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राजस्थान: आदिवासी युवाओं को लुभाने के लिए छात्रसंघ चुनाव में बने नए समीकरण

इस बार बीपीवीएम के बैनर तले उदयपुर जिले के राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय में पुरा पैनल उतरा है. 

राजस्थान: आदिवासी युवाओं को लुभाने के लिए छात्रसंघ चुनाव में बने नए समीकरण
पहली बार चुनावी मैदान में उतरी बीपीवीएम का फोकस संभाग के आदिवासी अंचल से आने वाली छात्रों पर है.

उदयपुर/ अविनाश जगनावत: प्रदेश में इन दिनों छात्रसंघ चुनाव को लेकर कॉलेज कैंपस चुनावी रंग में रंगा हुआ. चुनाव में सभी छात्र संघटनों को विश्वविद्यालय के चुनाव को जीतने पर फौकस रहता है. लेकिन इस पर उदयपुर के एक मात्र राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय के चुनाव हर बार की तहर कुछ अलग हैं. यहां चुनावी मैदान में इस बार एनएसयूआई ने अपना प्रत्याशी नहीं उतरा तो उदयपुर में पहली बार बीटीपी का समर्थित छात्र संगठन भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्च ने अपना प्रत्याशी उतार छात्र राजनीती में एक नया मोड़ दिया है. 

आदिवासी मतदाताओं के दम पर विधानसभा चुनाव में उदयपुर संभाग की दो सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भारतीय ट्राइबल पार्टी की नजर अब आदिवासी युवाओं को एक जुट करने पर है. यही कारण है कि बीटीपी छात्रसंघ चुनावो में भी सक्रिय होने लगी है. यही कारण है कि भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा को लेकर बीटीपी अब छात्रसंघ चुनाव में भी सक्रिय होती नजर आ रही है. इस बार बीपीवीएम के बैनर तले उदयपुर जिले के राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय में पुरा पैनल उतरा है. जिसे कॉलेज में पिछले सात सालों से चुनावी हार का सामना कर रही एनएसयूआई ने भी समर्थन दे दिया है. 

पहली बार चुनावी मैदान में उतरी बीपीवीएम का फोकस संभाग के आदिवासी अंचल से आने वाली छात्रों पर है. यही कारण है कि कॉलेज की समस्याओं के साथ बीपीवीएम के प्रत्याशी आदिवासी छात्राओं की समस्या को लेकर मतदाताओं के बीच में वोट मांगने के लिए जा रहे हैं. यही नहीं पहली बार चुनावी मैदान में उतरी बीवीपीएम ने अपने चारों प्रत्याशी जनजाति वर्ग के ही उतारें है. 

बीपीवीएम के चुनावी मैदान में उतरने के बाद उसे एनएसयूआई के मिले समर्थन के बाद कॉलेज में लगातार सात सालों से जीत दर्ज कर रही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लिए इस बार चुनावी मैदान में जीत दर्ज करना बड़ी चुनौती साबीत होने लगा. यही कारण है कि एबीवीपी ने इस पर एसटी छात्र पायल परमार को अपना प्रत्याशी बनाया है. यही नहीं इस बीच एबीवीपी से बागी हो कर नेहा शर्मा ने भी अपने पूरे पेनल के साथ चुनावी मैदान में ताल ठोक दी. हालांकि, चुनावी मैदान में अपना भाग्य आजमा रहे प्रत्याशी कॉलेज में जातिगत आधार पर वोटिंग होने को सिरे से खारिज करते है. 

बहरआल विधानसभा चुनाव में तो बीटीपी अपनी उपस्थिति को दर्ज कराने में सफल रही है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या बीपीवीएम भी कैंपस के चुनाव में अपनी उपस्थिति को दर्ज करा मेवाड़ संभाग के छात्रसंघ चुनाव में एक नया अध्याय जोड़ने में सफल हो पाती है या नहीं.