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राजस्थान: विधानसभा सत्र के दौरान कई जिलों के कलेक्टर ने बुलाई बैठक, विधायकों ने किया हंगामा

सत्र के दौरान सबसे पहले उदयपुर ग्रामीण के विधायक फूल सिंह मीणा ने इस मामले को उठाया. इस दौरान उन्होंने कहा कि उदयपुर में डीएलसी दरों के निर्धारण के लिए हुई बैठक की सूचना उन्हें देरी से दी गई.

राजस्थान: विधानसभा सत्र के दौरान कई जिलों के कलेक्टर ने बुलाई बैठक, विधायकों ने किया हंगामा
मंत्री ने इस मामले में तत्काल निर्देश देने का आश्वासन दिया. (फाइल फोटो)

जयपुर: राजस्थान विधानसभा में सत्र के दौरान शुक्रवार को विधायकों ने प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया. विधायकों ने कहा कि सत्र के दौरान महत्वपूर्ण बैठकें बुलाने की नई परम्परा डाली जा रही है.

इस दौरान नेता प्रतिपक्ष, गुलाबचन्द कटारिया ने डीएलसी दरें तय करने के लिए बुलाई बैठक का ज़िक्र किया. वहीं, विट्ठल शंकर अवस्थी ने डीएफएमटी की बैठक बुलाने का मामला उठाया. इस मामले में निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने अधिकारियों पर जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के आरोप लगाते हुए आसन से संरक्षण की गुहार भी लगाई. 

नहीं मिली समय से सूचना
सत्र के दौरान सबसे पहले उदयपुर ग्रामीण के विधायक फूल सिंह मीणा ने इस मामले को उठाया. इस दौरान उन्होंने कहा कि उदयपुर में डीएलसी दरों के निर्धारण के लिए हुई बैठक की सूचना उन्हें देरी से दी गई.  इसके साथ ही भीलवाड़ा विधायक विठ्ठल शंकर अवस्थी ने भी कहा किइस बैठक की सूचना उन्हें ज़िला प्रशासन ने नहीं दी. 

प्रशासन के रवैये पर उठे सवाल
नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया ने भी मामले में दखल देते हुए प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाये. कटारिया ने कहा कि अधिकारियों की सोच कई बार तो यह होती है कि जनप्रतिनिधि बैठक में नहीं आए तो ज्यादा बढ़िया. क्योंकि ऐसी सूरत में उसे कई मुद्दो पर जवाब देना होता है.

विधायक संयम लोढ़ा भी दिखें समर्थन में
इधर गुरूवार को कटारिया से बहस करने वाले निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा भी कटारिया का समर्थन करते दिखें. सिरोही के विधायक कटारिया ने कहा कि यह किसी एक विधायक की पीड़ा नहीं है. बल्कि कई ज़िला कलक्टर्स इस तरह की मनमानी कर रहे हैं. लोढ़ा ने इस मामले में आसन से संरक्षण मांगते हुए सरकार से इस मामले में व्यवस्था दिलाने की मांग की. 

संसदीय कार्य मंत्री ने तत्काल निर्देश देने का दिया आश्वासन
संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने अधिकारियों को इस मामले में तत्काल निर्देश देने का आश्वासन दिया. सदन में धारीवाल ने कहा कि सरकार इस बात की पुख्ता व्यवस्था करेगी कि विधानसभा सत्र के दौरान ज़िलों में ऐसी कोई बड़ी बैठक नहीं बुलाई जाए. जिसमें विधायकों की उपस्थिति अपेक्षित हो. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को विधानसभा सत्र से दो दिन पहले और दो दिन बाद भी कोई बैठक नहीं बुलाने को कहा जाएगा.