राजस्थान: वन विभाग ऑफिस से चोरी रिकॉर्ड कबाड़ी की दुकान से हुआ बरामद

प्राप्त जानकारी के अनुसार अनूपगढ़ में नियुक्त रेंजर जीतेन्द्र को रविवार को ऑफिस के दो कमरों के ताले तोड़कर रिकॉर्ड चुरा लिये जाने की जानकारी मिली थी

राजस्थान: वन विभाग ऑफिस से चोरी रिकॉर्ड कबाड़ी की दुकान से हुआ बरामद
ऑफिस का अवलोकन करने के बाद थाने में सूचना दी थी लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया

दीपक अग्रवाल/अनूपगढ़: जिले में वन विभाग का आलम दीये तले अंधेरे जैसा है. इसकी बानगी सोमवार को अनूपगढ़ कस्बे में उजागर हुई, जब एक कबाड़ी के स्टोर में वन विभाग के कार्यालय से चुराया हुआ रिकॉर्ड मिला. यह रिकॉर्ड आठ-दस कट्टों में भरा हुआ था, जो कि बहुत ही महत्वपूर्ण रिकॉर्ड माना जा रहा है. इसकी जानकारी मिलते ही बीकानेर से वन विभाग के सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) महेन्द्र कुमार अनूपगढ़ को रवाना हो गये.

जिसके बाद एसीएफ महेन्द्र कुमार अपने साथ अनूपगढ़ के रेंजर जीतेन्द्र को साथ लेकर तहसील कार्यालय के सामने वार्ड नं. 8 में कबाड़ी किशनलाल के स्टोर पर पहुंचे. वहां आठ-दस कट्टों में भरा हुआ रिकॉर्ड मिला. कबाड़ी ने बताया कि कुछ दिन पहले कोई शख्स इस रिकॉर्ड को रद्दी के भाव बेच गया था. वन अधिकारियों के सूचना देने पर डीएसपी सोहनलाल बिश्रोई और थानाप्रभारी नरेश कुमार ने कबाड़ स्टोर पर आकर जांच-पड़ताल की. स्टोर संचालक से पूछताछ की, तब पता चला कि यह रिकॉर्ड विगत 1 जनवरी को उसकी दुकान पर कोई बेच गया था.

वहीं पुलिस ने मौके की कार्यवाही के बाद इस रिकॉर्ड को जब्त कर लिया. वन विभाग द्वारा इस सबंध में अज्ञात चोरों पर मुकदमा दर्ज करवाने की कार्यवाही चल रही है. प्राप्त जानकारी के अनुसार अनूपगढ़ में नियुक्त रेंजर जीतेन्द्र को रविवार को ऑफिस के दो कमरों के ताले तोड़कर रिकॉर्ड चुरा लिये जाने की जानकारी मिली थी. उसने ऑफिस का अवलोकन करने के बाद थाने में सूचना दी थी लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया.

रेंजर जीतेन्द्र ने बताया कि आज सुबह उन्होंने कस्बे में अपने स्तर पर भागदौड़ की, तब किशनलाल अरोड़ा के कबाड़ स्टोर में आठ-दस कट्टों में भरा हुआ रिकॉर्ड मिल गया. तब उसने बीकानेर में उच्चाधिकारियों को बताया. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच-पड़ताल की जायेगी कि यह रिकॉर्ड किसने चोरी किया है. कबाड़ी किशनलाल से पूछताछ की जायेगी कि उसे यह रिकॉर्ड रद्दी के भाव कौन बेच गया. रेंजर जीतेन्द्र ने बताया कि यह रिकॉर्ड वर्ष 1999 में 2013 की अवधि का है. मुख्यतः इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में जोहड़-पायतान की जमीनों से सबन्धित दस्तावेज हैं. अन्य विभागीय रिकॉर्ड और महत्वपूर्ण कागजात भी इसमें शामिल हैं.
 
सिर्फ एक कर्मी, बाकी पद खाली
वन विभाग की हालत कितनी खस्ता है, इसका अंदाजा अनूपगढ़ में इस विभाग के कार्यालय से ही लगाया जा सकता है. अनूपगढ़ में पुराना पंचायत कॉपलेक्स भवन के पीछे वन विभाग का यह दतर काफी पुराना है. इस दफ्तर में कर्मचारी के नाम पर सिर्फ एक ही कर्मी, रेंजर जीतेन्द्र है, बाकी सभी पद खाली पड़े हैं. रेंजर जीतेन्द्र को घड़साना और छतरगढ़ का अतिरिक्त कार्यभार दिया हुआ है. लिहाजा वह अनूपगढ़ ऑफिस में कई-कई दिन तक नहीं आ पाता. यह ऑफिस कई-कई दिन तक सूना पड़ा रहता है. हालत यह है कि ऑफिस के अंदर-बाहर झाडिय़ां उग आई हैं. 

जानकारी के मुताबिक कबाड़ स्टोर में जो रिकॉर्ड मिला है, वह 30-31 दिसबर की रात को ही चोरी हो गया था. दो कमरों के ताले तोड़कर अंदर लोहे के बक्सों व संदूकों में रखे हुए रिकॉर्ड को चोर प्लास्टिक के गट्टों में भरकर ले गये. उसे रद्दी के भाव बेच दिया. वजन में यह रिकॉर्ड महज 50-60 किलो है, लेकिन विभाग के हिसाब से यह बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज है. रेंजर जीतेन्द्र का कहना है कि चोरों ने रिकॉर्ड चोरी करने के बाद दरवाजों को बाहर से बंद कर दिया था. इसलिए अंदाजा ही नहीं लग पाया कि चोरी हो चुकी है. चूंकि इस कार्यालय में कोई स्टाफ नहीं है. इसलिए चोरी हो जाने का कई दिन तक पता नहीं चल पाया.