राजस्थान: ग्रीनफील्ड नेशनल हाईवे के विरोध में किसानों ने शुरू किया प्रदर्शन

जामनगर से अमृतसर तक बनने वाले 1316 किलोमीटर लंबे इस नेशनल हाईवे पर अनुमानित 25 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत आएगी

राजस्थान: ग्रीनफील्ड नेशनल हाईवे के विरोध में किसानों ने शुरू किया प्रदर्शन
इसका 858 किलोमीटर हिस्सा राजस्थान के गंगानगर, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर और जालोर जिले से होकर गुजरेगा

जालोर: राजस्थान की उत्तर से पश्चिमी सीमा से निकलने वाले अमृतसर-जामनगर सिक्सलेन ग्रीनफील्ड नेशनल हाईवे यह ऐसा आर्थिक कॉरिडोर होगा, जो देश की तीन रिफाइनरी को सीधा जोड़ेगा. जामनगर से अमृतसर तक बनने वाले 1316 किलोमीटर लंबे इस नेशनल हाईवे पर अनुमानित 25 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत आएगी. इसका 858 किलोमीटर हिस्सा राजस्थान के गंगानगर, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर और जालोर जिले से होकर गुजरेगा, जो कुल हाइवे का 65 फीसदी है. लेकिन जालौर जिले से गुजरने वाले इस सिक्सलेन ग्रीनफील्ड नेशनल हाइवे के विरोध में किसानों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है. 

इसी को लेकर भीनमाल उपखंड मुख्यालय पर पर्यावरण स्वीकृति को लेकर एक जन सुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जनसुनवाई कार्यक्रम में विभाग के आला अधिकारी उपखंड अधिकारी सहित भारतमाला परियोजना के अधिकारी भी मौजूद रहे, लेकिन किसानों ने इस जनसुनवाई कार्यक्रम का बहिष्कार करके भारी विरोध करना शुरू कर दिया. किसानों ने साफ तौर से ऐलान दे दिया है कि अगर किसानों की उपजाऊ भूमि पर भारतमाला परियोजना के तहत हाईवे को निकाला गया तो किसान अपनी जान दे देंगे. किसानों के विरोध के कारण कार्यक्रम स्थल पर कुर्सिया खाली रही और अधिकारी इंतजार करते रहे.

सड़क परिवहन मंत्रालय भारत सरकार के अधीन हाईवे प्राधिकरण द्वारा भारतमाला परियोजना के तहत सांगरिया हनुमानगढ़ से सांचौर के आगे गुजरात तक एक्सप्रेस-वे विधानसभा क्षेत्र भीनमाल, जालोर व सांचौर से गुजरात बोर्डर तक एक्सप्रेस-वे का पूर्व में हवाई सर्वेक्षण किया गया. जिसमें इस एक्सप्रेस-वे में किसी तरह का एस टाइप मौड़ नही था. परन्तु धरातल पर सर्वे करने पर राजनैतिक दबाव से सांचौर के पास दो मोड़ दिए गए. 

उससे एक्सप्रेस-वे की लंबाई बढ़ी व किसानों के ज्यादा खेत एक्सप्रेस-वे अधीन आ गए है. क्षेत्र में जमीन चौरा से लगाकर गोलासन तक नर्मदा कमाण्ड क्षेत्र में आती हैं, जो कीमती जमीन हैं. किसानों के पास बहुत कम जमीन होने से 42 किलोमीटर लम्बाई में कई किसान भूमिहीन हो रहे हैं. कई किसानों के खेत के बीचों-बीच सड़क निकलने से खेत दो भागों में बंटने व छोटे-छोटे टुकड़े होने से किसान कास्त नहीं कर पाएंगे.

सांचौर क्षेत्र में नर्मदा कमांड क्षेत्र होने व बाकी भूमिगत जल से सिचांई होने से पीढियों से किसान अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं. अधिकतर किसान छोटे किसान हैं. नौकरी या कोई व्यापार इन किसानों के पास नहीं है, वह केवल खेती पर ही निर्भर हैं. ऐसे में एक्सप्रेस-वे निकलने के बाद किसानों के रोजगार व परिवार पालने का कोई जरिया नहीं बचेगा. किसान दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर होगा. इस एक्सप्रेस-वे से स्थानीय लोगों को कोई फायदा नहीं है.

बता दें कि सांचौर विधानसभा क्षेत्र में इस एक्सप्रेस-वे को हाईवे नंबर 68 पर ही चलाया जाए ताकि किसानों को भूमिहीन नहीं होना पड़े. किसानों को सिचिंत भूमि के बदले मुआवजा नहीं देकर सिचिंत भूमि देने, सर्किल, वाणिज्यिक व औद्योगिक गलियारा बनाने के नाम पर ली की जा रही है. जिसको लेकर किसानों की मांग है कि जो किसान भूमिहीन हो गये हैं या लघु व सिमान्त किसान की श्रेणी में आ गए हैं, उनके परिवार को सरकारी नौकरी दी जाए. उनके परिवार के एक सदस्य को पीढ़ी दर पीढ़ी एक्सप्रेस-वे बनाने वाली कम्पनी के टोल नाको पर नौकरी देने, सर्किल व गलियारे के अलावा सांचौर शहर में चार गुना व इसी अनुपात में शहर से दूर बढ़ोतरी करते हुए दिया जाए. 

(इनपुट-बबलु मीणा श्याम विश्नोई)