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राजस्थान: बच्चों को पौष्टिक भोजन देकर स्वस्थ रखने का धर्म निभाता एक कलेक्टर

राज्य में कुल 35 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं, जहां आसपास के इलाकों के बच्चे आते हैं और उन्हें वहां खाना दिया जाता है. डॉ. सिंह किसी भी आंगनवाड़ी का चयन करते हैं और वहां आने वाले बच्चों की औसत संख्या के हिसाब से हलवा बनवा कर ले जाते हैं.

राजस्थान: बच्चों को पौष्टिक भोजन देकर स्वस्थ रखने का धर्म निभाता एक कलेक्टर
बारां कलेक्टर बच्चों को खुद परोसते हैं हलवा (फाइल फोटो)

बारां (राजस्थान): आंगनवाड़ी में बच्चों को पौष्टिक आहार मिलता है, यह तथ्य अक्सर पढ़ने-सुनने को मिलता है और लोग इस पर भरोसा भी कर लेते हैं. लेकिन यहां जिले के शीर्ष प्रशासनिक पद पर तैनात एक अधिकारी इस तथ्य को सच बनाने के लिए अपने घर से हलवा बनाकर लाते हैं और आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों को खिलाते हैं. बारां जिले के कलेक्टर डॉ. एम पी सिंह द्वारा आंगनबाड़ी के बच्चों को पोषक भोजन खिलाने के लिए जिले में शुरू की गई अनूठी पहल से प्रभावित हो कर अब आम लोग भी होकर आगे आ रहे हैं और उनकी इस मुहिम का हिस्सा बन रहे हैं.

खुद परोसते हैं हलवा
राज्य में कुल 35 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं, जहां आसपास के इलाकों के बच्चे आते हैं और उन्हें वहां खाना दिया जाता है. डॉ. सिंह किसी भी आंगनवाड़ी का चयन करते हैं और वहां आने वाले बच्चों की औसत संख्या के हिसाब से हलवा बनवा कर ले जाते हैं, जिसे वे अपने हाथ से परोसते हैं. यह कार्य नियमित रूप से चलता है.

स्मार्टफोन की मदद से यूं हुई 12 हजार कुपोषित बच्चों की पहचान

मेडिकल पृष्टभूमि वाले डॉ. सिंह ने मीडिया को बताया कि सरकार अपने स्तर पर आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों को पोषाहार देने का हरसंभव प्रयास करती है, लेकिन अगर आम लोग भी इस काम से जुड़ें तो यह काम बेहतर तरीके से और बड़े पैमाने पर हो सकेगा. सिर्फ कह कर लोगों को प्रेरित करने की बजाय उन्होंने खुद यह कार्य करने का प्रयास किया और अब उनकी कोशिश रंग लाने लगी है. इलाके के अन्य लोग भी बच्चों को पौष्टिक आहार देने की उनकी इस मुहिम में जुट गए हैं.

बच्चों के चेहरों पर मुस्कुराहट देती है संतोष
डॉ. सिंह का कहना है कि हर घर में किसी का जन्मदिन, शादी की सालगिरह, बच्चे का पास होना, किसी की पुण्यतिथि कोई त्यौहार या कोई और अवसर आता है. इन आयोजनों के साथ अगर आंगनबाड़ी के बच्चों को खाना देने का भी नियम बना लिया जाए तो इससे उनके साथ अपनी खुशी बांटने का आनंद तो मिलेगा ही, साथ ही उन बच्चों के चेहरे पर खिली मुस्कुराहट से आपको सामाजिक दायित्व निभाने का संतोष भी मिलेगा.

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपनिवेश नहीं हैं!

डॉ. सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वह खुद चूंकि मेडिकल पृष्ठभूमि से आते हैं इसलिए उन्होंने देखा है कि बच्चे, विशेषकर निचले तबके के बच्चे पौष्टिक आहार नहीं मिलने से कई तरह की बीमारियों का शिकार हो जाते हैं. यही सोचकर उन्होंने आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए कुछ करने का फैसला किया.