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राजस्थान: सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद भी टोंक में चल रहा बजरी का काला कारोबार

बीते दिनों सूबे के मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों की वीडियों कांफ्रेंस के माध्यम से मीटिंग ली थी. इस मीटिंग में टोंक जिले के जिला कलेक्टर को बजरी को रोकने के लिए साफ निर्देश दिए गए थे.

राजस्थान: सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद भी टोंक में चल रहा बजरी का काला कारोबार
प्रदेश में सरकार की सख्ती के बाद भी धड़ल्ले से बजरी का काला कारोबार जारी है.

पुरूषोत्तम जोशी/टोंक: प्रदेश के टोंक जिले से होकर गुजर रही बनास नदी में सुप्रीम कोर्ट की रोक के आदेशों और सरकार की सख्ती के बाद भी धड़ल्ले से बजरी का काला कारोबार जारी है. पहले इस बजरी के कारोबार से बजरी माफिया पनप रहे हैं. फिर पुलिस और राजस्व विभाग के अफसर इसमें लिप्त हो इनकों शह देने लग गए. अब नगर परिषद, नगर पालिकाएं और ग्राम पंचायत तक के अधिकारी-जनप्रतिनिधि इस चोरी की बजरी से करोड़ों रूपए की लागत से निर्माण कार्य करवा कर मास्टर माइंड साबित हो रहे है.

हद तो यह है कि बीते दिनों सूबे के मुख्य सचिव की फटकार के बाद जिले में गठित पांच विभागों के अफसरों की एसआईटी भी इन निर्माण कार्यों में काम में ली जा रही बजरी को रोक नहीं पा रहे है. यहां तक कि एसआईटी से जुड़े अधिकारी भी या तो जानबूझकर अनदेखी कर रहे है. या फिर ठेकेदारों से अपने हिस्से की बंदी ले कर चुप्पी साधे है.

टोंक जिले में ग्राम पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय तक हर कोई इस बजरी के काले कारोबार में पूरी तरह से लिप्त है. वहीं बीते दिनों सूबे के मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों की वीडियों कांफ्रेंस के माध्यम से मीटिंग ली थी. इस मीटिंग में टोंक जिले के जिला कलेक्टर रामचंद्र ढेनवाल को बजरी को रोकने के लिए साफ निर्देश दिए गए. इसके बाद तुरंत पांच महकमों के अफसरों की एसआईटी टीम गठित की गई और उपखंड अधिकारी को इसका अध्यक्ष बनाया गया.

इस टीम में तहसीलदार, पटवारी, थानेदार, सर्किल ऑफिसर खनिज विभाग के अधिकारी सहित तमाम अफसरों को इसमें शामिल किया गया ताकि बजरी रोकी जा सके. हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद अवैध बजरी खनन पर रोक नहीं लग पा रही है. उनियारा के सामुदायिक अस्पताल के निर्माण कार्य से जुड़ी ब्लाक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का दफ्तर बना हुआ है. दूसरी ओर उसी के पास करीब 5 करोड़ रूपए की लागत से सामुदायिक अस्पताल का चोरी कर लाई अवैध बजरी के ढेर से निर्माण कार्य चल रहा है.

वहीं बजरी खनन को लेकर ऐसे हालात सिर्फ उनियारा तहसील ही नहीं बल्कि टोंक जिले को कई जिलों में हैं. बजरी माफिया खुले तौर पर अवैध बजरी का कारोबार कर रहे हैं और प्रशासन को अंगूठा दिख रहे हैं.