राजस्थान: पत्थर की खानें बनीं मजदूरों की कब्रगाह, अब तक 80 से ज्यादा की मौत

खानों में काम करने वालो मजदूरों में ज्यादातर अनुसूचित जाति के गरीब लोग हैं और ग्रामीण बताते है कि घर घर मे एक विधवा है.

राजस्थान: पत्थर की खानें बनीं मजदूरों की कब्रगाह, अब तक 80 से ज्यादा की मौत
सिलिकोसिस से हर साल कई मजदूरों की मौत हो जाती है.

नागौर/ हनुमान तंवर: राजस्थान के नागौर के बड़ी खाटू को सेंडस्टोन के रूप में दुनिया भर में जाना जाता है. यहां पत्थर की बहुत सी खानें हैं और इन खानों में सिलिकोसिस की वजह से मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. अब तक यह आंकड़ा 80 को पार कर गया है. इन्हीं खानों में से एक में काम करने वाले अशोक ने जी मीडिया से बात करते हुए बताया कि अगर यहां नियमित काम करने वाला 2 साल में मौत का शिकार हो जाता है.

अशोक ने यहां मजदूरों का दर्द बयां करते हुए कहा कि बड़ी खाटू में एक कहावत है कि जिस प्रकार गिद्ध की प्रजाति नष्ट हो गई यहां काम करने वाले मजदूरों की प्रजाति भी ऐसे ही नष्ट हो जाएगी. गरीबी के कारण पत्थर का काम करने वाले कई लोग हर साल इस बीमारी से मौत के मूहं में चले जाते हैं. इसी कड़ी में एक दूसरे मजदूर मनोज ने बताया, उसके पिता की मौत सिलिकोसिस से हुई थी और उसका भाई भी इस बीमारी से जूझ रहा है और वह भी जानता है कि आने वाले वक्त में उसकी मौत भी इसी से होगी. 

यहां खानों में काम करने वालो मजदूरों में ज्यादातर अनुसूचित जाति के गरीब लोग हैं और ग्रामीण बताते है कि घर घर मे एक विधवा है. अब तक गांव में 80 से ज्यादा मजदूरों की मौत हो चुकी है. कई अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे है. यह तो केवल सरकारी आंकड़ा है. 

पत्थर के लिए मशहूर है बड़ी खाटू
बड़ी खाटू ऐतिहासिक नगरी के रुप में बसा एक छोटा सा गांव है. मगर यहां के पत्थर की विश्वभर में एक अलग पहचान है जो देश के कई महलों मंदिरों और मस्जिदों में यहां का पत्थर लगा हुआ है. इस पत्थर में सुंदर घड़ाई जड़ाई के साथ शानदार कलाकृति से कारीगर इसको और ज्यादा बेशकीमती बना देते हैं. गांव में भी कई ऐतिहासिक इमारते हैं मगर इसके खनन से उड़ने वाली गर्द से कई जिंदगियां जा चुकी हैं और जाने वाली है. समय रहते इस ओर खान विभाग और सरकार को ध्यान देने की जरूरत है. नही तो यहां सिर्फ खाने बचेंगी.