Covid-19: मानवता भूली राजस्थान सरकार, खाना-पानी देना तो दूर, खाली करवा रही शेल्टर होम

जिला प्रशासन की ओर से जिन आश्रय स्थलों को मजदूरों के लिए खोला गया था, अब उनको बंद कर दिया गया है. 

Covid-19: मानवता भूली राजस्थान सरकार, खाना-पानी देना तो दूर, खाली करवा रही शेल्टर होम
पुलिस वालों की सख्ती मजदूरों के लिए मुसीबत बनती जा रही है.

जयपुर: कोरोना वायरस (Coronavirus) का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. कोरोना वायरस से बचाव के लिए देश में हुए लॉकडाउन होने के चलते दिहाड़ी मजदूरी करने वालों पर आफत टूट पड़ी है. हर रोज कमाने और खाने वाली इस बिरादरी के पास राशन खत्म हो रहा है. इस वजह से सैकड़ों मजदूर के परिवार पैदल ही पलायन करने लगे हैं.

कोरोना का कहर, लॉकडाउन की आफत की मार सबसे ज्यादा मजदूर वर्ग पर पड़ी है. मजदूर वर्ग की हालत पहले से ही खराब थी. दिन-रात मेहनत करने के बाद उन्हें तो वक्त की रोटी नसीब होती थी. कोरोना की वजह से चल रहे लॉकडाउन ने मजदूरों की कमर तोड़कर रख दी. काम-धंधा बंद होने से मजदूर अपने गांवों की ओर रुख करने लगे. उन्हें उम्मीद है कि गांव में पहुंचने के बाद अपने लोग उनकी मदद करेंगे और उन्हें भूखा नहीं सोना पड़ेगा लेकिन मजदूरों के घर का रास्ता इतना आसान नहीं है. एक तो गर्मी, ऊपर से पुलिस वालों की सख्ती मजदूरों के लिए मुसीबत बनती जा रही है.

दूसरी तरफ जिला प्रशासन की ओर से जिन आश्रय स्थलों को मजदूरों के लिए खोला गया था, अब उनको बंद कर दिया गया है. हैरानी की बात यह है कि कुछ आश्रय स्थल में मजदूर रह रहे थे, उनको बाहर निकाल दिया गया है. ऐसे में मजदूर अब पैदल ही पलायन कर रहे हैं. शास्त्री नगर स्थित खंडेलवाल सामुदायिक केंद्र में रह रहे करीब आधा दर्जन मजदूरों को अचानक बाहर निकाल दिया गया. ऐसे मजदूर पैदल ही घरों के लिए रवाना हो गए.

बंद हैं राज्य की सीमाएं
प्रदेश की सीमाओं पर सख्ती और आवाजाही बंद होने के बाद अब प्रवासी मजदूरों ने फिर से पलायन शुरू कर दिया है. राजधानी जयपुर से होते हुए हजारों श्रमिक रोज पलायन कर रहे हैं, ऐसे में राजस्थान में बढ़ता हुआ तापमान अब इन मजदूरों के पलायन में बाधा बन रहा है. इन दिनों की बात करें तो प्रदेश का तापमान 41 से 45 डिग्री के बीच चल रहा है. वहीं, राजधानी जयपुर में भी पारा 41 से ऊपर पहुंच चुका है, ऐसे में दोपहर की कड़ी धूप में मजदूर जयपुर से होते हुए दूर राज्यों के लिए पलायन कर रहे हैं. इस दौरान मजदूरों को न तो छाया के बंदोबस्त है, न ही पानी का. वहीं, प्रशासन ने करीब 7 दिन पहले ही शेल्टर होम को बंद कर दिया है. जिनमें मजदूर रह रहे थे, उनको भी खाली करवा दिया है. ऐसे में मजदूरों के आश्रय स्थल भी छिन रहे हैं.

गौरतलब है कि सरकार ने अब आवाजाही पर सख्ती कर दी है. ई-पास को वैध कर दिया है. ऐसे में लाखों मजदूरों ने पास के लिए आवेदन कर रखा है,  लेकिन पास जारी नहीं हुए हैं. बहरहाल, सरकार चाहे कितने ही दावे करे लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद मजबूर मजदूर का पलायन थम नहीं रहा है. लॉकडाउन के तीसरे चरण के बाद मजदूर पैदल ही कोसों दूर चले जा रहे हैं. अब तक हालात ये है कि मजदूरों को रास्ते में भोजन के पैकेट की सुविधा भी नहीं मिल रही है.