राजस्थान: बरसात के चलते अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या, जमीन पर इलाज करने को मजबूर डॉक्टर्स

मौसमी बीमारियों के कारण निजी चिकित्सालयों में भी रोगियों की भीड़ बढ़ रही है. मौसमी बीमारियों की चपेट में आए रोगी और परिजन चिकित्सालय में इस तरह के हालात के बावजूद उपचार कराने को मजबूर है. 

राजस्थान: बरसात के चलते अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या, जमीन पर इलाज करने को मजबूर डॉक्टर्स
प्रतीकात्मक तस्वीर

दीपक व्यासचित्तौड़गढ़: बरसात के दौर में और बदलते मौसम के साथ ही मौसमी बीमारियों (Seasonal diseases) का प्रकोप फैलने से रोगियों (patients) की संख्या बढ़ने के कारण चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh) जिला चिकित्सालय में फर्श पर लेटा कर रोगियों का उपचार करना चिकित्सकों की मजबूरी बन चुका है.

इस वर्ष मानसून महरबान होने के साथ ही अब तक लगातार वर्षा का दौर जारी है. जिसके चलते औसत से भी अधिक वर्षा के कारण मौसमी बीमारियों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है. बरसात के बाद गड्डों और नालों में भरे पानी में मच्छरों के कारण डेंगू, मलेरिया, चिकन गुनिया जैसी घातक बिमारियों के फैलने का खतरा मंडरा रहा है. इधर जिले के अन्य चिकित्सालयों में चिकित्सकों की कमी के कारण दूर दराज से रोगी जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए पहुंचते हैं. 

जहां 400 बेड होने के बावजूद मरीजो की बढ़ती संख्या के कारण वार्डो में फर्श पर उपचार करना चिकित्सकों की मजबूरी बन चुका है. इतना ही चिकित्सालय के आउट डोर और दवा केंद्रों पर भी लोगों की लम्बी कतारे लग रही हैं.

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मौसमी बीमारियों के कारण निजी चिकित्सालयों में भी रोगियों की भीड़ बढ़ रही है. मौसमी बीमारियों की चपेट में आए रोगी और परिजन चिकित्सालय में इस तरह के हालात के बावजूद उपचार कराने को मजबूर है. कमोबेश इसी तरह के हालात चिकित्सालय के प्रत्येक वार्ड में हैं. जहां मरीजों की संख्या बढ़ जाने से जमीन पर ही उनका उपचार किया जा रहा है. इधर चिकित्सा विभाग द्वारा अब तक मच्छरों से निजात दिलाने के लिए फोगिंग मशीन का उपयोग भी शुरू नहीं किया है.

बरसात का दौर जारी होने के बावजूद मौसमी बिमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है और ऐसे में बरसात रुकने पर रोगियों की संख्या में निश्चित रूप से वृद्धि होगी, उस समय हालात और अधिक बिगड़ जाएंगे जिससे निपटने के लिए चिकित्सकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.