विधायकों के लिए नए फ्लैट बनवाएगी राजस्थान सरकार, बनाया ये प्लान...

आलम यह है कि विधायक अमीन कागज़ी ने तो जालूपुरा में सरकारी आवास पर खुद के खर्चे से पहली मंजिल पर निर्माण कराया है तो दूसरे विधायकों ने भी इनमें रिनोवेशन के काम कराए हैं. 

विधायकों के लिए नए फ्लैट बनवाएगी राजस्थान सरकार, बनाया ये प्लान...
जालूपुरा में एक हज़ार वर्ग गज से बड़े आकार के 28 बंगले हैं, जो विधायकों को आवंटित हैं.

जयपुर: सरकार विधायकों के लिए नए फ्लैट बनाने की तैयारी कर रही है. विधानसभा के पास विधायक नगर पश्चिम में बनने वाली बहुमंज़िला इमारत के लिए पैसे का जुगाड़ करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है.

वहीं, इस चुनौती के लिए सरकार ने प्लान बनाया है लेकिन इस पर भी सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में सवाल यह है कि क्या सरकार विधायकों को मौजूदा कार्यकाल में नये फ्लैट्स दे पाएगी?

इन जगहों पर आवंटित हैं मकान
सरकार प्रदेश में सभी विधायकों को सरकारी आवास की सुविधा मुहैया कराती है. फिलहाल जयपुर में विधायकों के लिए विधायक नगर पूर्व और विधायक नगर पश्चिम के साथ ही गांधी नगर, जालूपुरा और विधायकपुरी में भी सरकारी मकान आवंटित कर रखे हैं लेकिन भविष्य में ज्यादा से ज्यादा विधायकों को एक ही जगह घर मुहैया कराने की योजना भी बन रही है. 

व्यवस्था में बड़ी भूमिका जालूपुरा के विधायक बंगलों की रहेगी
इसके लिए विधानसभा के पास ही विधायक नगर पश्चिम में मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में 150 से ज्यादा फ्लैट बनाने का प्लान तैयार हो चुका है. अपने प्लान को अंजाम देने के लिए सरकार ने विधायक नगर पश्चिम और जालूपुरा के बंगलों में रह रहे जनप्रतिनिधियों को मकान खाली करने के नोटिस भी दे दिए हैं. दरअसल, ये मल्टीस्टोरी फ्लैट्स बनेंगे तो विधायक नगर पश्चिम में लेकिन इसकी व्यवस्था में बड़ी भूमिका जालूपुरा के विधायक बंगलों की रहेगी. 

दरअसल, जालूपुरा में एक हज़ार वर्ग गज से बड़े आकार के 28 बंगले हैं, जो विधायकों को आवंटित हैं. सरकार इन बंगलों की कीमत पर ही मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाने की तैयारी कर रही है. इन बंगलों को बेचकर जो पैसा आएगा, उस पैसे से ही मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाई जाएगी.

तोड़े जाएंगे विधायक नगर पश्चिम के फ्लैट्स 
विधायक आवास के री-स्ट्रक्चर प्लान में जालूपुरा के बंगलों को बेचने के साथ ही विधायक नगर पश्चिम के फ्लैट्स तोड़ने का भी मानस बना लिया है क्योंकि इन्हीं फ्लैट्स की ज़मीन पर मल्टीस्टोरी बिल्डिंग खड़ी होनी है. पूरे प्रोजेक्ट पर तकरीबन 232 करोड़ रुपये खर्च होंगे. विधायकों से मौजूदा आवास खाली कराने के साथ ही सरकार ने विधायकों को नए फ्लैट मिलने तक आवास के लिए अपनी पसंद के विकल्प भी बताने के लिए कहे हैं लेकिन इनमें से ज्यादातर विधायक अपने मकान खाली करने के लिए तैयार नहीं हैं खासतौर पर जालूपुरा के विधायक बंगले.

आलम यह है कि विधायक अमीन कागज़ी ने तो जालूपुरा में सरकारी आवास पर खुद के खर्चे से पहली मंजिल पर निर्माण कराया है तो दूसरे विधायकों ने भी इनमें रिनोवेशन के काम कराए हैं. कुछ बंगलों में तो अभी भी रिनोवेशन का काम चल रहा है और यही सरकार के रवैये पर सवाल खड़े करता है. 

सवाल इस बात का है कि अगर री-स्ट्रक्चर प्लान में जालूपुरा के बंगले बेचने ही हैं तो इनके रिनोवेशन पर खर्चा क्यों? इस सवाल पर मंत्री शांति धारीवाल कहते हैं कि रिनोवेशन के ऐसे काम तो चलते ही रहते हैं. 

भले ही सरकार के मंत्री ने तो आसानी से कह दिया कि इस तरह के काम तो होते ही रहते हैं लेकिन इन बंगलों पर रिनोवेशन के नाम पर मोटा पैसा खर्च हुआ है. जालूपुरा में 28 बड़े बंगले हैं तो साथ ही विधायक नगर पूर्व और पश्चिम में 102 विधायकों के रहने की व्यवस्था है. इन मकानों पर दो से पांच लाख रुपया रिनोवेशन के नाम पर खर्च हुआ है. इस तरह औसतन 3 करोड़ रुपया तो इन मकानों में रंग-रोगन और दूसरे काम पर ही खर्च हो गया. 

आलम यह है कि विधायकों को मकान खाली करने के नोटिस मिलने के बाद भी इनमें रिनोवेशन का काम जारी है. ऐसे हालात में रिनोवेशन के यह काम सरकारी खजाने में तंगी और बचत की कोशिशों को आईना दिखाते नज़र आ रहे हैं.