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राजस्थान के ई-मित्र केन्द्रों पर मची लूट, वसूल रहे निर्धारित शुल्क से ज्यादा रकम

लोगों को सरकारी दफ्तरों में चक्कर नहीं काटने पड़े, इसके लिए सरकार ने ज्यादातर सेवाएं ई-मित्रों के माध्यम से शुरू कराई थी.

राजस्थान के ई-मित्र केन्द्रों पर मची लूट, वसूल रहे निर्धारित शुल्क से ज्यादा रकम
सरकार ने अधिक राशि वसूलने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

जयपुर: आम आदमी की सुविधा के लिए शुरू की गई ऑनलाइन व्यवस्था धीरे-धीरे परेशानी की वजह बनती जा रही है. लोगों का समय पर काम हो, पैसा कम खर्च हो इसके लिए अधिकतर सरकारी योजनाओं के ई-मित्रों पर ऑनलाइन आवेदन किए जा रहे हैं, लेकिन ऑनलाइन आवेदन भरने के नाम पर लोग ई-मित्रों की ठगी का शिकार हो रहे हैं.

लोगों को सरकारी दफ्तरों में चक्कर नहीं काटने पड़े, इसके लिए सरकार ने ज्यादातर सेवाएं ई-मित्रों के माध्यम से शुरू कराई थी. जिससे लोगों के आवश्यक दस्तावेज स्थानीय स्तर पर ही तैयार हो सके. साथ ही युवाओं को भी ई-मित्र के माध्यम से रोजगार मिल सके. लेकिन ई-मित्र केन्द्र अब रोजगार ही नहीं बल्कि लोगों को लूटने का जरिया बनते जा रहे हैं. यही नहीं नि:शुल्क सेवाओं के बदले भी राशि लेने से नहीं कतराते जबकि सरकार द्वारा उन्हें इसका निर्धारित कमीशन दिया जाता है.

प्रदेश में संचालित ई-मित्र कियोस्क विभागीय नियमों को दरकिनार कर उपभोक्ताओं से निर्धारित दर से ज्यादा शुल्क वसूल रहे हैं. इस बात का खुलासा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से ई-मित्र कियोस्कों की करवाई गई रेंडम जांच में सामने आया है. जिसके बाद प्रदेश में 254  ई-मित्र कियोस्कों पर निर्धारित दर से ज्यादा शुल्क वसूलने के मामले में ब्लैकलिस्ट कर दिया है. जिसमें सबसे ज्यादा जयपुर में 42, जोधपुर 39 और भरतपुर 39 ई-मित्र कियोस्कों को ब्लैकलिस्ट किया गया है.

दरअसल अशिक्षित होने और मजबूरी के कारण ई-मित्र कियोस्क पर लोगों को अधिक राशि देनी पड़ रही है. श्रम विभाग, रोजगार कार्यालय, समाज कल्याण विभाग, परिवहन विभाग, रसद विभाग, सहित अन्य सरकारी कार्यालयों के बाहर ई मित्रों की दुकानें खुली हुई है. यहां पर आवेदन पत्र भरने के लिए ई-मित्रों को सरकार की ओर से कमीशन दिया जाता है. साथ ही ई-मित्रों के लिए राशि भी निर्धारित की हुई है जो कि आवेदन करने वालों को देनी जरूरी है, लेकिन इसके बावजूद खुले आम यहां पर लूट मची हुई है.

डीओआईटी अतिरिक्ति निदेशक आरके शर्मा ने बताया की ई-मित्र कियोस्क संचालक की ओर से निर्धारित दरों से ज्यादा वसूलने पर विभाग के टोल फ्री नंबर 181 पर शिकायत की जा सकती है. वेबसाइट पर विभाग ने टोल फ्री नंबर दे रखा है। अगर कोई भी आकर लिखित में शिकायत करता है तो संबंधित ई-मित्र कियोस्क के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी. 

ग्राम पंचायत जनप्रतिनिधियों की बैठक से लेकर जिला परिषद की साधारण सभा, जिला प्रभारी मंत्री सहित जिला स्तरीय बैठकों में ई-मित्रों संचालकों द्वारा की जा रही मनमानी को लेकर शिकायतों की झड़ी लग जाती है. सरपंचों और पंचायत समिति, विधायक सदस्यों द्वारा शिकायत की जाती है कि जिस सेवा का शुल्क 20 रुपए है. उसके 100 रुपए तक वसूल किए जाते हैं. 

डीओआईटी के अतिरिक्त निदेशक ने बताया की निरीक्षण में ई-मित्र संचालकों द्वारा राजकीय सेवाओं बिजली, पानी के बिल जमा नहीं करने, जाति-मूल निवास प्रमाण पत्र के सरकारी रेट 60 रुपए के बजाय 100 रुपए से अधिक वसूलने जैसी अनियमितताएं देखने को मिली. साथ ही भामाशाह नामांकन निशुल्क होने के बावजूद 100 रुपए वसूलने, भामाशाह में संशोधन के निर्धारित 25 रुपए के बजाय 100 रुपए से अधिक राशि लेने व ई-मित्र संचालकों द्वारा ग्राहकों से अभद्रता से पेश आने जैसी कई अनियमितताएं देखने को मिली. 

यहां तक कि कई मित्र संचालक समय पर काम नहीं कर लोगों को बार-बार चक्कर लगवाने की शिकायतें भी मिली हैं. बताया जा रहा है कि जांच के दौरान गलत बायोमैट्रिक्स, डॉक्यूमेंट एरर, डेट ऑफ बर्थ, नेम चेंज, पता बदलवाने में सरकार द्वारा निर्धारित राजपत्रित अधिकारी की जगह अन्य की लेटर हेड का उपयोग, गलत दस्तावेज लगाना आदि शामिल है.

बहरहाल, ई-मित्र कियोस्क के अब लोगों से निर्धारित दर से अधिक राशि वसूलने के बाद राज्य सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. सरकार ने एसडीएम, तहसीलदार को रिकॉर्ड की जांच कर अधिक राशि वसूलने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. पहली बार शिकायत प्राप्त होने पर एसडीएम अपने एसएसओ आईडी से ई-संकेत कर कियोस्क को सात से 15 दिन के लिए निलंबित कर सकते हैं और कियोस्क पर एक हजार से पांच हजार रुपए तक जुर्माना कर सकते हैं.

जबकि दूसरी बार शिकायत मिलने पर एसडीएम एसएसओ आईडी से कियोस्क को 15 से 30 दिन के लिए निलंबित कर सकते हैं अथवा यह दोनों कार्रवाई की जा सकती है. तीसरी बार शिकायत प्राप्त होने पर कियोस्क को स्थायी रूप से बंद कर ब्लैक लिस्ट कर सकते हैं. 30 दिन में निर्णय कर अपील का निस्तारण किया जाएगा. खास बात ये है कि शिकायतकर्ता को सरकार की पूरी कार्रवाई की जानकारी ऑनलाइन मिलेगी.