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राजस्थान: अब मंत्रियों के बंगलों पर ही नहीं कांग्रेस मुख्यालय में भी लगेगा जनता दरबार

अभी तक सरकारी आवास पर ही जनसुनवाई करने वाले राजस्थान सरकार के मंत्रियों को अब पीसीसी में भी जनता दरबार लगाना होगा. बीजेपी सरकार की तर्ज पर अब सप्ताह में 5 दिन यानी महीने में 20 दिन पीसीसी में बैठकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुनना होगा.

राजस्थान: अब मंत्रियों के बंगलों पर ही नहीं कांग्रेस मुख्यालय में भी लगेगा जनता दरबार
राजस्थान में सीएम और मंंत्रियों का जनता दरबार लगता है. (फाइल फोटो)

जयपुर: अभी तक सरकारी आवास पर ही जनसुनवाई करने वाले राजस्थान सरकार(Rajasthan Government) के मंत्रियों को अब पीसीसी (Rajasthan Congress Office)  में भी जनता दरबार लगाना होगा. बीजेपी सरकार(BJP government) की तर्ज पर अब सप्ताह में 5 दिन यानी महीने में 20 दिन पीसीसी में बैठकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं(Congress Workers) की समस्याओं को सुनना होगा. 

राजस्थान में सत्ता और संगठन के बीच तालमेल बेहतर करने के लिए कार्यकर्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए यह कदम उठाया जा रहा है. बीजेपी शासन(BJP Rule) के दौरान जिस बात को लेकर कांग्रेस बीजेपी को कोस रही थी उसे अब राजस्थान कांग्रेस के दफ्तर में भी लागू किया जाएगा. राजस्थान कांग्रेस के जयपुर दफ्तर में महीने के 20 दिन सभी मंत्री कार्यकर्ताओं के कामों के लिए बैठेंगे. जहां पर बीजेपी के तर्ज पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की सुनवाई की जाएगी. 

आलाकमान के निर्देश पर लिया गया फैसला
पार्टी आलाकमान के निर्देशों के बाद यह फैसला किया गया है कि मंत्री जयपुर में रहते हैं तो महीने के 20 दिन अपने दफ्तर जाने से पहले कांग्रेस के दफ्तर में बैठकर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की समस्या सुनेंगे और उसे दूर करेंगे. इसके अलावा कोई भी मंत्री किसी भी जिले के दौरे पर जाता है तो जिला कांग्रेस के दफ्तर में जाएगा और वहां पर कार्यकर्ताओं की सुनवाई करेगा. 

कांग्रेस मुख्य़ालय में मंत्री मौजूद रहेंगे 5 दिन
इस नई व्यवस्था के तहत बीते मंत्री को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में सप्ताह में पांच दिन और महीने में 2 दिन अपने जिलों में रहना होगा और जिला मुख्यालयों पर जन सुनवाई करनी होगी. पीसीसी में और जिला स्तर पर होने वाली इन सुनवाई में आने वाली समस्याओं का जवाब भी 15 दिन के भीतर देना होगा. 

जल्द निर्धारित होगा दिन और समय़
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने बताया कि हर मंत्री का दिन भी जल्द ही निर्धारित किया जायेगा इसके अलावा प्रदेश के तमाम मंत्रियों को ये निर्देश दिये गयें है कि वो महीने में 2 दिन अपने अपने प्रभारी जिलों में जायेंगे और प्रशासनिक अधिकारीयों के साथ बैठकें करेगे तो वहीं जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय पर भी मंत्रियों को इन दो दिनो तक जनसुनवायी करनी होगी. इतना ही मंत्रियों के पास जनसुनवाई करनी होगी. इसके साथ ही मंत्रियों को अब सप्ताह में में तीन दिन राजधानी जयपुर में ही रहने के निर्देश दे दिये गयें है.

तीन दिन जयपुर में रहेंगे मौजूद
पहले केवल बुधवार को मंत्रीमंडल की बैठक के लिए मंत्रियों को जयपुर में रहने के निर्देश दिये गये थे. अब नये आदेशों के अनुसार मंत्रियों को सोमवार ,मंगलवार और बुधवार को जयपुर में रहना होगा. 

पायलट ने भी रखी थी मांग
दरअसल, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और राज्य के उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट कार्यकर्ता और विधायकों की मांगों की सुनवाई नहीं करने का मुद्दा उठा चुके हैं. कई बार पीसीसी की बैठकों में कहा है कि कि राज्य में कांग्रेस की सरकार तो बन गई है. मगर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा. इस फैसला लेने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि राजस्थान में लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस स्थानीय निकाय के चुनाव से पहले अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरना चाहती है. साथ ही इस कवायद से कांग्रेस के सदस्यता अभियान में भी तेजी आएगी.

सीएम की कुर्सी संभालने पर गहलोत ने दिया था निर्देश
इससे पहले जब कांग्रेस की सरकार बनी थी तब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यह आदेश निकाला था कि राज्य के सभी मंत्री अपने आवास पर सुबह जनसुनवाई करेंगे, ताकि इसमें बीजेपी और कांग्रेस के कार्यकर्ता का भेद नहीं हो पाए और सभी लोग आकर मंत्री के यहां अपनी समस्या कह सकें. 

बीजेपी की राह चलने को मजबूर कांग्रेस
उसमें यह कहा गया था कि हम बीजेपी की तरह अपने दफ्तर में अपने ही कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं करेंगे. यह परंपरा पिछली बीजेपी सरकार के दौरान शुरू हुई थी. इसमें बीजेपी के मंत्री बीजेपी के दफ्तर में बैठकर बीजेपी के कार्यकर्ताओं की सुनवाई करते थे. उसके लिए उन्हें बीजेपी के कार्यकर्ता होने का प्रमाण पत्र देना पड़ता था. लेकिन अब अपने कार्यकर्ताओं की मांग और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कांग्रेस को भी बीजेपी की राह पर चलने पर मजबूर होना पड़ा है.