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राजस्थान: मोटर गैराज ने JCTSL से मांगे चालक, लगाई जा रही मंत्रियों की सिफारिश

जेसीटीएसएल एमडी शुचि शर्मा ने बताया की जेसीटीएसएल के पास बसों की कमी चल रही है. हाल ही में सांगानेर डिपो की 70 बसों को नकारा घोषित कर दिया है. 

राजस्थान: मोटर गैराज ने JCTSL से मांगे चालक, लगाई जा रही मंत्रियों की सिफारिश
फाइल फोटो

जयपुर: जेसीटीएसएल में चालकों को मोटर गैराज और जिला पूल में भेजने की कवायद चल रही है. ऐसे में अच्छे जिलो में चालको को भेजने की भी सिफारिशें आ रही हैं. सबसे ज्यादा अधिकारियों और मंत्रियों के चालक बनने की सिफारिशें आ रही हैं. जिसमें जयपुर और भरतपुर की सिफारिशों की संख्या ज्यादा है.

अब तक गृह जिले में या फिर प्राइम पोस्टिंग के लिए अफसरों को लॉबिंग की खबरे सुनी होंगी लेकिन अब इस लॉबिंग में जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड के चालक भी पीछे नहीं है. मंत्रियों और अफसरों के चालक बनने के लिए लंबी फेरिहस्त तैयार हो चुकी है. जिसमें सबसे ज्यादा संख्या जयपुर और भरतपुर जिलों की है. जयपुर और जोधपुर मोटर गैराज में 15 ही जगह है, जबकि जयपुर के लिए ही 50 से अधिक आवेदन आए हैं. वहीं भरतपुर में जहां तीन ही जगह हैं, वहां के लिए 30 से अधिक आवेदन आए हैं. इसके बाद चालकों ने सीकर, टोंक और दौसा जाने की इच्छा जताई है. एक ही जिले के दर्जनों आवेदन आने के बाद जेसीटीएसएल ने चालकों से भी दो-दो जगह मांगी है.

जेसीटीएसएल एमडी शुचि शर्मा ने बताया की जेसीटीएसएल के पास बसों की कमी चल रही है. हाल ही में सांगानेर डिपो की 70 बसों को नकारा घोषित कर दिया है. ऐसे में जेसीटीएसएल के पास 100 से अधिक चालक बिना काम बैठे हैं. प्रबंधन हर महीने इनको 30 लाख रुपए से अधिक वेतन भुगतान कर रहा है. इधर मोटर गैराज ने भी 95 चालकों की मांग की है. ऐसे में इन्हें मोटर गैराज में प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा रहा है. शर्मा ने बताया कि जेसीटीएसएल ने जिला पूल और मोटर गैराज में चालकों को भेजने के लिए अंतिम सूची लगभग तैयार कर ली है. इसे अब मोटर गैराज विभाग को भिजवाया जाएगा, जहां से इसे स्वीकृति मिल जाएगी. बता दें कि चालकों की कमी को देखते हुए मोटर गैराज ने जेसीटीएसएल से चालकों की मांग की थी.

बहरहाल, जेसीटीएसएल से भले ही डेप्युटेशन पर चालकों को जिला पूल और मोटर गैराज भेजने की तैयारी की जा रही है. लेकिन पहले से ही जेसीटीएसएल के अफसरों की चालक और परिचालकों पर बड़ी ही कृपा बरसा रही है. चौंकाने वाली बात यह है कि लो-फ्लोर बसों के संचालन में चालक और परिचालकों की कमी होने के बाद भी प्रबंधन ने करीब 105 चालक-परिचालकों को दफ्तर काम में लगा रखा है. ये सभी चालक और परिचालक जेसीटीएसएल में अफसरों की तर्ज पर फाइव डे वीक में काम कर रहे हैं.