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राजस्थान: बदला गया लो फ्लोर बसों का रूट, अब तय करेंगी लंबा सफर

वर्तमान में लो-फ्लोर बसों का संचालन मेट्रो स्टेशन से 12 किलोमीटर तक किया जा रहा है. इसे 6 किलोमीटर तक बढ़ाकर करीब 18 किलोमीटर किया जाएगा. 

राजस्थान: बदला गया लो फ्लोर बसों का रूट, अब तय करेंगी लंबा सफर
बसों को रहे घाटे के कारण बदला गया रूट. (फाइल फोटो)

मानसरोवर: जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र में यात्रियों का मेट्रो के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए शुरू की गईं जेसीटीएसएल की लो-फ्लोर बसें घाटे में आ गई हैं. दरअसल, इन बसों में यात्रिभार इतना कम आ रहा है कि जेसीटीएसएल डीजल के पैसे भी नहीं निकाल पा रहा है. जिसके बाद इस नुकसान से उभरने के लिए अब जेसीटीएसएल प्रबंधन द्वारा बसों को मेट्रो स्टेशन से गांवों में चलाने का निर्णय लिया गया है. 

जिसके बाद  अब नए रूट के तहत बस मानसरोवर स्टेशन से लेकर मुहानामंडी होते हुए कपूररावाला गांव तक जाएंगी. इससे पहले बस मुहाना मंडी तक ही संचालित थी. डेढ़ महीने पहले मेट्रो प्रशासन के कहने पर जेसीटीएसएल बसों का संचालन मानसरोवर स्टेशन से शुरू किया गया था. इसके पीछे उद्देश्य था कि लोग आसानी से मेट्रो स्टेशन तक पहुंच कर सफर कर सकें, लेकिन आलम यह रहा कि लो-फ्लोर बसों में यात्रिभार इतना गिर गया कि 9 से 10 रुपए प्रति किलोमीटर इनकम ही प्राप्त हो रही है. जबकि संचालन पर हो रहे डीजल खर्च के हिसाब से आमदनी प्रति किमी 35-40 रुपए होनी चाहिए. ऐसे में 30 रुपए प्रति किमी नुकसान रोज एक बस का हो रहा है.

वर्तमान में लो-फ्लोर बसों का संचालन मेट्रो स्टेशन से 12 किलोमीटर तक किया जा रहा है. इसे 6 किलोमीटर तक बढ़ाकर करीब 18 किलोमीटर किया जाएगा. इसके दो फायदे होंगे एक ओर जहां पर लो-फ्लोर में यात्रीभार बढ़ने से आमदनी होगी, वहीं ग्रामीणों को शहर तक आने-जाने के लिए बस उपलब्ध होगी. दूसरी ओर बस ग्रामीण लोगों को मेट्रो स्टेशन तक छोड़ेगी, ताकि लोग शहर मे आकर मेट्रो की सवारी कर सकें.

गौरतलब है कि मेट्रो प्रबंधक ने पिछले दिनों जेसीटीएसएल को पत्र लिखकर मेट्रो स्टेशन से गांवों तक लो-फ्लोर बसों के संचालन के लिए आग्रह किया था. जिससे गांवों के यात्री मेट्रो स्टेशन तक पहुंच सके और मेट्रो की सवारी करके शहरों तक का सफर कर सके. जिससे लो-फ्लोर बसों के साथ मेट्रो की भी आमदनी बढ़ सके. तत्कालीन जेसीटीएसएल एमडी सुरेश ओला ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए मेट्रो स्टेशन से 12 किलोमीटर तक सात बसों का संचालन किया लेकिन अच्छी आमदनी नहीं होने के कारण वर्तमान एमडी श्यामलाल गुर्जर ने इसे बंद कर दिया. जिसके बाद एक बार फिर मेट्रो प्रबंधक ने पत्र लिखकर लो-फ्लोर बसों के संचालन की बात कही और इसका रूट 12 किलोमीटर से बढ़ाकर 18 किलोमीटर करने का आग्रह किया.