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राजस्थान: NTT की परीक्षी से पहले नहीं हुई जांच, परीक्षा में बैठे 22 हजार अयोग्य छात्र

एनटीटी की आखिरी भर्ती में केवल 1400 अभ्यर्थी ही परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते थे, क्योंकि उन्हीं के पास एनटीटी की डिग्री है

राजस्थान: NTT की परीक्षी से पहले नहीं हुई जांच, परीक्षा में बैठे 22 हजार अयोग्य छात्र
प्रदेश में केवल 1400 अभ्यर्थी ऐसे है जिनके पास एनटीटी की डिग्री है

आशीष चौहान/जयपुर: राजस्थान में एनटीटी (नर्सरी टीचर ट्रेनिंग) की परीक्षा से पहले ही विवादों में घिर चुकी है. परीक्षा से पहले ही बडी धांधली सामने आ रही है.रविवार को हुई एनटीटी भर्ती के लिए 24 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी परीक्षा में बैठेंगे, लेकिन आपको हैरानी होगी कि इनसे से 22 हजार अभ्यर्थी फर्जी डिग्री लेकर परीक्षा में बैठे. लेकिन इसके बावजूद भी आईसीडीएस और कर्मचारी चयन बोर्ड ने हाथ खडे़ कर लिए. परीक्षा से पहले ना तो जांच हुई और ना ही फर्जी अभ्यर्थियों को भर्ती से बाहर किया गया. ऐसे में परीक्षा के बाद इस भर्ती पर बड़े सवाल उठ रहे है.

राजस्थान में रविवार को हुई आखिरी बार एनटीटी डिग्रीधारी अभ्यर्थियों के लिए 1310 पदों के लिए एनटीटी भर्ती के लिए परीक्षा हुई. प्रदेश में कुल 2754 अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त पात्र कॉलेजों से एनटीटी की डिग्री ले रखी है. जबकि इनमें से करीब 1300 अभ्यर्थी ऐसे है जिनकी नौकरी लग चुकी है. यानि अभी प्रदेश में केवल 1400 अभ्यर्थी ऐसे है जिनके पास एनटीटी की डिग्री है. 

इसके बाद एनटीटी की आखिरी भर्ती में केवल 1400 अभ्यर्थी ही परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते थे, क्योंकि उन्हीं के पास एनटीटी की डिग्री है. लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इस भर्ती के लिए 1400 नहीं, बल्कि 24268 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है. यानि इसमें से 22868 अभ्यर्थी फर्जी डिग्री लेकर परीक्षा में बैठ रहे है. लेकिन इसके बावजूद भी महिला एवं बाल विकास और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड हाथ पर हाथ धरा बैठा रहा. कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष बीएल जाटावट का कहना है यह मामला हमारे संज्ञान में है, लेकिन जांच परीक्षा के बाद ही की जाएगी. जबकि अभ्यर्थी लगातार जांच की मांग कर रहे है. इसके बावजूद भी फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा में मौका दिया जा रहा है.

बाता दें कि एनसीटीई (National Council for Teacher Education) ने एनटीटी कोर्स को तृतीया श्रेणी शिक्षक भर्ती के लिए अमान्य करार देते हुए 2010 में यह कहा था कि केंद्र स्तर पर इसे मान्यता नहीं दी जाएगी. राज्य चाहे तो अपने स्तर पर एनटीटी का कोर्स करवा सकता है. लेकिन राजस्थान सरकार ने 2010 में ही एनटीटी कोर्स कराने वाले संस्थानों की मान्यता वापस ले ली थी. तब से राज्य में एनटीटी की परीक्षा भी बंद है. 

वहीं कोर्स बंद होने के बाद राजस्थान में ऐसे कई हजारों अभ्यर्थी थे, जिन्होंने एनटीटी में करियर बनाने के लिए कोर्स कर रहे थे. इसके बाद पिछली गहलोत सरकार में कोर्स किए हुए अभ्यर्थियों आंदोलन को देखते हुए तत्तकालीन गहलोत सरकार 2011-12 में महिला बाल विकास विभाग के अधीन शाला पूर्व प्राथमिक अध्यापक का कैडर बनाया और 500 पदों के लिए भर्ती निकाली, 2012 में परीक्षा हुई नौकरी मिली. उसके बाद बजट 2013 में गहलोत सरकार ने 1 हजार पदों की घोषणा और की. जिसकी परीक्षा 19 जनवरी 2014 को होनी थी, लेकिन तत्कालीन वसुंधरा सरकार ने परीक्षा को समीक्षा में ही डाल दिया. 

एनटीटी अभ्यर्थियों द्धारा आंदोलन के बाद 2016 में परीक्षा करवाई और  910 अभ्यर्थियों को नियुक्ति कर दी गई. उसके बाद शेष रहे अभ्यर्थियों द्धारा आंदोलन करने पर बजट 2018 में 1 हजार पदों की घोषणा की गई. एनटीटी संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष मोहन शर्मा का कहना है कि लगातार हमने सरकार से गुहार लगाई, लेकिन इसके बावजूद भी फर्जी अभ्यर्थियों को मौका दिया गया जो गलत है.