राजस्थान:केंद्रीय वित्त आयोग सदस्यों ने 4 दिन का दौरा पूरा, प्रदेश की मांगों पर हुई चर्चा

जयपुर में दो दिन गांव शहर, पंचायत, निकाय, जनप्रतिनिधि, सरकारी अधिकारियों और मंत्रीमंडल के सदस्यों से चर्चा कर राजस्थान की मांगों, आवश्यकताओं, खामियों और विकास के नए रास्तों पर केंद्रीय वित्त आयोग सदस्यों ने चर्चा की. 

राजस्थान:केंद्रीय वित्त आयोग सदस्यों ने 4 दिन का दौरा पूरा, प्रदेश की मांगों पर हुई चर्चा
गहलोत सरकार के कामकाज पर आयोग सदस्य संतुष्ट नजर आए.

जयपुर: 15वें केंद्रीय वित्त आयोग का प्रदेश का चार दिवसीय दौरा सोमवार को पूरा हुआ. इस दौरान गहलोत सरकार ने अपनी उम्मीदों का खाका आयोग अध्यक्ष एनके सिंह को सौंपा. जिस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की बात आयोग ने कहीं. 

आयोग ने चार दिन के दौरे में चार बातों पर अधिक फोकस देने की बात कहीं. जिसमें जल संकट का प्रभावी समाधान, पर्यटन संभावनाओं में इजाफा, कर्ज के भार में कमी और शिक्षण प्रक्रिया शामिल है. गहलोत सरकार के कामकाज पर आयोग सदस्य संतुष्ट नजर आए.

गहलोत के काम से आयोग खुश
केंद्रीय वित्त आयोग की प्रदेश में जोधपुर से शुरू हुई यात्रा जयपुर में निष्कर्ष पर पहुंची. जयपुर में दो दिन गांव, शहर, पंचायत, निकाय, जनप्रतिनिधि, सरकारी अधिकारियों और मंत्रीमंडल के सदस्यों से चर्चा कर राजस्थान की मांगों, आवश्यकताओं, खामियों और विकास के नए रास्तों पर चर्चा की. इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से साथ राजस्थान के विकास को लेकर खास मंत्रणा हुआ. 

इस दौरान मुख्य सचिव ने प्रदेश की डिमांड आयोग सदस्यों के सामने अपनी बात रखी. आयोग ने भी विभिन्न बैठकों के बाद मीडिया से मुखातिब होकर प्रदेश में रहे कार्यों पर संतोष जताया. 

आयोग अध्यक्ष एनके सिंह ने कहा कि दौरे में जोधपुर जिले की पंचायत में भ्रमण का अवसर मिला, वहां जल संरक्षण, भूमि जल संरक्षण और बुनकर काम बेहतर दिखा. 

आयोग अध्यक्ष ने राजस्थान में जल के संकट पर काम करने की आवश्यकता जताई. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल को प्राथमिकता दी हैँ, सोलर एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी में काम सराहनीय हैं. 

राजस्थान ने अपनी प्रजेंटेशन में 1 लाख 20 हजार मेगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन संभावनाओं को दर्शाया हैं. आयोग ने कहा कि हमारे लिहाज़ से सरकार अच्छी दिशा में प्रगति कर रही हैं.

चार दिन में चार बातों पर फोकस
केंद्रीय वित्त आयोग अध्यक्ष एनके सिंह  ने कहा कि रूफ टॉप से वर्षा जल का संरक्षण ही सही कदम हैँ. गहलोत सरकार के प्रस्तावों पर प्रमुखता से विचार किया जाएगा. 4 मूल प्रश्न राज्य सरकार के सामने हैँ. इनमें राज्य के लिए राजकोषीय घाटा बड़ी समस्या हैँ. उदय योजना के चलते 66 हजार करोड़ का भार पड़ा हैँ, राज्य इससे उबर नहीं पाया हैँ. इसके लिए ऊर्जा के अन्य संसाधन विकसित करने होंगे. पेयजल संकट राजस्थान के लिए गम्भीर विषय हैं. वर्षा जल संरक्षण, सीमित और उचित उपयोग आवश्यक हें. केवल 13 ब्लॉक ही पेयजल के लिए शेष हैँ. प्रदेश पर्यटन सम्भावनाओं को भुनाने में असफल रहा हैँ.

पर्यटन में इजाफे के लिए हवाई सेवाओं के विस्तार को आयोग ने जरूरी बताया. पर्यटन संभावनाओं को लेकर कई प्रस्ताव मुख्यमंत्री गहलोत ने भी आयोग के सामने रखें. शिक्षा में सुधार की भी आयोग ने आवश्यकता जताई. उन्होंने आंगनबाड़ी को प्री प्राइमरी के तौर पर विकसित करने का सुझाव दिया. सरकार को वेतन और पेंशन खर्चों के भार में कमी का सुझाव भी आयोग ने दिया.

स्वागत से बंधी उम्मीद
विशेष राज्य के दर्जें, केंद्रीय करों में भागीदारी, विशेष फंड में खर्चें की अनुमति की अनुशंषा जैसे कई अहम सवालों को आयोग सदस्यों ने चतुराई से केंद्र सरकार के पाले में डाला.

गहलोत सरकार ने चार दिन में आयोग सदस्यों की मेहमान नवाजी में कोई कसर नहीं छोड़ी, वीवीआईपी ट्रीटमेंट और सितारा होटलों में ठहराव की सुविधा प्रदान की गई. आवाभगत से खुश आयोग सदस्य प्रदेश की मांगों को दरकिनार नहीं करेंगे ऐसी उम्मीद सरकारी मशीनरी को हैं. आयोग अब कुछ ही दिनों में उत्तरप्रदेश का दौरा करेगा, इसके बाद नवंबर 2019 तक केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी