राजस्थान: बजट सत्र में सरकार लाएगी CAA के खिलाफ प्रस्ताव, कांग्रेस ने जारी किया व्हिप

सीएम को लेकर देशभर में भाजपा और अन्य विपक्षी दल आमने-सामने है. लिहाजा, राजस्थान विधानसभा का यह सत्र हंगामेदार रहने की पूरी संभावना है.

राजस्थान: बजट सत्र में सरकार लाएगी CAA के खिलाफ प्रस्ताव, कांग्रेस ने जारी किया व्हिप
विधानसभा में भी सीएए को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच जोरदार घमासान देखने को मिलेगा.

जयपुर: राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र 24 जनवरी से शुरू हो रहा है. बजट सत्र पहले 2 दिन यानी 24 और 25 जनवरी राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे घटनाक्रम के नजरिए से भी महत्वपूर्ण हैं. सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण और शोकाभिव्यक्ति के अलावा अनुसूचित जनजाति के आरक्षण की मियाद बढ़ाने का अनुमोदन किया जाएगा. इसके साथ ही नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA खिलाफ भी प्रस्तावित प्रस्ताव लाया जाएगा. 

सीएम को लेकर देशभर में बीजेपी और अन्य विपक्षी दल आमने-सामने है. लिहाजा, राजस्थान विधानसभा का यह सत्र हंगामेदार रहने की पूरी संभावना है. विधानसभा सत्र के पहले 2 दिन बेहद महत्वपूर्ण है. सत्ता पक्ष ने इसे लेकर अपनी पूरी तैयारी कर ली है. विधानसभा के मुख्य सचेतक महेश जोशी की ओर से 24 और 25 जनवरी को लेकर भी किया गया है. दोनों दिन कांग्रेस के सभी विधायकों को विधान सभा में उपस्थित रहना अनिवार्य किया गया है. इसमें कहीं कोई दो राय नहीं है कि विधानसभा में भी सीएए को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच जोरदार घमासान देखने को मिलेगा. 

दिल्ली में हुई cwc की बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया है. कांग्रेस शासित सभी राज्यों में सरकार विधानसभा में सीएए के खिलाफ विरोध प्रस्ताव लाएगी. राजस्थान से पहले केरल और पंजाब की विधानसभाओं में जो प्रस्ताव लाया जा चुका है क्योंकि राहुल गांधी 28 जनवरी को जयपुर आ रहे हैं. लिहाजा, उनके आने से पहले विधानसभा में यह प्रस्ताव लाना बेहद जरूरी था. राजस्थान सरकार में उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने बताया कि 24 जनवरी से बजट सत्र का आगाज हो रहा है. 25 जनवरी को सीएए के खिलाफ विधानसभा में विरोध प्रस्ताव लाया जाएगा. सीएए को लेकर देश में कानून बन चुका है लेकिन इसके खिलाफ असहमति का स्वर हो सकता है. लोकतंत्र में इसकी गुंजाइश है. यह होना भी चाहिए कि क्योंकि एक कानून के जरिए देश को बांटने की राजनीति की जा रही है.

सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने की तैयारियों के साथ ही विधानसभा के आगामी सत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण का मुद्दा भी मुख्य रूप से आना है. संसद पहले ही इस आरक्षण को अगले 10 साल के लिए बढ़ाने को मंजूरी दे चुकी है. राज्यों की विधानसभाओं से भी इसका अनुमोदन होना था. इस अनुमोदन की मियाद इस साल 25 जनवरी को खत्म हो रही है, लिहाजा उसके एक दिन पहले सत्र बुलाना राजस्थान सरकार के लिए राजनीतिक मैसेज देने के नजरिए से भी जरुरी हो जाता है. इस सत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण का अनुमोदन करके सत्ताधार पार्टी भी आरक्षित वर्ग में अपने नजरिए का मैसेज देने की कोशिश करेगी. अलबत्ता यह अनुमोदन सदन में सर्वसम्मति से होने के आसार हैं. सत्ताधारी दल को इसका फायदा लेने के लिए भी ज़्यादा मेहनत करनी होगी.

वहीं, अगर विपक्ष की बात करें तो बीजेपी CAA के समर्थन में सदन में पुरजोर कोशिश करेगी, बीजेपी सदन के अंदर यह बात भी उठा सकती है कि संविधान के पालना राजस्थान सरकार की ओर से नहीं हो रही है क्योंकि नागरिक संशोधन कानून केंद्र का विषय है और केंद्र ने इसे पारित कर दिया है. लिहाजा, राज्यों को भी इसे मानना होगा. सदन में बहुमत की बात की जाए तो राज्य सरकार के पास पर्याप्त संख्या में CAA का विरोध करने के लिए सदस्य है लेकिन बीजेपी के पास भी अपने विधायकों के साथ में RLTP के विधायकों का साथ मिलने वाला है. बीजेपी की ओर से सरकार को किसानों की कर्ज माफी पंचायती राज के चुनाव समय पर नहीं होने और प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर भी घेरने की कोशिश की जाएगी.

कुल मिलाकर शार्ट टर्म पर बुलाए गए इस सत्र में ना तो प्रश्नकाल होगा और ना ही शून्यकाल होगा. हालांकि, अभी बताया जा रहा है कि यह सत्र केवल 2 दिन का ही रहने वाला है इसके बाद फिर से इसका दूसरा चरण फरवरी के मध्य में शुरू होगा जो कि राज्यपाल अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के साथ शुरू होगा.

(इनपुट-विष्णु शर्मा, सुशांत पारीक)