पुलवामा हमला: 1 साल बाद भी शहीद परिवार से किए वादे पूरे नहीं कर पाई राजस्थान सरकार

अभी तक ना स्कूल का नामकरण शहीद के नाम पर हुआ और ना ही शहीद के परिजन को नौकरी मिली है.

पुलवामा हमला: 1 साल बाद भी शहीद परिवार से किए वादे पूरे नहीं कर पाई राजस्थान सरकार
शहीद रोहिताश लांबा के परिवार को अभी तक नहीं मिला इंसाफ.

प्रदीप सोनी, चौंमू: जम्‍मू कश्‍मीर (Jammu and Kashmir) के में 14 फरवरी 2019 को हुये सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आंतकी हमले में भारत के 40 जांबाज जवान शहीद हो गये थे. तब राजस्थान से पांच जवानों ने अपना बलिदान दिया था. इनमें से एक शहीद रोहिताश लांबा जयपुर जिले के अमरसर थाना इलाके के गोविन्‍दपुरा बासड़ी गांव के रहने वाले थे. इन जवान शहीदों की शहादत को कभी नहीं भूला जा सकता है लेकिन लगता है कि प्रदेश सरकार इस शहीद की शहादत को भूल गई है. राजस्थान सरकार द्वारा की गई घोषणाएं महज घोषणाएं होकर रह गईं. अभी तक ना स्कूल का नामकरण शहीद के नाम पर हुआ और ना ही शहीद के परिजन को नौकरी मिली है. 

आपको बता दें कि शहीद रोहिताश लांबा का जन्म 14 जून 1991 को गोविंदपुर बासड़ी गांव में हुआ था. रोहिताश लांबा 2011 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे. साल 2013 में प्रशिक्षण के बाद शहीद रोहिताश ने ड्यूटी ज्वाइन की. शहीद रोहिताश का एक साल का एक बेटा है जिसका नाम ध्रुव है. शहीद रोहिताश का एक भाई जितेंद्र कुमार और बूढ़े मां बाप हैं. जिनकी सेवा की जिम्मेदारी अब जितेंद्र कुमार और शहीद रोहिताश की पत्नी मंजू देवी करती हैं.

शहीद रोहिताश के भाई जितेंद्र कुमार बताते हैं कि भाई को खूब सम्मान मिला. लेकिन राजस्थान सरकार उनको सम्मान देना अब भूल गई है. शहीद होने के 1 साल बाद भी शहीद के नाम पर स्कूल का नामकरण नहीं हुआ है. इसको लेकर कई चक्कर लगा चुके है. हालांकि शहीद के परिजनों को आर्थिक मदद के तौर पर प्रदेश सरकार ने 50 लाख रुपए का पैकेज और केंद्र सरकार ने 80 लाख रुपए देकर आर्थिक सहायता कर चुकी है. वहीं भामाशाह ने भी शहीद परिवार की बढ़ चढ़कर मदद की थी. शहीद रोहिताश की अंतिम यात्रा में कई मंत्री, नेता और अधिकारी पहुंचे थे. लेकिन अब उस समय की घोषणाओं को 1 साल होने वाला है. लेकिन अब तक ये घोषणाएं पूरी नही हुई हैं.

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शहीद रोहिताश के पिता बाबूलाल बताते हैं कि ना तो अब तक स्कूल का नामकरण शहीद के नाम पर हुआ और ना ही उनके बेटे को सरकारी नौकरी मिली है. इतना ही नहीं शहीद स्मारक के नाम का बजट भी अभी तक स्वीकृत नहीं हुआ है. शहीद रोहिताश की पत्नी मंजू देवी कहती हैं कि वो सैनिक कल्याण विभाग के चक्कर लगाकर थक चुकी हैं लेकिन अभी तक उनके देवर को नौकरी नहीं दी गई.

आपको बता दें कि स्कूल का नामकरण शहीद के नाम पर नहीं होने और देवर को नौकरी नहीं मिलने के कारण से शहीद के परिजन सरकार से नाराज हैं. शहीद रोहिताश की पत्नी मंजू देवी और भाई जितेंद्र ने प्रदेश सरकार से मिले 50 लाख रुपए के आर्थिक सहायता पैकेज को लौटाने का ऐलान कर दिया है.