जयपुर: गुलाब कटारिया पर हमलावर हुए सत्ता पक्ष के मंत्री, सदन के बाहर कही ये बड़ी बात...

शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा इस मामले में और भी ज्यादा आक्रामक हो गए और उन्होंने कहा कि राजस्थान में विपक्ष पूरी तरह से बंटा हुआ है, जो कई बार दिखाई दे चुका है. 

जयपुर: गुलाब कटारिया पर हमलावर हुए सत्ता पक्ष के मंत्री, सदन के बाहर कही ये बड़ी बात...
राजस्थान में विपक्ष पूरी तरह से बंटा हुआ है, जो कई बार दिखाई दे चुका है.

जयपुर: राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को सदन में हुआ हंगामा भले ही अब शांत हो गया हो. सदन के अंदर इसे लेकर कोई नहीं बोल रहा हो लेकिन सदन के बाहर सत्ता पक्ष के मंत्री नेता प्रतिपक्ष गुलाब कटारिया पर हमलावर हो गए हैं. 

आज कटारिया ने कहा कि उन्होंने जो कहा, उसे सदन देख ले और जो चाहे वो निर्णय स्पीकर सीपी जोशी उनके इस्तीफे को लेकर ले सकते हैं तो वहीं शांति धारीवाल ने आज एक बार फिर से दोहराया कि उनका जो कहना था, उसका भावार्थ वही था. 

इसके बाद शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा इस मामले में और भी ज्यादा आक्रामक हो गए और उन्होंने कहा कि राजस्थान में विपक्ष पूरी तरह से बंटा हुआ है, जो कई बार दिखाई दे चुका है. नेता प्रतिपक्ष की बात उनके विधायक नही मान रहे हैं.
सदन में धरना देने जैसी नौटंकी करना इतने सीनियर नेता को शोभा नहीं देता.

जब बीजेपी ने बहिगर्मन किया तो मदन दिलावर खड़े रहे. किरण महेश्वरी भी बाहर नहीं गई. इससे पहले भी बीजेपी के वॉकआउट के समय पूर्व स्पीकर कैलाश मेघवाल भी अकेले खड़े थे. नेता प्रतिपक्ष को संसदीय कार्यमंत्री के बयान पर गुस्सा नहीं होना चाहिए लेकिन धारीवाल ने जो कहा वो सत्य था और रमेश मीणा के प्रश्न के जवाब पर कहा था कि पेड़ पर किसान लटककर मर जाये तो सरकार क्या कर सकती है क्योंकि गुलाब कटारिया खुद आपदा राहत मंत्री थे तो वही सरकार थे और उनके शब्द आज भी रिकॉर्ड पर है. ऐसे में सदन में धरना देने जैसी नौटंकी करना इतने सीनियर नेता को शोभा नहीं देता है. वो 75 पार हो चुके हैं. अगर उनकी यादाश्त में कमजोरी आ गई है, राजेंद्र राठौड़ को बताना चाहिए कि ये बात सही है और उनसे ये बात निकल गयी थी.

जो उन्होंने कहा उन शब्दो का अर्थ क्या होता है. हम जब विपक्ष में थे और स्थगन में हमने पूछा ही किसान का था तो सरकार जिसकी होगी तो उनके ही खाते में जाएगा. कटारिया खुद आपदा राहत मंत्री थे तो हम तो उनके खाते में ही डालेंगे. अगर वो वसुंधरा राजे के खाते में डाले तो उनकी मर्जी है. अब कटारिया को माफी मांगकर जनता के मुददे उठाने चाहिए. नहीं तो हम उन्हें समझा देंगे. इस दौरान डोटासरा ने कटारिया के कहे बयान के बाद मीडिया में आयी खबरों और 25 मार्च 2015 के स्थगन के प्रस्ताव की प्रतियां भी लहराई.

जबान पर कायम हैं तो इस्तीफा देना चाहिए
वहीं, इस मामले में बोलते हूए खाद्य मंत्री रमेश मीणा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जब सत्ता में थे तो वो सत्ता में मदहोश थे. इनको ध्यान नहीं रहता था कि क्या कब बोलते हैं, कभी बोलते हैं, फेंफड़े बुलंद हैं. प्रधानमंत्री के बयान की तरह जो कुछ भी कर सकते हैं. वैसे ही कटारिया जी भी कुछ भी बोल सकते हैं. मेरे स्थगन पर ये बात कही थी. उन्होंने ये जवाब दिया था यदि वो अपनी जबान पर कायम हैं तो इस्तीफा देना चाहिए.