राजस्थान: घाटे में चल रहीं बिजली कंपनियां अपने आर्थिक प्रबंधन को कर रहीं दुरूस्त

डिस्कॉम्स का घाटा लगातार बढ़ रहा है. इसका असर प्रदेश के डिस्कॉम्स को बिजली बेचने वालों पर भी हैं. इनको भुगतान मिलने में भी लगातार देरी है. देशभर में कंपनियों को भुगतान करने में सबसे खराब स्थिति में बिहार और राजस्थान हैं.

राजस्थान: घाटे में चल रहीं बिजली कंपनियां अपने आर्थिक प्रबंधन को कर रहीं दुरूस्त

जयपुर: राजस्थान की बिजली कंपनियां अपने आर्थिक प्रबंधन को दुरूस्त कर रही हैं. राज्य सरकार की सख्ती के बाद कंपनियां अपने बकाया राशि को वसूलने में सक्रिय हुई हैं. साथ ही घाटे को कम करने के उपायों पर प्रभावी काम शुरू हुआ है. करीब पांच हजार करोड़ रुपए की बकाया राशि भी डिस्कॉम्स वसलूने की तैयारी में है.

देश का बिजली महकमा तेजी से घाटे की ओर बढ़ रहा है. घाटा भी इतना की इससे उभर पाने के तरीके तक विभाग के अधिकारियों को नहीं मिल रहे. बढ़ रहे घाटे में अधिकारियों की टारगेट के प्रति लापरवाही भी अहम स्थान रखती हैं. अब बिजली कंपनियां अपने घाटे पर काबू करने के लिए बकाया वसूलने में सख्ती बरतेगी. दिसंबर महिने तक करीब तीन हजार करोड़ रुपए की बकाया राशि वसूली का लक्ष्य तय किया गया हैं. 

प्रदेश के ऊर्जा मंत्री डॉ बीडी कल्ला का कहना है कि विभाग की कोशिश है कि घाटा कम किया जाए. इसके लिए टीएडंडी लॉस कम करने की कवायद की जा रही है. अधिक संख्या में जीएसएस बनाकर कोशिश की जा रही हैं. बिजली छीजत को रोका जाए, इसके अलावा बकाया वसूली भी समय पर करने के निर्देश दिए गए हैं.

डिस्कॉम्स का घाटा लगातार बढ़ रहा है. इसका असर प्रदेश के डिस्कॉम्स को बिजली बेचने वालों पर भी हैं. इनको भुगतान मिलने में भी लगातार देरी है. देशभर में कंपनियों को भुगतान करने में सबसे खराब स्थिति में बिहार और राजस्थान हैं. लगातार घाटे में इजाफे के बाद विभाग डिस्कॉम्स के खराब अर्थतंत्र को नई रफ्तार देने की कोशिश में हैं. डिस्कॉम्स के नियमित खर्चों के प्रभावी ऑडिट की भी मांग उठ रही हैं, ताकि अर्जेंट वर्क के नाम पर ठेकेदारों के जरिए अधिकारियों की जेब में जाने वाली मोटी धनराशि को रोका जाएगा. इसके साथ ही फीडर्स के निजीकरण पर भी विभाग ध्यान लगा रहा है.