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राजस्थान: रेत माफियाओं की दबंगई, बालू के लिए उखाड़ डाले सैकड़ों पेड़

नर्मदा नहर के किनारे पड़ी जमीन वन विभाग की ओर से लाखों पौधे लगाए गए, लेकिन ठेकेदार ने अपनी भरपाई के लिए रेत के साथ-साथ सैकड़ो पौधे उखाड़ दिए.

राजस्थान: रेत माफियाओं की दबंगई, बालू के लिए उखाड़ डाले सैकड़ों पेड़
नर्मदा नहर के किनारे की जमीन वन विभाग को वृक्षारोपण के लिए सौंपी हुई है.

बबलू मीणा/जालोर: चितलवाना उपखण्ड क्षेत्र से गुजर रही नर्मदा मुख्य नहर पर वीरावा गांव की सरहद में वन विभाग की ओर से लगाए गए सैंकड़ो पौधे भारतमाला परियोजना के तहत बन रही सड़क के ठेकेदार ने उखाड़ दिए है. लेकिन जिम्मेदार अधिकारी बेखबर है. दरअसल गांधव गांव की पुलिया से साता गांव तक भारतमाला परियोजना NH 925 A सड़क बन रही है. इसी सड़क में कई जगह ढ़लान है उस ढ़लान को समतल करने के लिए रेत की आवश्यकता है तो ठेकेदार की नजर नर्मदा नहर के किनारे जमीन पर पड़ी. नर्मदा नहर के किनारे पड़ी जमीन वन विभाग की ओर से लाखों पौधे लगाए गए, लेकिन ठेकेदार ने अपनी भरपाई के लिए वहां से रेत उठानी शुरु कर दी. 

वहीं रेत के साथ-साथ सैकड़ो पौधे उखाड़ दिए, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी बेखबर है. जब ग्रामीणों ने इनका विरोध किया तो ठेकेदार ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि हमने विभाग से अनुमाति ले रखी है, लेकिन जब विभाग के अधिकारियों से पूछा तो अधिकारियों ने कहा कि हमने रेत उठाने जैसी कोई अनुमति नही दी है. इसका मतलब साफ है कि दोनों विभागों की आंखों में धूल झोंककर ठेकेदार ने अपने स्वार्थ के लिए अभी नियम कायदे दरकिनार कर दिए है.

चितलवाना क्षेत्र से गुजर रही नर्मदा नहर के किनारे नर्मदा विभाग ने जमीन है और वह जमीन वन विभाग को वृक्षारोपण के लिए सौंपी हुई है. वन विभाग ने इसी जमीन पर लाखों पौधे लगाकर नहर के किनारे हरियाली लगा रखी है, लेकिन ज्योहीं ठेकेदार की नजर उस जमीन पर पड़ी तो वहां से सैकड़ो पौधे उखाड़ कर वहाँ से हजारों ट्रक रेत उठाकर ले गए लेकिन न तो नर्मदा विभाग को भनक लगी और न ही वन विभाग को. जब ग्रामीणों ने विरोध किया तो ग्रामीणों को ठेकेदार ने साफ-साफ कह दिया कि हमनें विभाग से अनुमति ले रखी है इसलिए हमें कोई रोक नहीं सकता.

जब मीडिया इस मामले की पड़ताल करते हुए मौके पर पहुंचे तो जेसीबी से ट्रक भरते नजर आ रहे थे. नर्मदा नहर के आस पास जहां पहले सैकड़ो पौधे होते थे, वहां अब दस से पंद्रह फीट गहरे गड्ढे नजर आ रहे थे. कुछ पौधे दिखाने के लिए उसके पास रेत छोड़ रखी थी वो भी गिरने की कगार पर थे. जब मीडिया ने ठेकेदार से बात करनी चाही तो उन्होंने कैमरे पर बोलने से साफ मना कर दिया और कहा कि हमने विभाग से मौखिक अनुमति ले रखी है.

जब इस मामले को लेकर नर्मदा के अधिकारियों से बात की तो उन्होंने साफ कह दिया कि हमने रेत उठाने के लिए कोई अनुमति नहीं दी है. अगर ऐसा मामला है तो शीघ्र ही जांच करवाकर ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा।अब देखने वाली बात यह है कि विभाग कब कार्यवाही करता है.

वहीं एक तरफ वन विभाग जगह-जगह पेड़-पौधे लगाने के लिए पहल कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वन विभाग के हाथों लगाए गए पौधे जेसीबी से रौंदे जा रहे है. वहीं नर्मदा विभाग की जमीन से हो रहे अवैध खनन का विभाग के अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद कोई कार्यवाही नही हो रही है. मतलब साफ है कि ठेकेदार की राजनीतिक रसूखात साफ दिखाई दे रही है. क्योंकि एक बार ग्रामीणों ने शिकायत भी की तो नर्मदा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे. नर्मदा के किनारे हो रहे अवैध खनन को रुकवाया लेकिन कोई कार्यवाही नही की. फिर कुछ दिनों बाद वापस अवैध खनन शुरु हो गया. अब विभाग को जानकारी होने के बावजूद अधिकारी इन ठेकेदारों के आगे बेबस व लाचार दिखाई दे रहे है. इस मामले से यही प्रतीत होता है कि विभाग भी ठेकेदार से मिला हुआ है इसलिए कोई कार्यवाही नहीं हो रही है.