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राजस्थान: ACB में आईजी दिनेश एम.एन की वापसी, दहशत में भ्रष्टाचारी

1995 बैच के राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी दिनेश एमएन को जो भी जिम्मेदारी दी गई उसे उन्होंने बखूबी निभाया है

राजस्थान: ACB में आईजी दिनेश एम.एन की वापसी, दहशत में भ्रष्टाचारी
प्रदेश की आम आवाम को इस आईपीएस ऑफिसर पर पूरा भरोसा है

आशुतोष शर्मा/जयपुर: राज्य सरकार ने IPS की बैक टू बैक दो तबादला सूची जारी कर दी है. इस सूची में राजस्थान के सिंघम कहे जाने वाले आईजी दिनेश एमएन को एक बार फिर एंटी करप्शन ब्यूरो में आईजी की भूमिका दी गई है. IPS दिनेश एमएन की एसीबी में ये सेकंड इनिंग है. तीन साल पहले वो ACB में ये भूमिका निभा चुके है. पिछले भाजपा सरकार में जब उन्हें ACB में ये जिम्मेदारी दी गई तो उन्होंने बड़े घूसखोर IAS अधिकारी और दुसरे भ्रष्ट लोगों पर शिकंजा कसा था. 

1995 बैच के राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी दिनेश एमएन को जो भी जिम्मेदारी दी गई उसे उन्होंने बखूबी निभाया है. आनंदपाल जब प्रदेश के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका था तब आईजी दिनेश एमएन को SOG में आईजी की जिम्मेदारी दी गई और आईजी दिनेश एमएन और उनकी टीम ने ना सिर्फ आनंदपाल बल्कि उसकी पूरी गैंग पर शिकंजा कसा. 

प्रदेश की आम आवाम को इस आईपीएस ऑफिसर पर पूरा भरोसा और विश्वास है और उनका यही भरोसा जीतकर आईपीएस दिनेश एमएन हर मोर्चे पर खरे उतरते है. 17 दिन पहले ही उन्हें बीकानेर आईजी पद से हटाकर आईजी इंटेलिजेंस तैनात किया. गौरतलब है कि दिनेश एमएन को पुलिस महकमें में 'सिंघम' की पहचान मिली हुई है. IPS दिनेश एमएन बार-बार तबादला होने के चलते भी सुर्ख़ियों में रहते हैं. 

दरअसल, दिनेश एमएन की छवि एक दबंग और ईमानदार आईपीएस ऑफिसर की रही है. अपने पुलिस करियर के दौरान उन्होंने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की. कई बार अपनी जान पर खेलकर उन्होंने कई कुख्यात बदमाशों को सलाखों तक पहुंचाया है. वहीं एसीबी में रहते हुए भ्रष्ट तंत्र से जुड़े कई बड़े अधिकारियों पर भी उनकी गाज गिरी है. फिल्मों के दबंग पुलिस अफसरों की जांबाजी के किस्से की तर्ज़ पर उनकी रियल लाइफ में भी ऐसे कई वाकये हैं जो उन्हें एक 'दबंग' अफसर बनाते हैं. इनके करियर की सफलताओं को देखकर अंदाज़ा लगा सकते हैं कि उनके नाम से ही अपराधी खौफ खाते हैं. 

गौरतलब है कि एसीबी में रहते हुए उन्होंने राजस्थान के सबसे बड़े खान महाघूसकांड का पर्दाफ़ाश करने में अहम् भूमिका निभाई. इसमें प्रमुख सचिव (खदान) अशोक सिंघवी को गिरफ्तार किया गया. ये घूसकांड देश भर में सुर्ख़ियों में छाया रहा. वहीं दिल्ली-जयपुर राजमार्ग स्थित शाहपुरा सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट भारत भूषण गोयल को साढ़े तीन लाख रूपए के साथ ट्रेप किया. गोयल ने यह रकम आयुर्वेदिक औषधियों की फैक्ट्री लगाने के लिए एक उद्यमी से तय हुए 25 लाख रूपए की रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर ली थी.

आबकारी इंस्पेक्टर पूजा यादव को शराब की दुकान लगाने वाले अलॉटी से 40 हज़ार रूपए की घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा. दिनेश की टीम ने पूजा यादव के घर से 5 लाख रूपए और दूसरे राज्यों से लाई गई शराब की 19 बोतलें बरामद की थी. जयपुर के मालवीय नगर इलाके में एक मकान के निर्माण की मंजूरी देने के लिए 70 हज़ार की घूस लेते एक दलाल और जयपुर नगर निगम के दो अधिकारियों को पकड़ा था.

राजस्थान हाइकोर्ट ने दिनेश एमएन को हिंगोनिया गोशाला में चारा घोटाले की जांच की पड़ताल की जिम्मेदारी सौंपी. यहां से आठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया. जयपुर में जमीन की वैधानिक मंजूरी देने के लिए शिविर में हो रहे भ्रष्ट अफसरों पर शिकंजा कसा. यहां से जयपुर विकास प्राधिकरण के चार अधिकारियों को खुलेआम घूस मांगते पकड़ा गया. जबकि साल 2005 में सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में सुर्ख़ियों में बने रहे. दिनेश की गिरफ्तारी हुई और उन्हें जेल भेज दिया गया. सोहराबुद्दीन के साथ ही उसकी बीवी कौसर बी और साथी तुलसी प्रजापति जब मुठभेड़ में मारे गए तब दिनेश उदयपुर के एसपी थे. इसके बाद साल 2017 इस मामले में दिनेश एमएन बरी हो गये .