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मॉब लिंचिंग में अब अधिकारी भी नपेंगे, राजस्थान सरकार ने जारी की एडवाइजरी

मॉब लिंचिंग की घटनाओं से देश की राजनीति में हंगामा मचा हुआ है. अगर भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की जा रही हत्याओं की बात करें तो राजस्थान में इस तरह के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. अलवर में तो मॉब लिंचिंग की तीन घटनाएं हो चुकी हैं. इन घटनाओं से राज्य सरकार पर सवालिया निशान लग रहे हैं.

मॉब लिंचिंग में अब अधिकारी भी नपेंगे, राजस्थान सरकार ने जारी की एडवाइजरी
देश में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं को देखते हुए केंद्र ने राज्य सरकारों ने सख्त कदम उठाने को कहा है (फाइल फोटो)

जयपुर (शरद) : मॉब लिंचिंग की घटनाओं से देश की राजनीति में हंगामा मचा हुआ है. अगर भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की जा रही हत्याओं की बात करें तो राजस्थान में इस तरह के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. अलवर में तो मॉब लिंचिंग की तीन घटनाएं हो चुकी हैं. इन घटनाओं से राज्य सरकार पर सवालिया निशान लग रहे हैं.

इन घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए राजस्थान सरकार ने मॉब लिचिंग को लेकर एडवाइजरी जारी की है. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का पालन करते हुए पुलिस और प्रशासन को यह एडवाइजरी जारी की गई है. इसके तहत निर्देशों की अवहेलना करने पर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है. 

अलवर के रामगढ़ में हुई कथित गोतस्कर की हत्या के बाद मॉब लिंचिंग को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है. सुप्रीम कोर्ट से लेकर राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कठोर कानून बनाए जाने की चर्चा है. इस बीच 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान मॉब लिंचिंग को लेकर निर्णय दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद राजस्थान में भी मॉब लिंचिंग को लेकर दिशा-निर्देश जारी करने का दबाव पड़ा. 

इसके बाद गृह विभाग की ओर से पुलिस और प्रशासन के लिए एडवाइजरी जारी करनी पड़ी. इसमें मॉब लिंचिंग के कारणों को दूर करने, मॉब लिंचिंग को रोकने तथा मामले में दोषी अधिकारियों व व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख किया गया है. एडवाइजरी के मुताबिक, हर जिले में एसपी, डीपीसी नोड़ल अधिकारी नियुक्त होंगे. सहायत के लिए डीएसपी, एसीपी सहायक होंगे. पांच साल में मॉब लिंचिंग की घटना वाले जिलों, उपखंडों, गांवों की पहचान की जाएगी. तीन सप्ताह में यह कार्य पूर्ण होगा. मॉब लिंचिंग वाले संवेदनशील क्षेत्रों में थानाधिकारी विशेष सतर्कता बरतेंगे.

जिले के नोडल अधिकारी महीने में एक बार स्थानीय इंटेलीजेंस व थानाधिकारियों से बैठक करेंगे. डीजीपी की प्रत्येक सोमवार को होने वाली वीडियो कांफ्रेंसिंग में मॉब लिंचिंग को शामिल किया जाएगा. मॉब लिंचिंग वाले संवेदनशील इलाकों में गश्त की जाएगी. 

सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153-ए के तहत मामला दर्ज किया जाएगा. मॉब लिंचिंग की जानकारी मिलते ही पुलिस एफआईआर दर्ज करेगी. तय समय में चालान पेश किया जाएगा. दिशा निर्देशों की अवहेलना करने वाले पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.