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राजस्थान सरकार ने दिए सहकारिता विभाग की दवा दुकानों में घोटालों की जांच के आदेश

राजस्थान सरकार ने प्रदेश की सहकारी दवा दुकानों के माध्यम से अनियमितता करने वालों के खिलाफ जांच के निर्देश दे दिए गए हैं. 

राजस्थान सरकार ने दिए सहकारिता विभाग की दवा दुकानों में घोटालों की जांच के आदेश
ऐसे प्रकारणों में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्यवाही की जाएगी.

जयपुर: सरकार ने सहकारिता विभाग की दवा की दुकानों में घोटाले की जांच के आदेश दे दिए है.सरकार सख्त रूख अपनाते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी.सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने इस संबंध में आदेश जारी किए है. उनका कहना हे कि प्रदेश में सहकारी संस्थाओं के माध्यम से की जा रही दवाओं की बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता स्थापित करने के साथ-साथ औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम के प्रावधानों की पालना सुनिश्चित की जाएगी.सहकारी संस्थाओं के माध्यम से आमजन के हितों के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषी अधिकारी और कर्मचारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जायेगा और उनके खिलाफ कठोर से कठोर कार्यवाही की जायेगी.

प्रदेश की सहकारी दवा दुकानों के माध्यम से अनियमितता करने वालों के खिलाफ जांच के निर्देश दे दिए गए हैं. ऐसे प्रकारणों में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्यवाही की जायेगी. रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से इस संबंध में विशेष कार्ययोजना भी बनाई जा रही है.उन्होने कहा कि चिकित्सकों द्वारा मरीजों को जेनेरिक नाम से ही दवाओं की सलाह दी जाये. इसके लिये चिकित्सा विभाग को पत्र लिखा जा रहा है.सभी जिला उपभोक्ता भण्डारों के महा प्रबंधकों को औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार फार्मासिस्ट के माध्यम से ही दवा विक्रय को सुनिश्चित करने के निर्देशित कर दिया है.

सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना का कहना था कि दवा बिक्री व्यवस्था की बेहतर मॉनिटरिंग के लिये सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग के माध्यम से एक सॉफ्टवेयर तैयार करवाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि तैयार करवाया जा रहा सॉफ्टवेयर ऑनलाइन कार्य करेगा.सभी उपभोक्ता भण्डार एवं उपभोक्ता संघ के दवा विक्रय केन्द्रों द्वारा की जा रही दवाओं की बिक्री जारी की जा रही एनएसी पर डेशबोर्ड के माध्यम से नियमित समीक्षा की जाएगी.

 आंजना ने बताया कि हमारा उद्देश्य आमजन को सहकारिता के माध्यम से बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण सेवायें उपलब्ध कराते हुए राहत प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि मरीजों एवं तीमारदारों को सहकारी दवा बिक्री केन्द्रों के माध्यम से अधिक से अधिक दवाओं को उपलब्ध कराया जा सके, इसके लिये ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में दवाओं के प्रॉडक्ट ब्राण्ड नेम के साथ जेनेरिक सॉल्ट भी प्रदर्शित किया जायेगा ताकि मरीज को सही दवा का वितरण हो सके.

 चिकित्सकों द्वारा मरीजों को जेनेरिक नाम से ही दवाओं की सलाह दी जाये इसके लिये चिकित्सा विभाग को पत्र लिखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि सभी जिला उपभोक्ता भण्डारों के महा प्रबंधकों को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार फार्मासिस्ट के माध्यम से ही दवा विक्रय को सुनिश्चित करने के निर्देशित कर दिया है.