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राजस्थान: सूखे के आपातकाल से मरुधरा को मिली मुक्ति, खत्म हुआ पानी का सकंट

पूरे राजस्थान के लिए तीन साल के सूखे का संकट खत्म हो गया है. वहीं जो 9 जिले सूखे से जूझ रहे थे वह भी अब खतरे से बाहर निकल गए है.

राजस्थान: सूखे के आपातकाल से मरुधरा को मिली मुक्ति, खत्म हुआ पानी का सकंट
अब राजस्थान के सभी बांधों में 80 फीसदी तक पानी आ गया है.

जयपुर: राजस्थान में दो महीने पहले जहां पूरा राजस्थान सूखे की चपेट में आ गया था. वहीं अब अब वहीं बांध लबालब हो चुके है. पिछले साल जहां राजस्थान के छोटे बडे बांध बूंद-बूंद के लिए तरह रहा था लेकिन अब राजस्थान के सभी बांध पानी से भर चुके है. ऐसे में पूरे राजस्थान के लिए तीन साल के सूखे का संकट खत्म हो गया है. वहीं जो 9 जिले सूखे से जूझ रहे थे वह भी अब खतरे से बाहर निकल गए है.

मानसून की अच्छी बारिश के बाद राजस्थान की मरूस्थलीय जमीन पर अब पानी की कोई कमी नहीं है. जिस धरती पर बूंद-बूंद के लिए किसान पानी के आपातकाल से जूझ रहे थे, वहीं अब किसान पर खुशियों से जूझ रहे है. राजस्थान के अधिकतर बांध अब लबालब हो चुके है. 2018 में जहां केवल बांधों में 46 फीसदी पानी था, वहीं अब इन्ही बांधों में 80 फीसदी तक पानी आ गया है. 

बता दें कि राजस्थान में कुल 810 बांध है. जिसमें से 357 बांध आंशिक रूप से भर चुके है. जबकि 285 बांध पूरी तरह से फुल हो चुके है. 4.25 एमक्यूएम से अधिक 280 बांधों में से 147 बांध आंशिक रूप से और 99 बांध पूरी तरह से भर चुके है. वहीं 4.25 एमक्यूएम से छोटे 530 बांधों में से 210 बांध आंशिक रूप से भर चुके है और 186 बांध पूरी तरह से भर चुके है. यानि अब जैसलमेर, जालौर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़, नागौर, चूरू और पाली सूखे जिले को सूखे से मुक्ति मिल चुकी है.

ऐसे में गहलोत सरकार को अपने कार्यकाल में पानी के आपातकाल से पूरी तरह से मुक्ति मिल चुकी है. लेकिन अब सोचना यह होगा कि पानी का अधिक से अधिक संरक्षण कैसे किया जाए ताकि हमारा कल का भविष्य संवर सके.