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राजस्थान: खाद्य सुरक्षा योजना का उड़ा मखौल, उदयपुर में 3800 लोगों को किया सूची से आउट

 खाद्य सुरक्षा की आड़ में संचालित इस गोरखधंधे के लिए नगर निगम और रसद विभाग दोनों जिम्मेदार हैं. लापरवाही की वजह से बीते छह साल से गरीबों का गेहूं अमीरों में बंटा जा रहा है. 

राजस्थान: खाद्य सुरक्षा योजना का उड़ा मखौल, उदयपुर में 3800 लोगों को किया सूची से आउट
प्रदेश में खाद्य सुरक्षा योजना की पात्र सूची में करीब 4.83 करोड लोग शामिल हैं.

जयपुर: राजस्थान में खाद्य सुरक्षा योजना का मखौल उड़ रहा है. जहां एक तरफ गरीब इस योजना में नाम जुड़वाने के लिए दफ्तर में बाबुओं के आगे हाथ जोड़ रहे हैं. उधर दूसरी तरफ अमीर और धन्नासेठ गरीबी का चोला ओढ़कर गुरबत में जी रहे लोगों का निवाला डकारने में लगे हैं. तभी तो गरीबों का निवाला अमीरों के किचन तक पहुंच जाता है और गरीब बेचारा राशन के लिए तरस जाता है. राजस्थान में खाद्य सुरक्षा योजना की हकीकत यही है.

कहते हैं जब बात अपने फायदे की हो तो गरीब होना मजबूरी नहीं शान बन जाती है. एक से एक आलीशान बंगले, महंगी गडियां, मोटी तनख्वाह है. कोई बिल्डर तो कोई पेट्रोल पम्प का मालिक है. चौंकिए मत, ये बेचारे अब नियत से गरीब बन गए हैं क्योंकि इनके नाम से राशन उठ रहा है. विभाग के अधिकारियों की जब नींद खुली तो गरीबी का नाकाब ओढ़े अमीरों की तस्वीर दुनिया के सामने आ गई. केवल उदयपुर में 3800 लोगों को इस सूची से आउट किया गया है. जिन लोगों के नाम सूची से काटे गए हैं उनमें से कुछ नाम जानकर आप चौंक जाएंगे.

केस नंबर-1
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग मंत्री का क्षेत्र
हिंडौनसिटी में पार्षद की पत्नी मोहिनी सिंघल का नाम शामिल
जांच में हुआ खुलासा बाद में योजना से हटाया गया नाम

केस नंबर-2
उदयपुर जिले में हजारों अमीरों के नाम योजना में शामिल
करीब 3800 सरकारी कर्मचारी,पेंशनर्स ले रहे राशन
गरीबों के हक का निवाला डकार गए

केस नंबर-3
राजसमंद के सेवानिवृत शिक्षक नारूलाल का नाम शामिल
खाद्य सुरक्षा सूची में नाम जुड़वाने के लिए गरीब बन गए
प्रतापपुरा के सेवानिवृत शिक्षक प्यारचंद का नाम शामिल
साकरोदा के सेवानिवृत प्रधानाचार्य सुरेश चंद्र खटीक का नाम
ये सभी गरीब बनकर गेंहू और राशन उठा रहे हैं

केस नंबर-4
राजसमंद के भावा की पूर्व सरपंच शंकरी बाई का नाम शामिल
पूर्व पंचायत समिति सदस्य जवाहरलाल जाट भी पात्रों की सूची में
मई 2016 से बीस-बीस किलो गेहूं उठा रहे हैं
भावा के राशन डीलर मलाल गुर्जर का नाम भी शामिल था
बाद में जांच के बाद नाम हटाया गया
भाटोली के पूर्व सरपंच माधवलाल गाडरी नाम भी लाभुकों में
ये लोग लंबे समय से गरीबों का हक मार रहे थे

महज एक रूपए किलो की दर से गेहूं उठाने वाले ये करदाता कागजों में हेराफेरी कर खुद गरीब बन गए हैं. खाद्य सुरक्षा की आड़ में संचालित इस गोरखधंधे के लिए नगर निगम और रसद विभाग दोनों जिम्मेदार हैं. लापरवाही की वजह से बीते छह साल से गरीबों का गेहूं अमीरों में बंटा जा रहा है. फिलहाल प्रदेश में खाद्य सुरक्षा योजना की पात्र सूची में करीब 4.83 करोड लोग शामिल हैं जो कि निर्धारित संख्या 4.46 करोड से अधिक है. रेंडम सर्वे में जांच के बाद अब सरकार ने फैसला लिया है कि इस सूची में अपात्र और अमीरों का नाम हटाकर गरीबों का नाम जोड़ा जाएगा. आपको बता दें कि खाद्य सुरक्षा योजना में उन लोगों को शामिल नहीं किया जाता है जो आयकर दाता हों या परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में हो लेकिन यहां तो हजारों परिवार ऐसे है जिनकी आमदनी लाखों में है उसके बावजूद गरीबों का निवाला डकारने से बाज़ नहीं आ रहे हैं.