राजस्थान: नई शिक्षा नीति पर प्रदेश के मंत्रियों ने उठाया सवाल, कहा...

राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा और तकनीकी एवं संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने नई नीति में कई कमियां गिनाई है.

राजस्थान: नई शिक्षा नीति पर प्रदेश के मंत्रियों ने उठाया सवाल, कहा...
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कुछ बिंदु प्रदेश के शिक्षा मंत्रियों को निशाने पर दिखे.

जयपुर: बुधवार को मोदी कैबिनेट की ओर से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी मिली. मंजूरी मिलने के साथ ही, अब प्रदेश के शिक्षा मंत्रियों ने इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कुछ हद तक स्वागत किया तो वहीं, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कुछ बिंदु प्रदेश के शिक्षा मंत्रियों को निशाने पर भी दिखे.

राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा और तकनीकी एवं संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने नई नीति में कई कमियां गिनाई है. दरअसल, 34 साल के बाद देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी मिल गई. 1986 में बनी पुरानी शिक्षा नीति और साल 2020 की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में बहुत से अंतर देखने को मिला है.

इन बदलावों को लेकर राजस्थान के शिक्षा मंत्रियों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है. प्रदेश की स्कूली शिक्षा का जिम्मा संभाल रहे शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने, नई शिक्षा नीति पर एक और राज्य के सुझाव को माने जाने पर आभार जताया तो, दूसरी तरफ उन्होंने शिक्षक भर्तियों में साक्षात्कार को शामिल करने पर ऐतराज भी जताया है.

शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि 'शिक्षक भर्ती में साक्षात्कार के नियम से भ्रटाचार और भाई भतीजावाद को बढ़ावा मिलेगा. जो व्यक्ति परीक्षा पास करके अपनी योग्यता को साबित कर चुका है, फिर उसके बाद साक्षात्कार का कोई औचित्य नहीं बचता है. इसके साथ ही शिक्षको की गैर शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी नहीं लगाने, जैसे सुझाव मानने पर एमएचआडी (HRD) का आभार भी जताते हैं. जबकि आंगनबाडियों को प्री प्राइमरी के तौर पर शामिल करने जैसे बिंदुओ को भी राज्य द्वारा दिए गए सुझाव बताएं,

हालांकि, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में क्वालिटी एजुकेशन के लिए कुछ खास नजर नहीं आया. एक्स्ट्रा बजट की कोई बात नहीं की गई है. नई नीति में राज्यों को सपोर्ट करने की बात नहीं की गई. राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) के समय की 1986 की नीति जैसा ही है. कोई ज्यादा बदलाव नहीं है.

वहीं, दूसरी ओर नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर तकनीकी एवं संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग बिल्कुल सहमत नजर नहीं आए. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर मंत्री सुभाष गर्ग ने केन्द्र सरकार को आड़े हाथों लिया. मंत्री सुभाष गर्ग ने कहा कि, 'नई पॉलिसी एक आईडियोलॉजी को लागू करने के लिए नजर आती है. सेंट्रल एंट्रेंस टेस्ट के जरिए ग्रामीण और गरीब स्टूडेंट्स कैसे प्रवेश ले सकेंगे ये एक बड़ा सवाल है. साथ ही, टोनोमस और रेजिडेंशियल पॉलिसी व्यवहारिक नहीं है.

उन्होंने कहा कि, एफिलिएट कॉलेजों में सम्भव नहीं है. स्टेट को अगर केन्द्र सरकार कुछ सुविधा देती है तो, कुछ हो सकता है नहीं तो ये नीति व्यवहारिक नहीं हो सकती.

इसके साथ ही, मंत्री सुभाष गर्ग ने कहा कि, 5+3+3+4 के फॉर्मूला ग्रामीण क्षेत्रों में संभव नहीं हो सकता है. बीजेपी सरकार किसी हिडन एजेडा को लागू करने का प्रयास कर रही है. शिक्षा में किसी भी प्रकार का निजीकरण नहीं होना चाहिए. केंद्र की किसी कमेटी ने राज्यो के उच्च शिक्षा संस्थान के प्रतिनिधियों को बुलाया नहीं, केंद्रीकृत के बजाय सत्ता का विकेंद्रीकृत होना चाहिए.

इसके साथ ही जो सरकार एनजीओ (NGO) के खिलाफ हुआ करती थी वो, आज एनजीओ को आगे बढ़ा रही है.ऐसे में राष्ट्रीय शिक्षा नीति संदेह के घेरे में नजर आती है. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के ड्राफ्ट पर जब आपत्तियां मांगी गई थी, तब भी इस पर घमासान देखने को मिला था और अब केबिनेट की मंजूरी के बाद एक बार फिर से प्रदेश के मंत्री इस नीति के खिलाफ खड़े हो गए हैं.