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राजस्थान: अधिकारियों की लापरवाही PM किसान सम्मान निधि योजना पर भारी

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में जिला कलक्टर और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही केंद्र सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना पर भारी पड़ रही है. 

राजस्थान: अधिकारियों की लापरवाही PM किसान सम्मान निधि योजना पर भारी
अब तक 19.34 लाख आवेदनों का सत्यापन हो पाया. (प्रतीकात्मक फोटो)

जयपुर: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में जिला कलक्टर और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही केंद्र सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना पर भारी पड़ रहा है. योजना में पात्रता तय करने के लिए पटवारी और तहसीलदार से जो फॉर्म तस्दीक होकर कलेक्टर के पास पंहुचे हैं, उनका अब तक निपटारा नहीं हुआ है. बताया जा रहा है कि कलेक्टर को इस बात की जानकारी नहीं है कि पात्रता की जो शर्त तय की गई है उसकी पालना हुई है या नहीं. इस दौरान कई तहसीलों में सत्यापन के लिए दिए आवेदन पटवारी स्तर पर पेडिंग चल रहे हैं. 

प्रदेश में अब तक 39 लाख आवेदनों में से सिर्फ 19.34 लाख आवेदनों का सत्यापन हो पाया है. इसके अलावा शेष 19 लाख किसानों के आवेदनों का सत्यापन नहीं होने के कारण पहली किस्त की राशि 2000 रुपए भी नहीं मिली है. लेकिन जिन किसानों के आवेदनों की सत्यापन हो चुका है. उनमें से 15 लाख किसानों के खाते में 2 हजार रूपए पहली किश्त की राशि पहुंच चुकी है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, योजना में पात्र किसानों की संख्या करीब 55 लाख है. केंद्र की इस योजना के लिए प्रदेश सरकार ने 17 फरवरी को पोर्टल लांच किया था. पोर्टल पर अभी तक करीब 38 लाख 10 हजार से अधिक किसान आवेदन कर चुके हैं. आवेदन करने वाले लघु और सीमांत किसानों को सालाना छह हजार रुपए केंद्र की ओर से मिलेंगे. यह सहायता तीन किश्तों में मिलेगी. इस दौरान पहली किश्त में दो हजार रुपए मिलने हैं. जिन किसानों ने आवेदन किया है उसकी तस्दीक पटवारी और तहसीलदार करेंगे. इसके बाद कलेक्टर उसे अंतिम रूप देकर केंद्र को भेजेंगे. 

पीएम किसान सम्मान निधि योजना की जब मुख्य सचिव के स्तर पर समीक्षा की गई तो चौंकाने वाले आंकडे सामने आए. प्रधानमंत्री किसान योजना में प्रदेश के सात जिले किसानों के आवेदन सत्यापन करने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं. प्रदेश के अजमेर, जयपुर, बारां, सिरोही, अलवर, पाली और बाडमेर जिलों में सत्यापन कार्य की प्रगति बेहद कम है. जिसको लेकर चिंता जाहिर करते हुए मुख्य सचिव ने संबंधित जिला कलक्टर को एक सप्ताह में लंबित प्रकरण पूरे करने को कहा है. जबकि भीलवाड़ा जिला प्रदेश में योजना को लेकर अच्छा काम किया जा रहा है. वेदनों की तस्दीक करने के लिए सहकारी विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है. इस दौरान सत्यापन नहीं करने की वजह जानने के लिए जब नोडल विभाग ने जिला कलक्टरों से संपर्क किया तो उन्होंने अपनी समस्या गिना दी.

योजना में केवल वे ही किसान पात्र हैं जो लघु और सीमांत की श्रेणी में आते हैं. ऐसे में इस तथ्य की पुष्टि करना मुश्किल है कि आवेदक के पास किसी जिले या तहसील में और जमीन तो नहीं है. बता दें, प्रदेश में कुल 314 तहसील हैं जिनमें सिर्फ 114 ऑनलाइन है. ऐसे में रेवन्यू रिकॉर्ड की राज्य स्तर पर ऑन लाइन तस्दीक करने की व्यवस्था नहीं है,

रजिस्ट्रार सहकारिता एवं पीएम किसान योजना के स्टेट नोडल अधिकारी नीरज के पवन के अनुसार जिन आवेदनों को पात्र श्रेणी में नहीं माना गया था ऐसे आवेदनों को नई संशोधित गाइड लाइन के अनुसार दोबारा भेजना होगा. योजना के तहत दो हजार रुपए की पहली किस्त प्रदेश के किसानों के बैंक खाते में आनी शुरू हो गई है. 

पीएम किसान योजना की पात्रता में पहले सीमांत और लघु किसान ही पात्र थे लेकिन केंद्र सरकार की संशोधित गाइड लाइन के अनुसार अब सीमांत और लघु किसानों के साथ वृहद किसानों को भी शामिल कर लिया गया है. जबकि आयकर देने वाले किसान, सरकारी कर्मचारी और जनप्रनिधियों को योजना से बाहर रखा गया है. इसके बावजूद प्रदेश में 17 लाख नए किसान योजना की पात्रता के दायरे में आ गए हैं.

पहले लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ पात्र किसानों को नहीं मिल पाया और अब पटवारी स्तर पर सत्यापन नहीं होने के कारण किसानों को किश्त की राशि नहीं मिल रही है. पटवारी पात्र किसानों का अंगूठा मिलान (बायोमैट्रिक सत्यापन) करने के लिए कंप्यूटर-लेपटॉप नहीं होने का बहाना बना रहे हैं. जबकि कुछ जिले में कुछ पटवारी मोबाइल और अन्य साधनों से बायोमैट्रिक सत्यापन कर चुके हैं.

(साथ में दीपक गोयल, जी मीडिया, जयपुर)