राजस्थान: सरकारी हुआ लक्ष्मीनारायण बाईजी मंदिर, अब देवस्थान विभाग के पूजारी करेंगे सेवा

बड़ी चौपड़ के लक्ष्मी नारायण बाईजी मंदिर का हक महंत परिवार को दिलाने के लिए जयपुर शहर के सभी संत व महंत एकजुट हुए थे. 

राजस्थान: सरकारी हुआ लक्ष्मीनारायण बाईजी मंदिर, अब देवस्थान विभाग के पूजारी करेंगे सेवा
यह मंदिर भी महंत परिवार को गोद दिया जा सकता है.

राजस्थान: 65 साल बाद बड़ी चौपड़ स्थित लक्ष्मीनारायण बाईजी मंदिर का कब्जा लेने की कार्रवाई देवस्थान विभाग की शुरू कर दी है. इसी के तहत सोमवार रात तक विभाग मंदिर से जुड़ी दुकानों सहित दूसरी व्यवसायिक संपतियों के कब्जे लेकर सूची बनाता रहा. इस दौरान जो भी ​जो भी दुकानें बंद मिली उनको सीज कर दिया गया. विभाग के सहायक आयुक्त जयपुर प्रथम आकाश रंजन सहित अन्य विभागीय अधिकारी इस दौरान मौजूद रहे. विभाग की ओर से मंदिर की जो भी संपति कब्जे में ली गई उस पर नोटिस भी चस्पा किया गया. जिसमें उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला दिया है. बीते कई साल से मंदिर के महंत स्वर्गीय बंशीधर शर्मा देवज्ञ के उत्तराधिकारी महंत पुरुषोत्तम भारती मंदिर को संभाल रहे थे.

यह है मामला
मामले के अनुसार सरकार ने बंशीधर को 1954 में मंदिर का पुजारी नियुक्त किया था. देवस्थान विभाग ने 1958 में बंशीधर का तबादला दूसरे मंदिर में कर दिया. बंशीधर ने मंदिर को अपने पूर्वजों का बताकर दावा किया. जिसे निचली अदालत ने 27 जुलाई 1977 को खारिज कर दिया. उच्च न्यायालय ने 19 नवंबर 1997 को अपील स्वीकार करके अधीनस्थ अदालत के आदेश को रद्द कर दिया और बंशीधर के वारिसों को मंदिर का मालिकाना हक दे दिया. इस आदेश को राज्य सरकार ने चुनौती दी थी. जिस पर फैसला राज्य सरकार के पक्ष में आ गया. इसके बाद मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा. जिसके बाद सोमवार को विभाग के अधिकारी मंदिर और उसकी संपति का कब्जा लेने पहुंचे.

बाईजी मंदिर का हक महंत को दिलाने में जुटे थे संत-महंत
बड़ी चौपड़ के लक्ष्मी नारायण बाईजी मंदिर का हक महंत परिवार को दिलाने के लिए जयपुर शहर के सभी संत व महंत एकजुट हुए थे. इस संबंध में हुई देवालय संरक्षण समिति की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार भेजा गया था. प्रस्ताव में कहा गया था कि सरकार लक्ष्मीनारायण बाईजी मंदिर का कब्जा दस पीढिय़ों से सेवा कर रहे महंत परिवार के पास ही रहने दिया जाए. संतों-महंतों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलकर अपनी बात रखी थी. महंत परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी मंदिर परिसर में ही निवास करता आ रहा है. अत: इस संबंध में आपसी सहमति से निर्णय लेना ही उचित होगा. यह मंदिर 1955 में तत्कालीन महंत बंशीधर देवज्ञ को राज्य सरकार ने संभलवाया था.

देवस्थान विभाग ने दे रखे हैं कई मंदिर गोद
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अवगत करवाया ताकि रामचंद्रजी का मंदिर, सिरह ड्योढ़ी बाजार, गोवर्धननाथजी का मंदिर हवामहल के पीछे, रूप चंद्रमा मंदिर सांगानेरी गेट, बालमुकुंद मंदिर सेंट्रल पार्क, चतुर्भुजजी मंदिर छोटी चौपड़ विभिन्न संस्थाओं को गोद दे रखे हैं. यह मंदिर भी महंत परिवार को गोद दिया जा सकता है.