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राजस्थान: मनरेगा को लेकर एक्शन में सरकार, लापरवाह अधिकारियों को नोटिस जारी

विकास अधिकारियों जेटीए सहित अन्य मनरेगा से जुड़े कार्मिकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है

राजस्थान: मनरेगा को लेकर एक्शन में सरकार, लापरवाह अधिकारियों को नोटिस जारी
मरनेगा के बेपटरी होने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है

पुरूषोत्तम जोशी/टोंक: देश में जब मनरेगा योजना शुरू हुई तो गांव-गांव, ढ़ाणी-ढ़ाणी किसानों और गरीब परिवारों के लिए रोजगार के लिए मील का पत्थर साबित हुई. लेकिन अब समय गुजरने के साथ ही राजस्थान में यह योजना बेपटरी होती नजर आ रही है. पिछले तीन सालों में मनरेगा में श्रमिकों को ना तो समय पर रोजगार मिला ना ही पूरी मजदूरी. कुछ ऐसे ही हालात नवाबी नगरी टोंक में इन दिनों देखने को मिल रहे है. जहां पिछले तीन सालों से मनरेगा योजना ऐसी बेपटरी हुई पड़ी है कि हाल ही जब कांग्रेस की सरकार राजस्थान में सत्ता में आई तो अधिकारियों की कुर्सियों पर पसीने छूट रहे है.

आपको टोंक जिले की 6 पंचायत समितियों की जब प्रगति रिपोर्ट सरकार के पंचायती राज विभाग ने तलब की तो सारी हकीकत ऐसी सामने आई की अधिकारियों की पोलपट्टी खुलकर सामने आ गई है. मुख्य कार्यकारी अधिकारी परशुराम धानका की मानें तो मार्च 2019 तक प्रत्येक ग्राम पंचायत पर ग्राम विकास अधिकारियों को 500 श्रमिकों को प्रतिदिन रोजगार देने का टारगेट दिया गया था. लेकिन पिछले लम्बे समय से पंचायत समितियों के विकास अधिकारी और ग्राम पंचायतों के विकास अधिकारी लापरवाही बरत रहे है. इसके लिए पिछले एक सप्ताह में जिले की 6 पंचायत समितियों के दो दर्जन से ज्यादा ग्राम विकास अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए है.

साथ ही विकास अधिकारियों जेटीए सहित अन्य मनरेगा से जुड़े कार्मिकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है. इधर मरनेगा के बेपटरी होने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है. साथ ही किसान नेता भी अब खुलकर सामने आ गए है. किसान नेता अकबर खान ने लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है. साथ ही स्थानीय युवक बेरोजगारी के चलते गांवों से बढ़ रहे पलायन को लेकर आक्रोशित है.

जिलेभर में मनरेगा में दिए जाने वाले पंचायत समिति में ग्राम पंचायत स्तर स्तर पर प्रतिदिन न्यूनतम 500 श्रमिकों को रोजगार दिया जाना था लेकिन कई ग्राम पंचायतों में कार्य शुरू ही नहीं हुए ना ही लक्ष्य का आंकड़ा भी छू नहीं पाए. बता दें कि पंचायत समिति उनियारा-साल 2015-16 में 3391 काम शुरू हुए. जिनमें से करीब एक हजार अधूरे रह गए. साल 2016-17 में भी 1100 से अधिक कार्य अधूरे रहे. वहीं साल 2017-18 में कभी करीब 900 कार्य अधूरे ही रहे. साल 2018-19 में भी 550 शुरू ही नहीं हुए.

एक ओर सूबे के उपमु्ख्यमंत्री और पंचायत राज मंत्री के साथ टोंक विधायक सचिन पायलट मनरेगा को लेकर गम्भीर हो गए है. जिसके चलते अधिकारियों की नींद उड़ी गई है. दूसरी ओर कमजोर प्रोग्रेस रिपोर्ट से अधिकारी चिंतित ओर परेशान है. जिला कलेक्टर के साथ मुख्य कार्यकारी अधिकारी लगातार फील्ड में दौड़ लगा रहे है. साथ ही लापरवाह अधिकारियों और कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे है. अब देखने वाली बात होगी कि कब तक मनरेगा जिले में पटरी पर लौटेगी.