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राजस्थान: भारतमाला प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण पर नहीं थम रहा विवाद

इस प्रोजेक्ट में राजस्थान की 9 तहसीलें के किसान प्रभावित होंगे. जिसमें हनुमानगढ़ के 25 गांव के किसान इस सड़क के अंतर्गत प्रभावित होंगे. हनुमानगढ़ के संगरिया, हनुमानगढ़, टिब्बी, रावतसर, पीलीबंगा तहसील की 217 हेक्टेयर जमीन शामिल है. 

राजस्थान: भारतमाला प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण पर नहीं थम रहा विवाद

मनीष शर्मा, हनुमानगढ़: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानि NHAI के महत्वपूर्ण भारत माला प्रोजेक्ट के तहत पंजाब के अमृतसर से गुजरात के जामनगर तक प्रस्तावित राजमार्ग में भूमि अधिग्रहण का विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है रोजी-रोटी पर संकट देख किसान भूमि अधिग्रहण के उचित मुआवजे की मांग को लेकर महीनों से आंदोलन कर रहे हैं. वहीं आंदोलन को दरकिनार कर प्राधिकरण के अधिकारी जल्द ही भूमि अधिग्रहण शुरू करने की तैयारी में जुटे हैं. पिछले पांच महीने से हनुमानगढ़ जिला कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे किसानों की मांग है कि उन्हें पंजाब और हरियाणा के तर्ज पर मुआवजा दिया जाना चाहिए लेकिन प्रोजेक्ट के अधिकारी उनकी सुनवाई नहीं कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि वे पिछले पांच महीने से इस अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं, और इसको लेकर उनकी आपत्तियों पर भी अभी कोई फैसला नहीं किया गया तो काम कैसे शुरू किया जा सकता है.

क्षेत्र के किसानों ने सरकारों पर किसानों को बर्बाद करने के आरोप लगाते हुए कहा कि जब उनकी जमीन के बाजार भाव ज्यादा है और मुआवजा महज 30 प्रतिशत मिल रहा है तो वे अधिग्रहण के बाद और कृषि भूमि कैसे खरीद पाएंगे, साल दर साल महंगी होती कृषि और गिरते फसलों के भाव ने किसानों की कमर तो पहले ही तोड़ रखी है अब जमीन छिनने के बाद तो किसानों के परिवारों पर जीवन यापन का संकट खड़ा हो जाएगा.

इस प्रोजेक्ट में राजस्थान की 9 तहसीलें के किसान प्रभावित होंगे. जिसमें हनुमानगढ़ के 25 गांव के किसान इस सड़क के अंतर्गत प्रभावित होंगे. हनुमानगढ़ के संगरिया, हनुमानगढ़, टिब्बी, रावतसर, पीलीबंगा तहसील की 217 हेक्टेयर जमीन शामिल है. 

अब चूंकि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की तैयारी में है और महीनों से आंदोलन कर रहे किसानों की उचित मुआवजे की मांग पर पानी फिरता नजर आ रहा है. ऐसे में देखना होगा कि भूमि अधिग्रहण का काम शुरू होने से पहले क्या किसानों को उचित मुआवजा मिल पायेगा या किसानों का आंदोलन बेअसर साबित होगा.