राजस्थान: सरकार की अनदेखी से बंद होने की कगार पर सिटी डिस्पेंसरी

अग्रेजों के जमाने की यह सिटी डिस्पेंसरी लम्बे समय से देखरेख नहीं होने के कारण बदहाल होकर बंद होने की कगार पर है

राजस्थान: सरकार की अनदेखी से बंद होने की कगार पर सिटी डिस्पेंसरी
बाड़मेर की सिटी डिस्पेंसरी एक हिसाब से ऐतिहासिक स्मृति का प्रतीक है

बाड़मेर: जोधपुर के बाड़मेर मे शहर के गांधी चौक में आजादी के समय का डिस्पेंसरी इन दिनों खुद बीमार है. प्रशासनिक अनदेखी का शिकार इस सिटी डिस्पेंसरी को पुराने दिनों में लौटने के लिए कवायद शुरू हो गई है. लेकिन इस काम मे सरकार को कई परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. अतिक्रमण, हाथ ठेले के जमावड़े और गंदगी के जमावड़े ने हालात बद से बदत्तर कर रखे है.

सबकी बीमारी को ठीक करने वाली बाड़मेर की सिटी डिस्पेंसरी इन दिनों खुद बीमार है. बरसो से अतिक्रमण, हाथ ठेले के जमावड़े और गंदगी के जमावड़े की बेड़ियों में जकड़ी इस डिस्पेंसरी को फिर से शुरू करने की तैयारी को लेकर बाड़मेर राजकीय चिकित्सालय के पीएमओ डाक्टर संजीव मित्तल ने निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की. सब कुछ ठीक रहा तो एक बार फिर ये सिटी डिस्पेंसरी शहर के ऊपरी भाग में रहने वाले लोगों के इलाज के लिए तैयार हो जाएगी. यहां पहले की तरह चहल-पहल नजर आएगी.  

अग्रेजों के जमाने की यह सिटी डिस्पेंसरी लम्बे समय से देखरेख नहीं होने के कारण बदहाल होकर बंद होने की कगार पर है. इसका भवन इतना जर्जर हो गया है कि इसको यहां लगे चिकित्सक के आवास पर अस्थाई रूप से चलाना पड़ रहा है. शनिवार को पीएमओ डाक्टर संजीव मित्तल ने पूरा जायजा लिया और भवन को देखा और वापिस शुरू करने को लेकर खाका तैयार किया.

निरीक्षण के दौरान पीएमओ को यहां पर काफी गंभीर स्तिथि औरअनियमिताए नजर आई. पीएमओ ने डिस्पेंसरी में व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए इसे नए सिरे से वापिस शुरू करने को लेकर वहां लगे डाक्टर से चर्चा कर जरुरी निर्देश दिए. डाक्टर मित्तल के सिटी डिस्पेंशरी का निरीक्षण कर वापिस शुरू करने को लेकर भौतिक रिपोर्ट तैयार करने के बाद ही आगे की कार्ययोजना तय होगी. मित्तल ने गांधी चौक में सिटी डिस्पेंसरी की जमीन से अतिक्रमण हटाने की बात कहीं.

बाड़मेर की सिटी डिस्पेंसरी एक हिसाब से ऐतिहासिक स्मृति का प्रतीक है. ऐसे में इस सिटी डिस्पेंसरी को वापिस शुरू कर देने से न केवल राजकीय अस्पताल में आने वाले बाड़मेर शहर के मरीजों की संख्या कम होगी बल्कि यहां आने वाले मरीजों के जेहन में अंग्रेजो के जमाने की यादे भी ताजा हो जाएगी. अब देखने वाली बात है कि स्वर्णिम इतिहास को देखने वाली डिस्पेंसरी फिर सुनहरा भविष्य कब तक देख पाती है.