राजस्थान: गहलोत सरकार के तीनों कृषि बिल अटके, राज्यपाल ने नहीं दी मंजूरी!

राज्य सरकार ने तीन नए विधेयकों को पास करवाकर राज्यपाल के पास भेजा था. लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी राज्यपाल ने राज्य सरकार के कृषि विधेयक को मंजूरी नहीं दी.  

राजस्थान: गहलोत सरकार के तीनों कृषि बिल अटके, राज्यपाल ने नहीं दी मंजूरी!
राजस्थान में गहलोत सरकार के तीनों कृषि बिल अटके! (फाइल फोटो)

जयपुर: केंद्र के कृषि कानून के खिलाफ किसानों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है. बड़ी तादाद में किसानों ने दिल्ली बॉर्डर पर डेरा डाला हुआ है. किसानों के आंदोलन को अलग-अलग राज्यों के किसानों का समर्थन भी मिल रहा है. सिर्फ किसान ही नहीं बल्कि कई राजनीति पार्टियां भी किसान आंदोलन को जायज ठहरा रही हैं. राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने भी केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ हल्ला बोला था.

राज्य सरकार ने तीन नए विधेयकों को पास करवाकर राज्यपाल के पास भेजा था. लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी राज्यपाल ने राज्य सरकार के कृषि विधेयक को मंजूरी नहीं दी.

राज्य सरकार ने पारित किए थे 3 बिल
केंद्र के कृषि कानून के खिलाफ राजस्थान सरकार ने 2 नवंबर को मोर्चा खोला था. राजस्थान सरकार ने केंद्र के कृषि कानूनों को बायपास करने वाले राजस्थान सरकार के तीनों नए कृषि विधेयकों को पारित किया था. लेकिन तीनों विधेयक की फाइल आज भी राज्यपाल के पास अटकी हुई है. राजस्थान सरकार ने महामारी विधेयक और तीनों नए कृषि विधेयक राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजे थे. लेकिन राज्यपाल ने केवल कोरोना महामारी विधेयक को ही मंजूरी दी थी. लेकिन अबतक नए कृषि विधेयक को मंजूरी नहीं दी है. सूत्रों की माने तो अभी तीनों विधेयक को अध्ययन के लिए रखा गया है. उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा.

आगे अब क्या...?
कानून के मुताबिक, राज्यपाल जब चाहेंगे तब तक वो इन बिल को रोक कर रख सकते हैं. अगर वो बिल को राष्ट्रपति के पास भी भेजते हैं तो फिर राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी होगी. क्योंकि तीनों विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही राज्य में कानून बन सकते हैं. 

कौन-कौन से हैं राज्य सरकार के विधेयक
पहला विधयेक:
कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) राजस्थान संशोधन विधेयक 2020 है,
इसमें किसान के उत्पीड़न पर 7 साल तक की सजा और 5 लाख जुर्माने का प्रावधान है.

दूसरा विधेयक: कृषक( सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार राजस्थान संशोधन विधेयक है. इस विधेयक में संविदा खेती को लेकर कड़े प्रावधान है, किसान से MSP से कम पर संविदा खेती का करार मान्य नहीं होने और एमएसपी से कम पर करार करने को बाध्य करने पर 7 साल तक की सजा और 5 लाख जुर्माने का प्रावधान किया है.

तीसरा विधेयक: आवश्यक वस्तु (विशेष उपबन्ध और राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 है जिसमें सरकार कृषि जिंसों पर स्टॉक लिमिट लगा सकेगी. इसका प्रावधान है, केंद्र ने यह प्रावधान हटा दिया था.

केंद्र के कृषि कानून के खिलाफ प्रदेश की कांग्रेस सरकार और खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कई मर्तबा सवाल खड़े कर चुके है. यहां तक की कोरोनाकाल में भी कांग्रेस सरकार ने धरना प्रदर्शन भी दिया था. ऐसे में अब राज्यपाल से मंजूरी ना मिलने पर एक बार फिर राजस्थान में सियासत गरमाने वाली है.

Krishna Saini, News Desk