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राजस्थान: स्वाइन फ्लू के बाद डेंगू-मलेरिया का कहर, स्वास्थ्य महकमे की बढ़ी मुश्किलें

स्वाइन फ्लू के अलावा प्रदेश में डेंगू और मलेरिया के मामले भी सामने आने लगे हैं. एक ओर जहां डेंगू के अब तक 80 मामले सामने आ गए हैं तो वहीं दूसरी ओर मलेरिया के 70 मामले सामने आ चुके हैं.

राजस्थान: स्वाइन फ्लू के बाद डेंगू-मलेरिया का कहर, स्वास्थ्य महकमे की बढ़ी मुश्किलें

जयपुर: राजस्थान में साल 2019 के पहले महीनें में स्वाइन फ्लू से 79 मौतें हो चुकी है. जबकि 1 हजार 911 स्वाइन फ्लू के पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं. कुछ दिन पहले प्रदेश में स्वाइन फ्लू की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और हैल्थ मिनिस्टर डॉ. रघु शर्मा की मौजूदगी में स्वाइन फ्लू को लेकर एक राज्य स्तरीय मीटिंग भी ली गई थी. 

वहीं स्वाइन फ्लू के अलावा प्रदेश में डेंगू और मलेरिया के मामले भी सामने आने लगे हैं. एक ओर जहां डेंगू के अब तक 80 मामले सामने आ गए हैं तो वहीं दूसरी ओर मलेरिया के 70 मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से डेंगू के सबसे ज्यादा मामले जयपुर से सामने आए हैं और मलेरिया के लगभग 30 मामले केवल उदयपुर से सामने आए हैं. 

टेमी फ्लू की उपलब्धता सुनिश्चित करें
चिकित्सा मंत्री ने स्वाइन फ्लू के उपचार के लिये प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर तक टेमी फ्लू की उलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों में इस समय पर्याप्त मात्रा में टेमी फ्लू उपलब्ध है. स्वाइन फ्लू की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुये 10 लाख अतिरिक्त् टेमी फ्लू मंगवायी गयी है, इनमें से एक लाख की आपूर्ति हो चुकी है.

आयुर्वेदिक औषधियों का काढ़ा पिलाएं
डॉ. शर्मा ने स्वाइन फ्लू सहित विभिन्न मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिये आयुर्वेदिक औषधियों से निर्मित काढ़ा पिलाने की व्यवस्था के निर्देश दिए. उन्होंने बताया कि आयुर्वेदिक औषधालयों में यह व्यवस्था की जा रही है. उन्होंने आयुर्वेद चिकित्सकों को स्थानीय स्तर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिये आवश्यक परामर्श देने के निर्देश भी दिए.