राजस्थान: शहरों में बढ़ा मिलावटी मिठाई का कारोबार, 800 किलो मावा जब्त

भीलवाड़ा में त्योहारी सीजन में ज्यादा मुनाफा कमाने की वजह से बड़ी मात्रा में प्रदेश के अन्य जिलों से मिलावटी मावा भीलवाड़ा पहुंच रहा है.

 राजस्थान: शहरों में बढ़ा मिलावटी मिठाई का कारोबार, 800 किलो मावा जब्त
स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को बीकानेर से भीलवाड़ा पहुंचे करीब 800 किलो मिलावटी मावे को जब्त किया.

भीलवाड़ा: दीवाली पर्व में अभी कुछ ही दिन बचे हैं जिसको लेकर लोग तैयारियों में जुट गए हैं. दीवाली के पर्व पर पटाखों व सजे बाजारों के साथ मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन कच्चे माल की आपूर्ति कम होने के चलते मिलावटखोर इसका खूब फायदा उठाते हैं. वहीं अधिकतर लोग बाजारों से ही मिठाई की खरीदारी करते हैं. लेकिन आप खूबसूरत दिखने वाली जो मिठाई खरीद रहे है कहीं वो मिठाई मिलावटी मावे से तो नहीं बनी.

खबरों की मानें तो भीलवाड़ा में त्योहारी सीजन में ज्यादा मुनाफा कमाने की नीयत से बड़ी मात्रा में प्रदेश के अन्य जिलों से मिलावटी मावा भीलवाड़ा पहुंच रहा है. वहीं स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को बीकानेर से भीलवाड़ा पहुंचे करीब 800 किलो मिलावटी मावे को जब्त किया. हर बार त्यौहारों के समय अनेक मिलावटखोरों पर प्रशासन द्वारा छापामारी कर नकली मावा, खोया, पनीर व घी पकड़ा जाता है लेकिन इस बार भी आप सतर्क रहें, क्योंकि क्षेत्र में कई जगहों पर चोरी छिपे मिलावटखोरों द्वारा अपने घरों में नकली खोया व मिठाई तैयार कर मिठाई की दुकानों पर सस्ते भाव में सप्लाई किया जा रहा है और ये मिलावटी मिठाई आपकी सेहत को खराब कर सकती हैं.

हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को बड़ी कार्यवाही करते हुए कल्पना ट्रैवल्स की निजी बस से धनश्याम शर्मा नामक एक व्यक्ति के कब्जे से करीब 800 किलो मिलावटी मावा पकड़ा. प्रारम्भिक जांच में करीब 350 किलो माला खराब पाये जाने पर उसे नष्ट करने की कार्यवाही भी की गई. वहीं सुत्रों के मुताबिक दूध की कमी व अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावटी मावा बनाने के लिए दूध की बजाय दूध पाऊडर, रसायन, उबले आलू, शकरकंद, रिफाइंड तेल का अधिक प्रयोग किया जा रहा है. जिसे पूरे शहर में त्योहारों के मौके पर बेचा जाएगा.

नहीं नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि सिंथैटिक दूध बनाने के लिए पानी में डिटर्जैंट पाऊडर, तरल जैल, चिकनाहट लाने के लिए रिफाइंड, मोविल ऑयल व एसैंट पाऊडर डालकर दूध बनाया जाता है. यूरिया का घोल व उसमें पाऊडर और मोवल ऑयल डालकर भी सिंथैटिक दूध तैयार किया जाता है. इसमें थोड़ा असली दूध मिलाकर सोखता कागज डाला जाता है. इससे नकली मावा व पनीर तैयार किया जाता है जो कम कीमत पर तैयार हो जाता है और असली खोये के भाव में मिठाई बेच अच्छा मुनाफा कमाया जाता है.

जबकि स्वास्थय विभाग के सीएमएचओ डॉक्टर जे.सी जीनगर का कहना है कि मिलावटी मिठाई के सेवन से सबसे ज्सादा लीवर को नुकसान होता है. आंतों में संक्रमण होने से सूजन आ जाती है. सिंथैटिक दूध के इस्तेमाल से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, ज्यादा मिठाई खाने से खून में कमी हो सकती है. डॉक्टर जीनगर का कहना था कि मावे में मिलावट की पहचान के लिए टिंचर आयोडीन डालने से अगर नीला हो जाए तो वह मिलावटी है लेकिन आप उसे चखकर उसके स्वाद और रंग से उसकी पहचान कर सकते हैं. मिलावटी या नकली मावे का स्वाद व रंग असली खोये से भिन्न और कुछ खराब महसूस होगा.

डॉक्टर जे.सी जीनगर की मानें तो मिलावटी खोये को आप उंगलियों में लेकर रगड़ें यदि उसमें चिकनापन नहीं है तो समझो वह नकली है. बता दें कि खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी रोकने व गुणवत्ता को स्तरीय बनाए रखने के लिए देश में खाद्य सुरक्षा और मानक कानून-2006 लागू किया गया है. लोकसभा और राज्यसभा में पारित होने के बाद 5 अगस्त 2011 को यह कानून अमल में लाया गया. इस कानून के तहत मिलावटखोर को पहली श्रेणी में घटिया व मिलावटी माल बिक्री करने पर मामले में संबंधित प्राधिकारी द्वारा 10 लाख तक जुर्माना किया जा सकता है, वहीं दूसरी श्रेणी में अगर नकली खाद्य पदार्थ से किसी की मौत हो जाती है तो अदालत द्वारा उसे उम्र कैद और 10 लाख रुपए का जुर्माना किया जा सकता है. लेकिन इन तमाम कानूनों के बाद भी मिलावटी मिठाईयों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा.