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राजस्थान उद्योग विभाग 'शिल्पशाला' के जरिए करेगी प्रदेश में शिल्प कौशल का विकास

राजस्थान में शिल्प से जुड़ी ऐसी कई कलाएं हैं जो अब लुप्त होने के कगार पर है. इनमें ओढ़नी, जाजम जैसे हस्तशिल्प के लुप्त की आशंका है. 

राजस्थान उद्योग विभाग 'शिल्पशाला' के जरिए करेगी प्रदेश में शिल्प कौशल का विकास
तीन साल पहले जयपुर को इंटरनेशनल क्राफ्ट सिटी का दर्जा दिया गया है.

जयपुर: प्रदेश का उद्योग महकमा लगातार नवाचारों पर काम कर रहा है. उद्योग विभाग ने नई पहल शिल्पशाला के नाम से की है. इसके जरिए शिल्प कौशल को निखारने की पहल होगी. प्रदेश की लुप्त हो रही कलाओं का ज्ञान नइर्द पीढ़ी को इसके जरिए दिया जाएगी. विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से युवा पीढ़ी इससे जुड़ेगी और निर्यात कारोबार में इजाफा होगा.  

अगली पीढ़ी का कौशल विकास
राजस्थान में शिल्प की अनूठी और संस्कारित परंपरा रही है और इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में सहयोगी हाथ उद्योग विभाग ने बढ़ाए है. उद्योग आयुक्त डॉ. केके पाठक सोमवार को भारतीय शिल्प संस्थान और उद्यम प्रोत्साहन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय शिल्प शाला का उद्घाटन किया. झालाना स्थित भारतीय शिल्प संस्थान परिसर में प्रदेश के नामचीन शिल्प गुरुओं और 150 से अधिक प्रशिक्षार्थियों की मौजूदगी रही. उन्होंने कहा कि परंपरागत शिल्प से नई पीढ़ी को जोड़ने के उद्देश्य से उद्योग विभाग ने शिल्प गुरुओं और आवदेकों को साझा मंच उपलब्ध कराने की पहल की है. 

3700 करोड़ के हस्तशिल्प का निर्यात 
राज्य से 3700 करोड़ के हस्तशिल्प का निर्यात होता है. तीन साल पहले जयपुर को इंटरनेशनल क्राफ्ट सिटी का दर्जा दिया गया है. राजस्थान में शिल्प से जुड़ी ऐसी कई कलाएं हैं जो अब लुप्त होने के कगार पर है. इनमें ओढ़नी, जाजम जैसे हस्तशिल्प के लुप्त की आशंका है. विभाग ने इस शिल्पशाला के जरिए जयपुर में पायलट प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया है. यह यहां पर सफल रहता तो नीति बनाकर प्रदेशभर में इसे लागू किया जाएगा. इसकी खास बात यह है कि इसमें प्रशिक्षण के लिए पूरी मदद उद्योग विभाग कर रहा है. इस शिल्पशाला में सबसे अधिक 29 युवाओं ने हैण्ड ब्लॉक प्रिंटिंग में रुचि दिखाई है. लैण्ड स्केप पेंटिंग और ब्लू पॉटरी में 18-18, मीनाकारी और मिनियष्चर पेंटिंग में 15-15, क्ले पॉटरी में 13 पेपरमैशी में 11 टाई डाई में 10 और लाख शिल्प में 8 ने पंजीयन कराया है.

इन उत्पादों का कौशल
ब्लॉक प्रिंटिंग, बंधेज, टाई एण्ड डाई, दाबू, बगरु, बाडमेरी और अजरख प्रिंट, तारकषी, कुंदन मीनाकारी, टेराकोटा, थेवा कला, मूर्ति कला व पत्थर पर नक्कासी पत्थर के उत्पादों का निर्माण, कोटा डोरिया, बांधनी, गोटा-पत्ती बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा. साथ ही जयपुरी रजाई, खेस-दरी निर्माण, लाख शिल्प, उस्ता कला, पेंटिंग, मिनिएचर पेंटिंग, ब्लू पॉटरी, क्ले आर्ट, जूतियां व मोजड़ी, हैण्डमेड पेपर बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा. प्रदेश के उद्योग महकमे के हैंडीक्राफ्ट, दस्तकारी और शिल्प सौंदर्य को निखारने का यह प्रयास सफल कितना होगा यह तो इस शिल्पशाला से निकले वाले आर्टिजन तय करेंगे, लेकिन यह प्रयास उद्योग विभाग की तरफ से किए जाने का उत्साह एमसएमई सेक्टर को बढ़ावे के रुप में देखने को मिलेगा.