राजस्थान: गहलोत सरकार ने किसानों के 3100 करोड़ का कर्ज किया माफ

अगले दो दिनों में इन किसानों को भी कर्जमाफी का प्रमाण पत्र आनलाइन मिल सकेगा और दो दिन बाद पूरी तरह से तस्वीर साफ हो पाएगी कि इन तीन दिनों के भीतर कितने किसानो का कितना कर्ज माफ हुआ है

राजस्थान: गहलोत सरकार ने किसानों के 3100 करोड़ का कर्ज किया माफ
कर्जमाफी के बाद सरकार पर करीब 18 हजार करोड का भार आएगा

आशीष चौहान/जयपुर: राजस्थान में गहलोत सरकार ने अब तक हजारों किसानों का 3100 करोड़ का कर्जा माफ किया है. पहले चरण में तीन दिन लगाए गए शिविर में 8 लाख 13 हजार से ज्यादा किसानों के आवेदन आए, जिसमें से 78 किसानों का आधार वेरिफिकेशन हो चुका है. सरकार ने अब तक 17 हजार से ज्यादा किसानों का प्रमाण पत्र अपलोड कर चुकी है. 

जबकि रविवार को छुट्टी होने के कारण वेरिफिकेशन हुए किसानों का प्रमाण पत्र अपलोड नहीं हो सका. सोमवार से फिर से अपलोड करने का काम शुरू किया जाएगा. वहीं अब सहकारी समितियों की ओर से ऋणमाफी कैंप नहीं लगाए जाएंगे क्योंकि सोमवार से विधानसभा शुरू हो रही है. 78 हजार किसानों का आधार वेरिफिकेशन हो चुका है, अगले दो दिनों में इन किसानों को भी कर्जमाफी का प्रमाण पत्र आनलाइन मिल सकेगा और दो दिन बाद पूरी तरह से तस्वीर साफ हो पाएगी कि इन तीन दिनों के भीतर कितने किसानो का कितना कर्ज माफ हुआ है. हालांकि सरकार की यही मंशा है कि जो किसान पात्र है और उन्होंने आवेदन कर दिया है तो जल्द से जल्द जांच की करके प्रमाण पत्र दिए जाए,जिससे किसानों को कर्ज से आजादी मिले.

कर्जमाफी के बाद सरकार पर करीब 18 हजार करोड़ का भार आएगा, जिसमें 2 लाख तक के ऋण माफ किए जा रहे है. लेकिन राजस्थान के इतिहास मे यह पहली बार हो रहा है कि कॉआपरेटिव बैंकों से लिया गया पूरा कर्जा सरकार माफ करेगी. कॉपरेटिव बैंकों से किसान 1.50 लाख तक का फसली ऋण ले सकता है. इसके अलावा सरकार ऐसे किसानों के लिए भी नई स्कीम लाएगी, जो ईमानदार किसान थे और उन्होंने समय रहते हुए ऋण चुकाया. इसके अलावा सरकार केवल 18 हजार करोड़ ही नहीं, बल्कि पिछली सरकार का 6 हजार करोड़ का भार भी पड़ गया है. डिप्टी सीएम सचिन पायलट का कहना है कि 'किसानों से बढकर कुछ नहीं है, इसलिए सरकार ये राशि भी वहन करने के लिए पूरी तरह से तैयार है.'

वहीं किसानों प्रमाण पत्र वितरित होने के उनके सिर से कर्ज का बोझ कम हो गया है. किसानों का कहना है कि 'सरकार ने हमारी सिर से कर्ज का बोझ ही कम नहीं किया, बल्कि भविष्य भी बना दिया. इसके साथ साथ किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि कर्ज के साथ साथ पानी की समस्या भी दूर करे. ताकि खेत खलियान फिर से खिलते हुए दिखाई दे. किसानों का कहना है कि ऋण माफी के साथ ही सरकार समय रहते हुए पानी की व्यवस्था कर दे तो सोने पर सुहागा होगा.'

हालांकि सरकार को अभी और शिविर लगाने होंगे, क्योंकि अभी भी लाखों किसान ऐसे है जिनका कर्ज माफ नहीं हुआ है. लेकिन विधानसभा का सत्र होने की वजह से इतनी जल्दी शिविर नहीं लगाए जा सकते है. पर सत्र खत्म होने के बाद और लोकसभा चुनाव की आचार सहिता से पहले शिविर जरूर लगाए जा सकते है.