close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

बीमारी थी पेट में, इलाज किया दिल का, अब लगा भारी जुर्माना

आयोग ने यह आदेश रेखा खुंटेटा व अन्य की ओर से दायर परिवाद पर दिए.

बीमारी थी पेट में, इलाज किया दिल का, अब लगा भारी जुर्माना
प्रतीकात्मक फोटो

महेश पारीक, जयपुर : राज्य उपभोक्ता आयोग(State Consumer Forum) ने पेट की बीमारी का इलाज करने के बजाए मरीज के दिल का इलाज करने और बाद में उसकी मौत होने के मामले में फोर्टिस हैल्थकेयर लि. और फोर्टिस अस्पताल(Fortis Hospital) पर 25 लाख रुपए का हर्जाना लगाते हुए राशि ब्याज सहित परिवादी को अदा करने को कहा है.

वहीं अदालत ने इलाज में खर्च हुए 2 लाख 84 हजार रुपए भी ब्याज सहित लौटाने को कहा है. आयोग ने कहा कि पेट दर्द के मरीज को जिस ढंग से दिल का रोगी बनाकर उसका इलाज किया गया. अस्पताल का यह कृत्य गंभीर सेवादोष की श्रेणी में आता है. ऐसे में अस्पताल पर 25 लाख रुपए का अलग से दंडात्मक हर्जाना लगाया जाता है.

ब्याज सहित जमा कराए धनराशि
यह हर्जाना राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में ब्याज सहित जमा कराया जाए. आयोग ने यह आदेश रेखा खुंटेटा व अन्य की ओर से दायर परिवाद पर दिए.

जानिए पूरा मामला
परिवाद में अधिवक्ता विज्जी अग्रवाल ने बताया कि 28 जुलाई 2014 को परिवादी के पिता चेतराम को खाना-पीना निगलने में तकलीफ हो रही थी. इस पर मरीज को फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया. यहां पेट दर्द की जानाकारी देने वाले बावजूद डॉक्टरों ने गलत हिस्ट्री शीट लिखी और ईसीजी व ईको किया. जिसमें आया कि मरीज का हार्ट पचास फीसदी ही काम कर रहा है.इस पर मरीज ने बताया कि उसका हार्ट वर्ष 2002 से इतना ही काम कर रहा है. वहीं, मरीज की पेट दर्द की शिकायत पर ध्यान न देकर उसकी एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की गई. मरीज की 30 जुलाई को हालत बिगड़ने पर हीमोडायलिसिस देना शुरू किया गया. वहीं 31 जुलाई को हार्ट अटैक से चेतराम की मौत हो गई. जिसके बाद परिवार की तरफ से न्याय की मांग की गई.