कराया जाता है. जिसमें पिछली सरकार के 25 हजार लोगों को ऋण देने बाकी है."

जाहिर है देश का विकास गांव से होकर ही गुजरता है, ऐसे में गहलोत सरकार लगातार इस दिशा में आगे बढ रही है. इससे पहले डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने भी मनरेगा के जरिए रोजगार देने के निर्देश दिए थे. जिसके बाद में पंचायतीराज विभाग लगातार इस दिशा में काम कर रहा है और 100 दिन का रोजगार मुहैया करवाने का प्रयास कर रहा है. सरकार के आते ही ग्रामीण लोगों की उम्मीदे बढने लगी है कि अब गांव की दशा और दिशा बदल जाएगी.