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राजस्थान: दीया कुमारी ने लोकसभा चुनाव में जीत के लिए मांगा मेवाड़ परिवार का समर्थन

दीया कुमारी का टिकट घोषित हुआ उसके पहले से ही राजसमंद और मेवाड़ के दूसरे हिस्सों में सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ प्रचार अभियान चल रहा था. 

राजस्थान: दीया कुमारी ने लोकसभा चुनाव में जीत के लिए मांगा मेवाड़ परिवार का समर्थन
दीया कुमारी ने राजपरिवार से राजसमंद के चुनाव के लिए समर्थन मांगा है.

राजसमंद: देश में राजघराने हमेशा से ही लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं, चाहे मामला आम दिनों का हो या राजघरानों में होने वाले किसी अन्य कार्यक्रम का. अगर राज घराने का कोई सदस्य चुनाव मैदान में आ जाए फिर तो उस पर सबकी नजर रहती है. जयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य दीया कुमारी भी इस मामले में कोई अपवाद नहीं है. बीजेपी ने दीया कुमारी को एक बार राजसमंद से चुनाव मैदान में उतारा है और पूर्व विधायक भी पूरी शिद्दत के साथ लोकसभा के रण में सक्रिय दिख रही हैं.

दीया कुमारी का टिकट घोषित हुआ उसके पहले से ही राजसमंद और मेवाड़ के दूसरे हिस्सों में सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ प्रचार अभियान चल रहा था. अब दीया कुमारी भी इन बातों को लेकर गंभीर दिख रही हैं.उन्हें पता है कि चुनाव में एक छोटी सी गलतफहमी या दुष्प्रचार उन्हें बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है. लिहाजा वे अब इन चीजों को दुरुस्त करने में जुट गई हैं. यही कारण था कि सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में दिया कुमारी उदयपुर पहुंची तो अगले दिन मेवाड़ के पूर्व राजघराने के सदस्यों से मिलने उनकी मां पद्मिनी देवी और पुत्र पद्मनाभ भी उदयपुर पहुंच गए.

क्या है इस मुलाकात के मायने?
जयपुर के पूर्व राजपरिवा की पद्मिनी देवी और पद्मनाभ ने मेवाड़ के पूर्व राजवंश के सदस्य महेंद्र सिंह मेवाड़ से मुलाक़ात की. हालांकि इस मुलाकात में हुई चर्चा को लेकर दोनों ही पक्ष मीडिया से बात नहीं कर रहे, लेकिन इन परिवारों का जुड़े सूत्रों का कहना है कि जयपुर ने मेवाड़ के सामने अपनी झोली फैला दी है. दरअसल टिकट घोषित होने के बाद पहली बार राजसमंद आने के बाद खुद दीया कुमारी ने भी मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार से मुलाक़ात की थी. इस मुलाकात में मेवाड़ और जयपुर के कछवाहा राजवंश के पुराने संबंधों का हवाला दिया गया. मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार सदस्य महेंद्र सिंह मेवाड़ से मुलाकात में पहले दीया कुमारी ने तो अबकी बार उनकी मां पद्मिनी देवी और पुत्र पद्मनाभ ने राजसमंद के चुनाव के लिए समर्थन मांगा है. 

मेवाड़ परिवार का समर्थन इस चुनाव में दीया कुमारी के लिए बड़ी अहमियत रखता है. माना जा रहा है कि अगर उन्हें महेंद्र सिंह मेवाड़ से समर्थन मिल गया तो उनके खिलाफ चार सौ तियालीस साल पुराने हल्दीघाटी के युद्ध को लेकर जो दुष्प्रचार किया जा रहा है, वह काफी हद तक कम हो सकता है. इसी आस में जयपुर के पूर्व राजपरिवार के लोगों ने अपनी झोली मेवाड़ के सामने फैला दी है.

जयपुर के पूर्व राजपरिवार और मेवाड़ के पूर्व राजवंश के सदस्यों में वर्तमान में कोई अदावत नहीं है. लेकिन तकरीबन 443 साल पुरानी कुछ घटनाओं से अभी का चुनाव प्रभावित होता हुआ दिख रहा है. दरअसल वर्ष 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध हुआ था. जिसमें कछवाहा राजवंश के मानसिंह ने अकबर के सेनापति के रूप में मेवाड़ के तत्कालीन महाराणा प्रताप के सामने युद्ध लड़ा. इस युद्ध की हार-जीत को लेकर आज तक अलग-अलग दावे होते हैं लेकिन यह युद्ध अब एक नये इतिहास का आधार तय करने की भूमिका में दिख रहा है. राजसमंद से बीजेपी प्रत्याशी दीया कुमारी और उनके रणनीतिकारों का मानना है कि अगर सोशल मीडिया पर हो रहे इस दुष्प्रचार के लिए जल्द कोई मजबूत तोड़ नहीं निकाला गया तो चुनाव में उनके लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है.

मेवाड़ के पूर्व राजघराने के समर्थन से कितना प्रभावित होगा चुनाव?
मेवाड़ के राजघराने की उत्पत्ति भगवान रामचंद्र के परिवार से मानी जाती है और इस नाते मेवाड़ के पूरा परिवार के लोग भी अपने आप को सूर्यवंशी बताते हैं. अब मेवाड़ के सूर्यवंशियों के पास कछवाहा वंश के लोग मदद मांगने पहुंच गए हैं. दीया कुमारी ने सबसे पहले मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के प्रमुख माने जाने वाले महेंद्र सिंह मेवाड़ से मुलाकात की. उसके बाद दीया कुमारी की मां और पुत्र ने भी महेंद्र सिंह मेवाड़ से ही मदद मांगी है.। हालांकि मेवाड़ घराने के नुमाइंदे के रूप में अरविंद सिंह मेवाड़ ज्यादा चर्चाओं में रहते हैं, लेकिन मेवाड़ के दूसरे ठिकानेदर आज भी महेंद्र सिंह मेवाड़ को ही पूर्व राजवंश के मुखिया के रूप में मान्यता देते हैं. यही कारण है कि दीया कुमारी और उनके परिवार के लोगों ने महेंद्र सिंह मेवाड़ को तरजीह देते हुए उनसे समर्थन मांगा. दुहाई इस बात की भी दी गई कि इतिहास में जो कुछ हुआ उसके लिए वर्तमान में मौजूदा लोगों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. महेंद्र सिंह मेवाड़ भी इन दलीलों से कुछ नरम दिख रहे हैं. ऐसे में अगर मेवाड़ के महेंद्र सिंह की तरफ से हरी झंडी मिलती है तो यहां के ज्यादातर ठिकानेदार भी दीया कुमारी के समर्थन में आ जाएंगे और वह उनके लिए लोकसभा चुनाव के माहौल में सबसे बड़ी राहत होगी.

मेवाड़ में दीया कुमारी के खिलाफ दुष्प्रचार का जो माहौल बनाया जा रहा था उसको दूर करने के लिए कोशिशें पहले दिन से ही दिखने लगी थी. टिकट की घोषणा होने के बाद जब दीया कुमारी राजसमंद पहुंची तो उन्होंने अपने प्रचार अभियान की शुरुआत गोगुंदा में महाराणा प्रताप और राणा पूंजा की प्रतिमा को प्रणाम करके, वहां फूल चढ़ा कर ही की थी. इसके बाद से ही मेवाड़ के राजपूतों में दिया के प्रति 'सॉफ्ट कार्नर' दिखने लगा था. 

इससे पहले दिया कुमारी मेवाड़ के राजघराने से अपना नाता भी बताती रही हैं. चुनाव में अपने आप को सैनिक की बेटी बताने वाली दीया कुमारी मेवाड़ को अपना ननिहाल भी बताती हैं वह कहती हैं की जयपुर में ब्याही सिसोदिया रानी औ महाराजा माधोसिंह प्रथम की मां भी मेवाड़ की बेटी ही थीं. लेकिन चुनाव में अपने नहीहै के रूप में मेवा को याद करने वाली दिया कुमारी का मेरा भरने के लिए मेवाड़ कितना तैयार है यही इस चुनाव में बड़ा सवाल है?

(इनपुट-अविनाश जगनावत, शशि मोहन)