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राजस्थान: आंगनवाड़ी पहुंचने के लिए कचरे के ढेर से होकर गुजरने को मजबूर बच्चे, प्रशासन नहीं ले रहा सुध

आंगनबाड़ी केंद्र को वैसे तो वेदांता फाउंडेशन ने गोद लेकर इसमें तमाम सुविधाएं बालकों के लिए मुहैया करवाई है लेकिन इन सुविधाओं के लाभ से ज्यादा यहां पर मृत जानवरों की फैली दुर्गंध बालकों के लिए कष्ट दाई साबित हो रही है. 

राजस्थान: आंगनवाड़ी पहुंचने के लिए कचरे के ढेर से होकर गुजरने को मजबूर बच्चे, प्रशासन नहीं ले रहा सुध

सीकर: महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों पर सुविधाओं के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी मॉनिटरिंग के अभाव में कई केंद्र दुर्दशा के शिकार हो रहे हैं. इन केन्द्रों की दुर्दशा की बानगी खंडेला पंचायत समिति की गोविंदपुरा ग्राम पंचायत के उदयपुरा ग्राम में संचालित आंगनवाड़ी केंद्र को देखकर आसानी से देखी जा सकती है. 

इस आंगनवाड़ी केंद्र को वैसे तो वेदांता फाउंडेशन ने गोद लेकर इसमें तमाम सुविधाएं बालकों के लिए मुहैया करवाई है लेकिन इन सुविधाओं के लाभ से ज्यादा यहां पर मृत जानवरों की फैली दुर्गंध बालकों के लिए कष्ट दाई साबित हो रही है. इतना ही नहीं मुख्य सड़क से आंगनवाड़ी केंद्र तक पहुंचना भी बालकों के लिए दूभर हो रहा है. बरसात के दिनों में तो यह समस्या अधिक बढ़ जाती है. 

आंगनवाड़ी केंद्र के मुख्य गेट और सड़क के बीच गंदगी के ढेर लगे हुए हैं. जिसकी वजह से केंद्र तक पहुंचना भी बालकों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. छोटे-छोटे बालकों को टीकाकरण के लिए चारों ओर से गंदगी से अटे इस आंगनवाड़ी केंद्र पर लाना भी बीमारियों के मुंह में धकेलने से कम नहीं है. केंद्र संचालिका से इस संबंध में जब पूछा गया तो सिस्टम की लापरवाही भी केमरे के सामने बयां की गई. 

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि वर्ष 2015 से वह लगातार केंद्र के समाने और आसपास की साफ-सफाई तथा सुगम पहुंच के लिए ग्राम पंचायत को कई बार निवेदन कर चुकी हैं लेकिन पिछले 4 साल में पंचायत प्रशासन के कानो पर जू तक नहीं रेंगी. जबकि सरकार आंगनवाड़ी केंद्रों को मॉडल केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए वेदांता समूह की सहायता से भरसक प्रयास कर रही है लेकिन सरकार की इस मंशा का जनप्रतिनिधियों व सरकारी नुमाइंदों को कोई असर नहीं पड़ता. यहां तक कि इस आंगनवाड़ी केंद्र को गोद लेकर नंद घर के रूप में विकसित करने वाले वेदांता फाउंडेशन द्वारा जिला मुख्यालय तक इस समस्या के समाधान के लिए अवगत करवाने के बाद भी कोई मृत जानवरों की दुर्गंध से निजात दिलवाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए. अब देखने वाली बात यह होगी कि मामला मीडिया में आने के बाद प्रशासन क्या कार्रवाई करता है.