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राजस्थान: छात्रसंघ चुनाव में कागज की बर्बादी को रोकने के लिए इस महाविद्यालय की पहल, बनाई ये योजना

कॉलेज द्वारा इस बार चुनाव सम्बन्धी सभी नोटिस भी कोलेज की वेबसाईट पर ही जारी किए जाएंगे. लिंगदोह कमेटी की सभी सिफारिशों को भी कॉलेज की वेबसाईट पर ही जारी किए जाने का निर्णय लिया गया है.

राजस्थान: छात्रसंघ चुनाव में कागज की बर्बादी को रोकने के लिए इस महाविद्यालय की पहल, बनाई ये योजना
कॉलेज ने इस बार छात्रसंघ चुनाव में पेपर की बचत के लिए तय किया कि मतदाता सूचियों का प्रकाशन ऑनलाइन ही किया जाएगा

मनवीर सिंह, अजमेर: राजस्थान के अजमेर के 183 साल पुराने राजकीय सम्राट पृथ्वीराज चौहान महाविधालय में कॉलेज प्रशासन के नवाचार ने कुछ ऐसा काम किया कि आज चारो तरफ उसकी तारीफ हो रही है. कॉलेज प्रशासन ने इस चुनाव में कागज की बर्बादी को रोकने के लिए बेहतरीन कदम उठाए हैं. कोशिश की गई है कि इस बार चुनाव को पेपरलेस किया जाए. छात्रसंघ चुनावों में कागज की बर्बादी किसी से छुपी हुई नहीं है. 

चुनाव प्रक्रिया में दस्तावेजों के लिए कागज के इस्तेमाल से लेकर प्रचारक के नाम पर कागज की बर्बादी हर साल चुनाव की एक गंदी तस्वीर पेश करती है. कागज की इसी बर्बादी को रोकने की दिशा में अजमेर के सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविधालय ने एक पहल की है. कॉलेज ने इस बार छात्रसंघ चुनाव में पेपर की बचत के लिए तय किया कि मतदाता सूचियों का प्रकाशन केवल ऑनलाइन ही किया जाएगा ताकि हर उम्मीदवार द्वारा 1000 रूपये का भुगतान कर ली जाने वाली मतदाता सूचि पर होने वाली कागज की बर्बादी रोकी जा सके. कॉलेज द्वारा इस बार चुनाव सम्बन्धी सभी नोटिस भी कॉलेज की वेबसाईट पर ही जारी किए जाएंगे. लिंगदोह कमेटी की सभी सिफारिशों को भी कॉलेज की वेबसाईट पर ही जारी किए जाने का निर्णय लिया गया है.

कॉलेज द्वारा इस बार चुनाव प्रचार के दौरान होने वाली कागज कि बर्बादी को रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाए गए हैं. राजकीय महाविधालय में कॉलेज प्रशासन द्वारा चुनाव प्रचार के लिए कागज के बेजा इस्तेमाल को रोकने के लिए कुछ कदम उठाये गए हैं. कॉलेज परिसर में एक दीवार चुनाव प्रचार सामग्री चस्पा करने के लिए निर्धारित की गई है. इसी के साथ प्रचार सामग्री को खुले में उडाए जाने या कॉलेज परिसर में फैलाए जाने पर भी कार्यवाही की चेतावनी जारी की गई है.

कॉलेज प्रशासन द्वारा कागज की बचत की मंशा से ही निर्वाचन विभाग से इवीएम की मांग की गई थी लेकिन निर्वाचन विभाग द्वारा इवीएम उपलब्ध नहीं करवाए जाने से इस बार भी मतदान मतपत्रो से ही करवाए जाने का निर्णय लिया गया है. राजस्थान के 183 साल पुराने इस महाविद्यालय ने कागज बचाने की यह योजना एक नजीर के रूप में पुरे प्रदेश के सामने रखी है.