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राजस्थान: लोकसभा चुनाव के टिकट को लेकर कांग्रेस में अभी से घमासान

सूरजगढ़ के पूर्व विधायक श्रवणकुमार ने ओला परिवार विरोधीयों के साथ एकजुट होकर किया शक्ति प्रदर्शन  

राजस्थान: लोकसभा चुनाव के टिकट को लेकर कांग्रेस में अभी से घमासान
लोकसभा चुनाव में टिकट के लिए कांग्रेस में कई दावेदार

संदीप केडिया/झुंझुनूं: कांग्रेस ने जिला स्तर पर बैठक कर पैनल बनाने के साथ ही लोकसभा चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी है. वहीं कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले शेखावाटी के झुंझुनूं में कांग्रेस नेताओं के दावे भी शुरू हो गए हैं. साथ ही झुंझुनूं के दिग्गज नेता रहे स्वर्गीय शीशराम ओला के परिवार से कांग्रेस की टिकट निकालने के लिए उनके विरोधी एकजुट नजर आने लगे है.

पांच बार झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे स्वर्गीय शीशराम ओला के परिवार से ढ़ाई दशक बाद कांग्रेस की टिकट निकालने के लिए झुंझुनूं में उनके विरोधी सूरजगढ़ से पूर्व विधायक श्रवणकुमार की अगुवाई में एकजुट होकर विरोध कर रहे है. वहीं यदि किसी कारणवश श्रवणकुमार के नाम पर आम सहमति नहीं बन पाती है तो हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के करीबी रिश्तेदार सुरेश कटेवा के संपर्क में भी ओला विरोधी नेता है. सूरजगढ़ विधायक श्रवणकुमार जहां गांव-गांव जाकर अपने दावे को मजबूत कर रहे है, वहीं सुरेश कटेवा भी दिल्ली और जयपुर में लॉबिंग कर अपनी दावेदारी को मजबूत कर रहे हैं. इसी क्रम में श्रवणकुमार ने किसान सभा कर अपना शक्ति प्रदर्शन किया और अपने विरोधियों पर जमकर निशाने साधे.

पूर्व विधायक रीटा ने कहा- राहुल को बनाएंगे पीएम
इस किसान सभा में ओला विरोधी गुट के लगभग सभी नेता शामिल थे. इनमें प्रमुख थी मंडावा से पूर्व विधायक रीटा चौधरी, जिन्होंने कहा कि भाजपा से मंडावा विधायक नरेंद्रकुमार को भी लोकसभा प्रत्याशी बनाने की चर्चा है लेकिन वह साफ कर दें कि भाजपा का कोई भी प्रत्याशी चुनाव मैदान मे आए लेकिन सांसद तो कांग्रेस का ही चुना जाएगा. रीटा चौधरी विधायक बने या ना बने लेकिन हमें राहुल गांधी को प्रधानमंत्री जरूर बनाना है. इस मौके पर पिलानी विधायक जेपी चंदेलिया तथा उदयपुरवाटी से वरिष्ठ कांग्रेस नेता रविंद्र भडाना भी मौजूद थे.

गद्दारों से कांग्रेस को मुक्त करने की घोषणा
सीकर जिले का फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र भी झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र में शामिल है. ऐसे में फतेहपुर से पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता नंदकिशोर महरिया भी इस किसान सभा में शामिल हुए. उन्होंने मंच से कहा कि वे मंच पर किसी का नाम तो नहीं लेंगे लेकिन जो कांग्रेस के गद्दार है, उन्हें अब सबक सिखाने का वक्त आ गया है, उन्होंने कहा कि झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र में ऐसे कांग्रेस नेता पनप गए है जो दूसरों को आगे बढ़ते देखना नहीं चाहते, यही कारण है कि कोई भी टिकट हो, लोकसभा या फिर विधानसभा सभी उन्हें ही चाहिए।,उन्होंने कहा कि जिला प्रमुख बनना है तो परिवार के सदस्य आगे आ जाते है, कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनना है तो इन्हें बना दो और प्रधान बनना है तो इन्हें बना दो, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा, कांग्रेस को हराने वालों को अब कांग्रेस की अगुवाई नहीं दी जाएगी.

आठ में से चार विधानसभा में ओला का विरोध
आपको बता दें कि पिछले ढ़ाई दशक में छह बार लोकसभा के चुनाव हुए है, जिनमें पांच बार शीशराम ओला ने लड़कर जीते है तो गत चुनावों में उनकी पुत्रवधु डॉ. राजबाला ओला को टिकट दी गई और वे ढ़ाई लाख वोटों से चुनाव हारी. इस बार भी वह दावेदारी कर रही हैं लेकिन उनके पति झुंझुनूं विधायक बृजेंद्र ओला का आधे से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में विरोध हो रहा है. खबरों की मानें उन पर आरोप है कि उन्होंने पिलानी, नवलगढ़, सूरजगढ़, मंडावा में कांग्रेस प्रत्याशियों को हरवाने में कार सेवा की थी. इनमें से दो जगह सूरजगढ़ व मंडावा में कामयाब रहे. वहीं पिलानी और नवलगढ़ में कांग्रेस प्रत्याशी जीतकर आए. बहरहाल, इस बार कांग्रेस की टिकट के लिए भी यही फॉर्मूला लागू होगा कि कौन ओला के साथ है और कौन विरोध में.