राजस्थान: लोकसभा के लिए BJP की तैयारियां शुरू, बागियों को फिर पार्टी से जोड़ने में जुटे नेता

विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधोयों और बगावत के चलते बीजेपी ने तकरीबन चालीस से ज्यादा नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी से निकाला. 

राजस्थान: लोकसभा के लिए BJP की तैयारियां शुरू, बागियों को फिर पार्टी से जोड़ने में जुटे नेता
राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने पार्टी के कुनबे को बढ़ाने के निर्देश दिए.

जयपुर: लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी की तैयारियों का औपचारिक आगाज हो चुका है. राजस्थान में यह आगाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने किया. अमित शाह के बाद पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामन्त्री ने आगामी चुनाव में जीत का मन्त्र भी प्रदेश संगठन को दिया. इसके साथ ही रामलाल ने पार्टी नेताओं से साफ कहा कि विचारधारा के विस्तार और संगठन को मजबूत करने के लिए पार्टी से बिछड़े लोगों को फिर से जोड़ने के काम पर भी ध्यान देना चाहिए. अब केन्द्रीय नेतृत्व से हरी झण्डी मिलने के बाद जल्द ही बीजेपी से छिटके नेताओं की पार्टी में वापसी के आसार बनने लगे हैं. 

लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों अपनी-अपनी तैयारियां कर रहे हैं. सोमवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अधअयक्ष अमित शाह ने चुनाव की तैयारियों का औपचारिक आगाज जयपुर से कर दिया तो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी पिछले दिनों अजमेर में सेवादल के कार्यकर्ताओं को जीत का संकल्प दिलाकर गए. अमित शाह ने कार्यकर्ताओं से राजस्थान की सभी 25 सीट जिताने का आह्वान किया तो उनके जाने के बाद प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामन्त्री रामलाल ने पार्टी के कुनबे को बढ़ाने के निर्देश दिए. रामलाल ने कहा कि जो भी पार्टी की विचारधारा में भरोसा रखता है और संगठन को ऐसा लगता है कि उसके जुड़ने से बीजेपी को फायदा होगा तो ऐसे लोगों को संगठन से फिर से जोड़ा जाना चाहिए. बीजेपी के प्रदेश मंत्री मुकेश दाधीच कहते हैं कि केन्द्रीय नेतृत्व के निर्देश के बाद विधानसभा चुनाव के सभी बागियों की तो नहीं, लेकिन उन लोगों को वापसी के आसार ज़रूर बढ़ गए हैं जो पार्टी कि विचारधारा मजबूत करेंगे और चुनाव के नजरिये से फायदेमंद होंगे. 

राष्ट्रीय संगठन महामंत्री के बयान के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में भी पॉज़िटिव रिएक्शन आ रहा है. पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मानना है कि संगठन से बिछड़े लोग फिर जुड़ेंगे तो लोकसभा चुनाव में बीजेपी को इसका फायदा मिलना तय है. पूर्व मन्त्री और विधायक कालीचरण सराफ कहते हैं कि अनुशासनहीनता करने वाले लोग फिर से ऐसा नहीं करने का भरोसा दिलाते हैं तो उन्हें लिया जाना संगठन के हित में ही होगा. 

विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधोयों और बगावत के चलते बीजेपी ने तकरीबन चालीस से ज्यादा नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी से निकाला. हालांकि, इनमें से सुरेश टांक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गए हैं ऐसे में वे बीजेपी में शामिल नहीं हो सकते लेकिन दूसरे नेताओं के लिए तो पार्टी नेतृत्व का यह निर्देश राजनीतिक संजीवनी बनता दिख रहा है. हालांकि, बीजेपी के प्रदेश मंत्री मुकेश दाधीच कहते हैं कि किसी भी कार्यकर्ता की घर वापसी स्थानीय संगठन की सिफारिश पर ही होगी. दाधीच कहते हैं कि अगर स्थानीय इकाई को नेता की उपयोगिता लोकसभा चुनाव में लगती है तो उसके सुझाव पर ही घर वापसी का फैसला होगा.

पार्टी से छिटके लोगों को फिर से जोड़ने की कवायद के निर्देश मिलने के बाद पार्टी की कोशिश होगी कि बिछड़ों को जोड़ने के साथ ही मिशन-25 हासिल करने के लिए नए लोगों को भी कुनबे में जोड़ा जाए. राजनीति के अर्जुन की तरह बीजेपी को भी अब चिड़िया की आंख ही दिख रही है. बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वह हर हाल में चुनाव जीतना चाहेगी लेकिन क्या इसके लिए पार्टी 'अश्वत्थामा हत: नरो वा कुंजरो' के स्तर तक भी जाने के लिए तैयार होगी?